‘जन सुराज मजबूती से पंचायत चुनाव लड़ेगा। हमारा लक्ष्य हर जिला में जन सुराज का अध्यक्ष बनाना है।’ जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर ने यह घोषणा कर पंचायत चुनाव में BJP-RJD के लिए नई चुनौती खड़ी की है। बिहार में पंचायत चुनाव दलीय आधार पर नहीं होते। बड़ी पार्टियां अपने कार्यकर्ताओं की मदद से अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव लड़ती हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने 2026 पंचायत चुनाव के लिए परिसीमन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के नए परिसीमन की अधिसूचनाएं भी जारी होने लगी हैं। मौजूदा 8053 ग्राम पंचायतों के मुकाबले नई व्यवस्था में करीब 13 हजार मुखिया चुने जाने की तैयारी है। बिहार में 20-29 वर्ष के करीब 1.63 करोड़ मतदाता हैं। करीब 14 लाख युवा पहली बार वोट डालने वाले हैं। राज्य की करीब 58% आबादी 25 वर्ष से कम उम्र की है। आने वाले पंचायत चुनाव में इस युवा आबादी का मूड क्या रहने वाला है? प्रशांत किशोर के बांकीपुर जीतने के बाद पंचायत चुनाव लड़ने की घोषणा का क्या असर होगा? NDA और RJD के लिए ये जेन-जी कितना चुनैती पूर्ण होंगे पढ़िए स्पेशल रिपोर्ट..। सबसे पहले बिहार के GEN-G को जानिए 1.63 करोड़ युवा वोटर सबसे अहम होंगे बिहार में 20-29 साल के 1.63 करोड़ से ज्यादा मतदाता हैं। यह संख्या 2025 के विधानसभा चुनाव के समय सामने आई थी। इसके अलावा 18-19 वर्ष के करीब 14 लाख मतदाता पहली बार वोट डालने वाले थे। यानी पंचायत चुनाव में युवा आबादी निर्णायक भूमिका में हो सकती है। 58% आबादी 25 साल से कम उम्र की बिहार में करीब 58% आबादी 25 साल से कम उम्र की बताई जाती है। इसका मतलब है कि गांवों में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता हैं, जिनकी राजनीतिक सक्रियता आने वाले वर्षों में बढ़ेगी। पंचायत चुनाव उनके लिए पहला बड़ा अवसर हो सकता है। पहली बार वोट डालने वाले हैं 14 लाख युवा 2025 विधानसभा चुनाव में करीब 14 लाख युवा पहली बार वोट डालने वाले थे। पंचायत चुनाव तक इनमें से बड़ी संख्या स्थानीय राजनीति को समझने और प्रभावित करने की स्थिति में होगी। यह वर्ग पारंपरिक वोट बैंक से अलग अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर उम्मीदवार चुन सकता है। रोजगार सबसे बड़ा सवाल बिहार के युवाओं की राजनीति में नौकरी लगातार बड़ा मुद्दा है। 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले हुए सर्वे और रिपोर्ट्स में भी शिक्षा और रोजगार युवाओं की प्रमुख प्राथमिकताओं में रहे। पंचायत चुनाव में युवा सड़क, नाली और घर जैसे स्थानीय समस्याओं को लेकर वोटिंग तय कर सकते हैं। अब 3 पॉइंट में जानिए क्या है NDA की ताकत 1. 2025 में 202 सीटों की बड़ी जीत, गांव में खूब वोट मिले 2025 विधानसभा चुनाव में NDA ने 243 में 202 सीटें जीतीं। संयुक्त वोट शेयर 46.56% रहा। BJP को 20.45% और JDU को 19.61% वोट मिले। यानी दोनों दलों को मिलाकर वोट शेयर करीब 40.06% रहा। पंचायत चुनाव में यह सबसे बड़ा राजनीतिक आधार है। 2. BJP-JDU दोनों का वोट बेस बढ़ा BJP का वोट शेयर 2020 के 19.46% से बढ़कर 2025 में 20.45% हुआ। JDU का वोट शेयर 15.39% से बढ़कर 19.61% पहुंचा। सीटों में भी BJP 89 और JDU 85 पर पहुंची। यानी NDA के दोनों मुख्य दलों का अपना अलग वोट आधार मजबूत हुआ है। 3. गांव में सरकार के काम और संगठन का फायदा NDA की सबसे बड़ी ताकत सत्ता के साथ जुड़ा संगठन और सरकारी योजनाओं का नेटवर्क है। पंचायत चुनाव में पार्टी का चुनाव चिह्न नहीं होगा, लेकिन BJP-JDU के स्थानीय कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों का नेटवर्क NDA के समर्थन वाले उम्मीदवारों के पक्ष में काम कर सकता है। चुने गए ये जनप्रतिनिधि 2029 के लोकसभा चुनाव में काम आएंगे। NDA के सामने दो बड़ी चुनौती क्या होंगी 1. पंचायत में मोदी-नीतीश के नाम से ज्यादा स्थानीय चेहरा चलेगा यह जरूरी नहीं कि विधानसभा में NDA की 202 सीटों की जीत पंचायत चुनाव में सीधे ट्रांसफर हो। पंचायत चुनाव गैर-दलीय आधार पर होता है। यहां मतदाता मुखिया का काम, गांव में उपलब्धता और व्यक्तिगत संबंध देखेगा। इसलिए NDA के समर्थन वाले मुखिया-सरपंच जैसे पदों के प्रत्याशी का स्थानीय स्तर पर मजबूत होना जरूरी होगा। 2. 1.63 करोड़ युवा वोटर को रोकना सबसे बड़ी परीक्षा 2025 के विधानसभा चुनाव तक बिहार में 7.42 करोड़ मतदाता थे। इनमें 20-29 वर्ष के करीब 1.63 करोड़ मतदाता हैं। यह युवा पीढ़ी नौकरी, शिक्षा, परीक्षा और पलायन जैसे मुद्दों पर ज्यादा सवाल करती है। अगर युवा वोटर स्थानीय उम्मीदवारों में बदलाव तलाशता है तो NDA का पारंपरिक संगठन चुनौती में आ सकता है। जन सुराज जैसे नए विकल्प इसी खाली जगह को भरने की कोशिश करेंगे। 3 पॉइंट में समझिए क्या है RJD की ताकत 1. सबसे ज्यादा 23% वोट शेयर 2025 विधानसभा चुनाव में RJD को करीब 23% वोट मिले। यह किसी भी एक पार्टी का सबसे ज्यादा वोट शेयर था। पार्टी ने 143 सीटों पर चुनाव लड़कर 25 सीटें जीतीं। यानी हार के बावजूद उसके पास राज्यभर में करीब 1.15 करोड़ वोट का मजबूत आधार मौजूद है। 2. ग्रामीण बिहार में राजद का पुराना सोशल नेटवर्क RJD की सबसे बड़ी ताकत उसकी ग्रामीण सामाजिक और पंचायत स्तर तक फैले पुराने राजनीतिक रिश्ते हैं। 2025 में भी पार्टी का वोट शेयर 2020 के 23.11% से लगभग बराबर रहा। यानी विधानसभा सीटें 75 से घटकर 25 हुईं, लेकिन मूल वोट आधार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। 3. रोजगार का मुद्दा Gen-Z से जोड़ने की क्षमता तेजस्वी यादव ने रोजगार और सरकारी नौकरी को लगातार अपनी राजनीति का प्रमुख मुद्दा बनाया है। यह मुद्दा बिहार के युवा वोटरों की प्राथमिकताओं से सीधे जुड़ता है। पंचायत चुनाव में RJD अगर नौकरी के साथ शिक्षा, पलायन और स्थानीय रोजगार को जोड़ती है तो वह अपने पुराने ग्रामीण आधार को नई पीढ़ी तक पहुंचा सकती है। RJD के सामने दो बड़ी चुनौती क्या होंगी 1. 23% वोट 25 सीटों में क्यों सिमटा? RJD का सबसे बड़ा सवाल यही है कि सबसे ज्यादा वोट शेयर के बावजूद सिर्फ 25 सीटें क्यों मिलीं। विश्लेषण में वोटों के कुछ क्षेत्रों में ज्यादा केंद्रित होने और उन्हें सीटों में बदलने में कमजोरी सामने आई। पंचायत चुनाव में भी सिर्फ सामाजिक आधार काफी नहीं होगा, मजबूत स्थानीय उम्मीदवार जरूरी होंगे। 2. Gen-Z के लिए RJD के सामने जन सुराज का विकल्प BJP से नाराज युवा राजद के समर्थन वाले प्रत्याशी को वोट देंगे यह पक्का नहीं। युवा वोटरों के बीच रोजगार, शिक्षा और पलायन जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं। अगर RJD इन मुद्दों को स्थानीय युवा नेतृत्व से नहीं जोड़ पाती तो जन सुराज जैसे नए विकल्प को जगह मिल सकती है। अब जानिए कांग्रेस की क्या स्थिति रहने वाली है…
1. 8.87% वोट, लेकिन 6 सीटों पर सिमट गई पार्टी 2025 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 61 सीटों पर चुनाव लड़कर 6 सीटें जीतीं। उसे 43.74 लाख वोट यानी 8.87% वोट शेयर मिला। 2020 में कांग्रेस का वोट शेयर 9.48% था और उसे 19 सीटें मिली थीं। यानी वोट शेयर लगभग स्थिर रहा, लेकिन सीटें 19 से घटकर 6 हो गईं। 2. युवाओं के मुद्दों से Gen-Z वोटर लुभा सकती है बिहार में युवाओं के बीच रोजगार, शिक्षा, परीक्षा और पलायन बड़े मुद्दे हैं। 2023-24 में 15-29 वर्ष के युवाओं की बेरोजगारी दर 9.9% थी। कांग्रेस में राहुलग गांधी अगर इन मुद्दों को पंचायत स्तर के स्थानीय सवालों से जोड़ती है तो Gen-Z के बीच अपनी अलग जगह बना सकती है। राहुल गांधी लगातार इस पर काम भी कर रहे हैं। 3. पंचायत चुनाव में नए चेहरे खड़े करने का मौका कांग्रेस के लिए पंचायत चुनाव विधानसभा की हार से बाहर निकलकर जमीनी संगठन बनाने का अवसर है। पार्टी अगर युवा, शिक्षक, छात्र और सामाजिक कार्यकर्ताओं को बड़ी संख्या में आगे करती है तो चुनाव जीतने के साथ हजारों स्थानीय कार्यकर्ता भी तैयार हो सकते हैं। यही नेटवर्क 2029 में काम आएगा। कांग्रेस के सामने दो बड़ी चुनौती क्या होंगी 1. 8.71% वोट को सीट और संगठन में बदलना 2025 में कांग्रेस को 43.75 लाख वोट मिले, लेकिन सीटें सिर्फ 6 रहीं। यानी राज्यभर में वोट मौजूद होने के बावजूद वह पर्याप्त सीटों में नहीं बदल सका। पंचायत चुनाव में भी यही समस्या सामने आ सकती है। कांग्रेस को हर पंचायत में मजबूत स्थानीय उम्मीदवार और चुनावी टीम खड़ी करनी होगी। 2. Gen-Z का वोट सिर्फ BJP का विरोध करने से नहीं मिलेगा युवा BJP से नाराज हो तो जरूरी नहीं कि कांग्रेस को वोट दे। उसके सामने RJD और अब जन सुराज जैसे विकल्प भी हैं। 20-29 वर्ष के करीब 1.63 करोड़ युवा मतदाता और 25 साल से कम आबादी का करीब 58% हिस्सा कांग्रेस के लिए बड़ा अवसर है, लेकिन इसे वोट में बदलने के लिए स्थानीय युवा नेतृत्व चाहिए। जन सुराज: बांकीपुर की जीत के बाद पंचायत चुनाव सबसे बड़ी परीक्षा 1. बांकीपुर में BJP के गढ़ में 18,953 वोट से जीत प्रशांत किशोर ने बांकीपुर उपचुनाव में 63,203 वोट हासिल किए। BJP के नीरज कुमार को 44,250 वोट मिले। जीत का अंतर 18,953 वोट रहा। RJD की रेखा कुमारी 14,085 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। यह जन सुराज की पहली बड़ी चुनावी जीत है और पार्टी के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक प्रमाण भी। 2. 2025 की 3.44% वोट हिस्सेदारी के बाद पहला बड़ा ब्रेकथ्रू जन सुराज 238 सीटों पर 2025 विधानसभा चुनाव लड़ी थी। 3.44% वोट हासिल किए, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सकी। इसके बाद बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जीत ने पार्टी को एक विधानसभा सीट दी। यानी दो चुनावों के बीच पार्टी के प्रदर्शन में बड़ा बदलाव दिखा है। 3. Gen-Z के मुद्दों से जुड़ने की राजनीतिक जगह जन सुराज की राजनीति में रोजगार, शिक्षा और पलायन जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं। बांकीपुर जीत के बाद भी प्रशांत किशोर ने युवाओं के रोजगार पर फोकस किया है। क्षेत्र में दो साल में 10 हजार निजी नौकरियां दिलाने का वादा किया है। पंचायत चुनाव में यही एजेंडा युवाओं को लुभा सकता है। जन सुराज की सबसे बड़ी चुनौती, 13 हजार कैंडीडेट ढूंढना 1. बांकीपुर की जीत को पूरे बिहार में दोहराना सबसे बड़ी चुनौती बांकीपुर शहरी विधानसभा सीट है। यहां उपचुनाव में मतदान सिर्फ 34.30% रहा। यहां मिली जीत से यह पता नहीं चलता कि पूरे बिहार के ग्रामीण वोटर इसी तरह वोट देंगे। पंचायत चुनाव में जन सुराज को अलग-अलग सामाजिक समीकरण साधने होंगे। हजारों गांवों में ऐसे स्थानीय प्रत्याशी देने होंगे जिन्हें लोग पसंद करें। 2. 13 हजार के करीब मुखिया पदों के लिए जमीनी संगठन की परीक्षा पंचायत चुनाव में प्रशांत किशोर की लोकप्रियता अकेले पर्याप्त नहीं होगी। अगर करीब 13 हजार मुखिया चुने जाते हैं तो पार्टी को बड़ी संख्या में मजबूत स्थानीय उम्मीदवार और कार्यकर्ता चाहिए होंगे। बांकीपुर में व्यक्तिगत नेतृत्व काम आया, लेकिन पंचायत में हर गांव का अपना सामाजिक और राजनीतिक समीकरण होगा। यही जन सुराज की असली परीक्षा होगी। पंचायत चुनाव में युवाओं की होगी बड़ी भूमिका राजनीतिक विशेषज्ञ रवि शंकर उपाध्याय ने कहा, ‘पंचायत चुनाव में जेन जी बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं। बांकीपुर चुनाव ने बिहार ही नहीं पूरे देश को संदेश दिया है। अगर पार्टी लाइन पर चुनाव होता है तो प्रशांत किशोर को फायदा मिलेगा। कांग्रेस भी युवाओं को लुभाने के लिए कन्हैया कुमार को आगे कर रही है।’ ‘जन सुराज मजबूती से पंचायत चुनाव लड़ेगा। हमारा लक्ष्य हर जिला में जन सुराज का अध्यक्ष बनाना है।’ जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर ने यह घोषणा कर पंचायत चुनाव में BJP-RJD के लिए नई चुनौती खड़ी की है। बिहार में पंचायत चुनाव दलीय आधार पर नहीं होते। बड़ी पार्टियां अपने कार्यकर्ताओं की मदद से अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव लड़ती हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने 2026 पंचायत चुनाव के लिए परिसीमन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के नए परिसीमन की अधिसूचनाएं भी जारी होने लगी हैं। मौजूदा 8053 ग्राम पंचायतों के मुकाबले नई व्यवस्था में करीब 13 हजार मुखिया चुने जाने की तैयारी है। बिहार में 20-29 वर्ष के करीब 1.63 करोड़ मतदाता हैं। करीब 14 लाख युवा पहली बार वोट डालने वाले हैं। राज्य की करीब 58% आबादी 25 वर्ष से कम उम्र की है। आने वाले पंचायत चुनाव में इस युवा आबादी का मूड क्या रहने वाला है? प्रशांत किशोर के बांकीपुर जीतने के बाद पंचायत चुनाव लड़ने की घोषणा का क्या असर होगा? NDA और RJD के लिए ये जेन-जी कितना चुनैती पूर्ण होंगे पढ़िए स्पेशल रिपोर्ट..। सबसे पहले बिहार के GEN-G को जानिए 1.63 करोड़ युवा वोटर सबसे अहम होंगे बिहार में 20-29 साल के 1.63 करोड़ से ज्यादा मतदाता हैं। यह संख्या 2025 के विधानसभा चुनाव के समय सामने आई थी। इसके अलावा 18-19 वर्ष के करीब 14 लाख मतदाता पहली बार वोट डालने वाले थे। यानी पंचायत चुनाव में युवा आबादी निर्णायक भूमिका में हो सकती है। 58% आबादी 25 साल से कम उम्र की बिहार में करीब 58% आबादी 25 साल से कम उम्र की बताई जाती है। इसका मतलब है कि गांवों में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता हैं, जिनकी राजनीतिक सक्रियता आने वाले वर्षों में बढ़ेगी। पंचायत चुनाव उनके लिए पहला बड़ा अवसर हो सकता है। पहली बार वोट डालने वाले हैं 14 लाख युवा 2025 विधानसभा चुनाव में करीब 14 लाख युवा पहली बार वोट डालने वाले थे। पंचायत चुनाव तक इनमें से बड़ी संख्या स्थानीय राजनीति को समझने और प्रभावित करने की स्थिति में होगी। यह वर्ग पारंपरिक वोट बैंक से अलग अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर उम्मीदवार चुन सकता है। रोजगार सबसे बड़ा सवाल बिहार के युवाओं की राजनीति में नौकरी लगातार बड़ा मुद्दा है। 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले हुए सर्वे और रिपोर्ट्स में भी शिक्षा और रोजगार युवाओं की प्रमुख प्राथमिकताओं में रहे। पंचायत चुनाव में युवा सड़क, नाली और घर जैसे स्थानीय समस्याओं को लेकर वोटिंग तय कर सकते हैं। अब 3 पॉइंट में जानिए क्या है NDA की ताकत 1. 2025 में 202 सीटों की बड़ी जीत, गांव में खूब वोट मिले 2025 विधानसभा चुनाव में NDA ने 243 में 202 सीटें जीतीं। संयुक्त वोट शेयर 46.56% रहा। BJP को 20.45% और JDU को 19.61% वोट मिले। यानी दोनों दलों को मिलाकर वोट शेयर करीब 40.06% रहा। पंचायत चुनाव में यह सबसे बड़ा राजनीतिक आधार है। 2. BJP-JDU दोनों का वोट बेस बढ़ा BJP का वोट शेयर 2020 के 19.46% से बढ़कर 2025 में 20.45% हुआ। JDU का वोट शेयर 15.39% से बढ़कर 19.61% पहुंचा। सीटों में भी BJP 89 और JDU 85 पर पहुंची। यानी NDA के दोनों मुख्य दलों का अपना अलग वोट आधार मजबूत हुआ है। 3. गांव में सरकार के काम और संगठन का फायदा NDA की सबसे बड़ी ताकत सत्ता के साथ जुड़ा संगठन और सरकारी योजनाओं का नेटवर्क है। पंचायत चुनाव में पार्टी का चुनाव चिह्न नहीं होगा, लेकिन BJP-JDU के स्थानीय कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों का नेटवर्क NDA के समर्थन वाले उम्मीदवारों के पक्ष में काम कर सकता है। चुने गए ये जनप्रतिनिधि 2029 के लोकसभा चुनाव में काम आएंगे। NDA के सामने दो बड़ी चुनौती क्या होंगी 1. पंचायत में मोदी-नीतीश के नाम से ज्यादा स्थानीय चेहरा चलेगा यह जरूरी नहीं कि विधानसभा में NDA की 202 सीटों की जीत पंचायत चुनाव में सीधे ट्रांसफर हो। पंचायत चुनाव गैर-दलीय आधार पर होता है। यहां मतदाता मुखिया का काम, गांव में उपलब्धता और व्यक्तिगत संबंध देखेगा। इसलिए NDA के समर्थन वाले मुखिया-सरपंच जैसे पदों के प्रत्याशी का स्थानीय स्तर पर मजबूत होना जरूरी होगा। 2. 1.63 करोड़ युवा वोटर को रोकना सबसे बड़ी परीक्षा 2025 के विधानसभा चुनाव तक बिहार में 7.42 करोड़ मतदाता थे। इनमें 20-29 वर्ष के करीब 1.63 करोड़ मतदाता हैं। यह युवा पीढ़ी नौकरी, शिक्षा, परीक्षा और पलायन जैसे मुद्दों पर ज्यादा सवाल करती है। अगर युवा वोटर स्थानीय उम्मीदवारों में बदलाव तलाशता है तो NDA का पारंपरिक संगठन चुनौती में आ सकता है। जन सुराज जैसे नए विकल्प इसी खाली जगह को भरने की कोशिश करेंगे। 3 पॉइंट में समझिए क्या है RJD की ताकत 1. सबसे ज्यादा 23% वोट शेयर 2025 विधानसभा चुनाव में RJD को करीब 23% वोट मिले। यह किसी भी एक पार्टी का सबसे ज्यादा वोट शेयर था। पार्टी ने 143 सीटों पर चुनाव लड़कर 25 सीटें जीतीं। यानी हार के बावजूद उसके पास राज्यभर में करीब 1.15 करोड़ वोट का मजबूत आधार मौजूद है। 2. ग्रामीण बिहार में राजद का पुराना सोशल नेटवर्क RJD की सबसे बड़ी ताकत उसकी ग्रामीण सामाजिक और पंचायत स्तर तक फैले पुराने राजनीतिक रिश्ते हैं। 2025 में भी पार्टी का वोट शेयर 2020 के 23.11% से लगभग बराबर रहा। यानी विधानसभा सीटें 75 से घटकर 25 हुईं, लेकिन मूल वोट आधार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। 3. रोजगार का मुद्दा Gen-Z से जोड़ने की क्षमता तेजस्वी यादव ने रोजगार और सरकारी नौकरी को लगातार अपनी राजनीति का प्रमुख मुद्दा बनाया है। यह मुद्दा बिहार के युवा वोटरों की प्राथमिकताओं से सीधे जुड़ता है। पंचायत चुनाव में RJD अगर नौकरी के साथ शिक्षा, पलायन और स्थानीय रोजगार को जोड़ती है तो वह अपने पुराने ग्रामीण आधार को नई पीढ़ी तक पहुंचा सकती है। RJD के सामने दो बड़ी चुनौती क्या होंगी 1. 23% वोट 25 सीटों में क्यों सिमटा? RJD का सबसे बड़ा सवाल यही है कि सबसे ज्यादा वोट शेयर के बावजूद सिर्फ 25 सीटें क्यों मिलीं। विश्लेषण में वोटों के कुछ क्षेत्रों में ज्यादा केंद्रित होने और उन्हें सीटों में बदलने में कमजोरी सामने आई। पंचायत चुनाव में भी सिर्फ सामाजिक आधार काफी नहीं होगा, मजबूत स्थानीय उम्मीदवार जरूरी होंगे। 2. Gen-Z के लिए RJD के सामने जन सुराज का विकल्प BJP से नाराज युवा राजद के समर्थन वाले प्रत्याशी को वोट देंगे यह पक्का नहीं। युवा वोटरों के बीच रोजगार, शिक्षा और पलायन जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं। अगर RJD इन मुद्दों को स्थानीय युवा नेतृत्व से नहीं जोड़ पाती तो जन सुराज जैसे नए विकल्प को जगह मिल सकती है। अब जानिए कांग्रेस की क्या स्थिति रहने वाली है…
1. 8.87% वोट, लेकिन 6 सीटों पर सिमट गई पार्टी 2025 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 61 सीटों पर चुनाव लड़कर 6 सीटें जीतीं। उसे 43.74 लाख वोट यानी 8.87% वोट शेयर मिला। 2020 में कांग्रेस का वोट शेयर 9.48% था और उसे 19 सीटें मिली थीं। यानी वोट शेयर लगभग स्थिर रहा, लेकिन सीटें 19 से घटकर 6 हो गईं। 2. युवाओं के मुद्दों से Gen-Z वोटर लुभा सकती है बिहार में युवाओं के बीच रोजगार, शिक्षा, परीक्षा और पलायन बड़े मुद्दे हैं। 2023-24 में 15-29 वर्ष के युवाओं की बेरोजगारी दर 9.9% थी। कांग्रेस में राहुलग गांधी अगर इन मुद्दों को पंचायत स्तर के स्थानीय सवालों से जोड़ती है तो Gen-Z के बीच अपनी अलग जगह बना सकती है। राहुल गांधी लगातार इस पर काम भी कर रहे हैं। 3. पंचायत चुनाव में नए चेहरे खड़े करने का मौका कांग्रेस के लिए पंचायत चुनाव विधानसभा की हार से बाहर निकलकर जमीनी संगठन बनाने का अवसर है। पार्टी अगर युवा, शिक्षक, छात्र और सामाजिक कार्यकर्ताओं को बड़ी संख्या में आगे करती है तो चुनाव जीतने के साथ हजारों स्थानीय कार्यकर्ता भी तैयार हो सकते हैं। यही नेटवर्क 2029 में काम आएगा। कांग्रेस के सामने दो बड़ी चुनौती क्या होंगी 1. 8.71% वोट को सीट और संगठन में बदलना 2025 में कांग्रेस को 43.75 लाख वोट मिले, लेकिन सीटें सिर्फ 6 रहीं। यानी राज्यभर में वोट मौजूद होने के बावजूद वह पर्याप्त सीटों में नहीं बदल सका। पंचायत चुनाव में भी यही समस्या सामने आ सकती है। कांग्रेस को हर पंचायत में मजबूत स्थानीय उम्मीदवार और चुनावी टीम खड़ी करनी होगी। 2. Gen-Z का वोट सिर्फ BJP का विरोध करने से नहीं मिलेगा युवा BJP से नाराज हो तो जरूरी नहीं कि कांग्रेस को वोट दे। उसके सामने RJD और अब जन सुराज जैसे विकल्प भी हैं। 20-29 वर्ष के करीब 1.63 करोड़ युवा मतदाता और 25 साल से कम आबादी का करीब 58% हिस्सा कांग्रेस के लिए बड़ा अवसर है, लेकिन इसे वोट में बदलने के लिए स्थानीय युवा नेतृत्व चाहिए। जन सुराज: बांकीपुर की जीत के बाद पंचायत चुनाव सबसे बड़ी परीक्षा 1. बांकीपुर में BJP के गढ़ में 18,953 वोट से जीत प्रशांत किशोर ने बांकीपुर उपचुनाव में 63,203 वोट हासिल किए। BJP के नीरज कुमार को 44,250 वोट मिले। जीत का अंतर 18,953 वोट रहा। RJD की रेखा कुमारी 14,085 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। यह जन सुराज की पहली बड़ी चुनावी जीत है और पार्टी के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक प्रमाण भी। 2. 2025 की 3.44% वोट हिस्सेदारी के बाद पहला बड़ा ब्रेकथ्रू जन सुराज 238 सीटों पर 2025 विधानसभा चुनाव लड़ी थी। 3.44% वोट हासिल किए, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सकी। इसके बाद बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जीत ने पार्टी को एक विधानसभा सीट दी। यानी दो चुनावों के बीच पार्टी के प्रदर्शन में बड़ा बदलाव दिखा है। 3. Gen-Z के मुद्दों से जुड़ने की राजनीतिक जगह जन सुराज की राजनीति में रोजगार, शिक्षा और पलायन जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं। बांकीपुर जीत के बाद भी प्रशांत किशोर ने युवाओं के रोजगार पर फोकस किया है। क्षेत्र में दो साल में 10 हजार निजी नौकरियां दिलाने का वादा किया है। पंचायत चुनाव में यही एजेंडा युवाओं को लुभा सकता है। जन सुराज की सबसे बड़ी चुनौती, 13 हजार कैंडीडेट ढूंढना 1. बांकीपुर की जीत को पूरे बिहार में दोहराना सबसे बड़ी चुनौती बांकीपुर शहरी विधानसभा सीट है। यहां उपचुनाव में मतदान सिर्फ 34.30% रहा। यहां मिली जीत से यह पता नहीं चलता कि पूरे बिहार के ग्रामीण वोटर इसी तरह वोट देंगे। पंचायत चुनाव में जन सुराज को अलग-अलग सामाजिक समीकरण साधने होंगे। हजारों गांवों में ऐसे स्थानीय प्रत्याशी देने होंगे जिन्हें लोग पसंद करें। 2. 13 हजार के करीब मुखिया पदों के लिए जमीनी संगठन की परीक्षा पंचायत चुनाव में प्रशांत किशोर की लोकप्रियता अकेले पर्याप्त नहीं होगी। अगर करीब 13 हजार मुखिया चुने जाते हैं तो पार्टी को बड़ी संख्या में मजबूत स्थानीय उम्मीदवार और कार्यकर्ता चाहिए होंगे। बांकीपुर में व्यक्तिगत नेतृत्व काम आया, लेकिन पंचायत में हर गांव का अपना सामाजिक और राजनीतिक समीकरण होगा। यही जन सुराज की असली परीक्षा होगी। पंचायत चुनाव में युवाओं की होगी बड़ी भूमिका राजनीतिक विशेषज्ञ रवि शंकर उपाध्याय ने कहा, ‘पंचायत चुनाव में जेन जी बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं। बांकीपुर चुनाव ने बिहार ही नहीं पूरे देश को संदेश दिया है। अगर पार्टी लाइन पर चुनाव होता है तो प्रशांत किशोर को फायदा मिलेगा। कांग्रेस भी युवाओं को लुभाने के लिए कन्हैया कुमार को आगे कर रही है।’


