सागर| मुनिश्री चंद्रसागर महाराज ने धर्मसभा में विधान का महत्व समझाते हुए कहा कि विधान आत्मविकास और आत्मशुद्धि का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इनके माध्यम से दिनभर में जाने-अनजाने में हुए पापों के क्षय की भावना की जाती है। बिना किसी सांसारिक कामना के किया गया विधान अधिक पुण्य का कारण बनता है। विधान का उद्देश्य केवल मनोकामना पूर्ति नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और धर्म के प्रति समर्पण होना चाहिए। उन्होंने सिवनी गौशाला का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि वहां लगातार गायों की मृत्यु होने पर गुरुदेव से मार्गदर्शन लिया गया। अमरकंटक में विराजमान गुरुदेव ने तीन दिन शांति विधान करने का निर्देश दिया, जिसके बाद गायों की मृत्यु लगभग बंद हो गई। मुनिश्री ने डॉ. अमरनाथ के योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि गांव-गांव जाकर धन एकत्रित करने के प्रयासों से भाग्योदय की स्थापना हुई, जो आज बड़े धार्मिक केंद्र के रूप में पहचान बना चुका है। मुनिश्री गरिष्ठ सागर महाराज ने कहा कि धर्म में रुचि के लिए धर्ममय वातावरण और अच्छी संगति जरूरी है। जैसी संगति होगी, वैसा ही मन बनेगा।


