National Highway-44 भिंड/रौन/भोपाल. रेत के अवैध उत्खनन से अब प्रदेश की जीवनरेखा पर संकट आ गया है। रेत माफिया पर लगाम लगाने में फेल अफसरों की लापरवाही से पहले अवैध उत्खनन से मप्र-राजस्थान को जोडऩे वाले नेशनल हाईवे-44 पर बना पुल खतरे में आ गया। पुल के पिलर के आसपास 20 से 50 फीट तक गहरे गड्ढे बन गए। अब भिंड में रेत के अवैध उत्खनन से सिंध नदी पर बने पुलों की नींव खतरे में पड़ गई है। नदी के तल में 20-20 फीट गहरे गड्ढे हो गए हैं। पुल के पिलरों को खतरा पैदा हो गया है। इसका खुलासा सेतु निगम के एसडीओ सौरभ गौड़ ने किया है। उन्होंने कलेक्टर किरोड़ीलाल मीना को पत्र लिखकर जानकारी दी है। तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
सेतु निगम ने चेताया है, नदी में बाढ़ आने पर मिट्टी का कटाव तेजी से बढ़ेगा और पिलर की नींव खुल जाएगी। यह बेहद खतरनाक होगा। मेहदा घाट पुल ढहा तो भिंड भंडेर हाईवे पूरी तरह बंद हो जाएगा। सिंध नदी में रेत के अवैध उत्खनन से पिलरों की हालत खतरनाक हो चुकी है। पुल के ऊपर सड़क पर भी स्थिति ठीक नहीं है।
सेतु निगम का पत्र बता रहा खतरा कितना
सेतु निगम के एसडीओ सौरभ गौड़ ने कलेक्टर मीना को लिखे पत्र में कहा है, सिंध नदी के पुलों के आसपास बड़े पैमाने पर पनडुब्बी और अन्य मशीनों से रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। इससे नदी तल में 20-20 फीट तक गहरे गड्ढे हो गए हैं। ये पुल की नींव से महज 100 मीटर ही दूर है। इससे पुल की सुरक्षा खतरे में है।
अफसरों ने बताया, ऐसे में पुलों के ढहने का खतरा कई गुना बढ़ गया है। बड़ी जनहानि हो सकती है। यातायात भी बाधित होगा। रेत उत्खनन से पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ेगा। जलीय जीवों के लिए संकट पैदा होगा। तटबंधों पर कटाव बढ़ेगा।
सबसे ज्यादा खतरे में महदा घाट पुल
सिंध नदी में सबसे ज्यादा महदा घाट के पास पुल के नीचे अवैध उत्खनन हो रहा है। मेहदा, इंदुर्खी घाट के पुलों के आसपास खूब उत्खनन हो रहा है। कालिका माता मंदिर के पास पुल के आसपास भी खनन कर गड्ढे किए गए हैं। अमायन और लहार क्षेत्र में भी ऐसे ही हालात हैं।
चंबल की हालत ऐसी, पुल की जड़ें खोखली
राजस्थान के धौलपुर व मुरैना जिले की सीमा पर 2016-17 में 100 करोड़ से पुल बना। इस पुल से रोज 5 हजार से अधिक गाडिय़ां गुजरती हैं। पुल 34 पिलरों पर खड़ा है। धौलपुर की ओर पिलर सुरक्षित है। मुरैना की ओर ज्यादा खनन हो रहा है। 8 पिलरों के पास गहरी खुदाई से उनकी मजबूती पर असर पड़ रहा है। पिलर नंबर-1 से 4 के पास 30 से 50 फीट तक खुदाई हो चुकी है।
कोर्ट के निर्देश हवा
चंबल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने मप्र सरकार को प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए। बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों पर मप्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाई। कहा था, अवैध खनन रोकने के लिए राज्यों की कार्रवाई अभी भी नाकाफी है। 6 माह में कैमरे लगाने व गाडिय़ों की जब्ती के निर्देश दिए, पर सरकार ने एसएएफ तैनात कर खानापूर्ति कर ली।


