महाराष्ट्र के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून ने शनिवार को महाराष्ट्र में एंट्री ले ली है। केरल में मानसून के आगमन में भले ही तीन दिन की देरी हुई हो, लेकिन महाराष्ट्र में इसका आगमन सामान्य समय के अनुसार हुआ है।
इस साल मानसून 4 जून को केरल पहुंचा था, जबकि इसकी सामान्य तिथि 1 जून मानी जाती है। हालांकि, इसके बाद मानसून ने तेजी से रफ्तार पकड़ी और 5 जून तक गोवा सहित पश्चिमी तट के बड़े हिस्से को कवर करते हुए 6 जून को महाराष्ट्र में प्रवेश कर गया।
महाराष्ट्र के इन हिस्सों तक पहुंचा मानसून
आईएमडी की ताजा जानकारी के मुताबिक, मानसून अरब सागर के पश्चिम-मध्य और पूर्व-मध्य क्षेत्रों, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु के अधिकांश क्षेत्रों और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तक पहुंच चुका है।
मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार तक मानसून की उत्तरी सीमा कोंकण के देवगढ़, कर्नाटक के कोप्पल, आंध्र प्रदेश के अनंतपुरम और तमिलनाडु के चेन्नई से होकर गुजर रही है।
अगले 2 से 3 दिनों में और आगे बढ़ेगा मानसून
आईएमडी ने कहा है कि अगले दो से तीन दिनों के दौरान मानसून की प्रगति के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। इस दौरान महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के और अधिक क्षेत्रों में मानसून पहुंच सकता है। इसके अलावा तेलंगाना, तमिलनाडु के शेष हिस्सों, अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और पूर्वोत्तर भारत के अन्य इलाकों में भी मानसून के आगे बढ़ने की संभावना है।
अंदरूनी महाराष्ट्र में धीमी रहेगी रफ्तार!
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल मानसून की सक्रियता मुख्य रूप से अरब सागर शाखा के कारण बनी हुई है। इसी वजह से पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में अच्छी बारिश देखने को मिल रही है।
स्काईमेट वेदर के अध्यक्ष जी. पी. शर्मा के अनुसार, वर्तमान में मानसून की प्रगति तटीय इलाकों तक ही सीमित है। आने वाले दिनों में कोंकण और उत्तर कोंकण क्षेत्र में अच्छी बारिश होने की संभावना है। मुंबई, ठाणे, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग सहित कोंकण क्षेत्र के कई जिलों में बारिश संबंधी गतिविधियां तेज हो सकती हैं।
हालांकि, मौसम विशेषज्ञों ने महाराष्ट्र के आंतरिक इलाकों को लेकर चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि राज्य के अंदरूनी क्षेत्रों में मानसून की रफ्तार सुस्त रह सकती है। दरअसल बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसून शाखा फिलहाल सक्रिय नहीं है। यही शाखा आमतौर पर मानसून को राज्य के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में विदर्भ, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र के हिस्सों में मानसून की प्रगति अपेक्षाकृत धीमी रह सकती है।


