Mumtaz Death Anniversary : बेगम मुमताज का नाम सुनते ही आगरा के ताजमहल की याद ताजा हो जाती है। इसके बनने की पूरी कहानी भी मध्य प्रदेश के बुरहानपुर से जुड़ी है। बता दें कि, मुमताज ने बुरहानपुर में ही अंतिम सांस ली थी, जिसे छह माह तक यहीं दफनाया भी गया। अब इसी मुमताज महल की याद में हर साल 7 जून को मुमताज महल फेस्टिवल मनाकर उन्हें याद किया जाता है। इतने साल बीतने के बाद भी आज भी आहुखाना का एप्रोच रोड नहीं बन सका। जहां मुमताज को छह माह तक दफनाए रखा था।
ये है इतिहास

इतिहासकार शहजादा आसिफ खान के मुताबिक, मुमताज महल की सगाई 14 साल की उम्र में शाहजहां के साथ हुई थी। पांच साल बाद 10 मई सन् 1612 को यानी जब मुमताज 19 साल की हुईं, जब उनका निकाह शाहजहां के साथ किया गया। इस तरह मुमताज-शाहजहां की तीसरी बेगम बनीं। बाद में वे शाहजहां की सबसे पसंदीदा बेगम बन गईं और दोनों पति पत्नी के प्रेम की दास्तां जहां तहां सुनाई देने लगी।
इतिहासविद् शहजादा आसीफ खान के मुताबिक, सन् 1631 में शाहजहां मुमताज को लेकर बुरहानपुर आ गए। उस समय मुमताज गर्भवती थीं व चौदहवीं संतान को जन्म देने वाली थीं। 7 जून 1631 में मुमताज ने इसी जगह अंतिम सांस ली। यहीं छह माह तक आहुखाना में बने पाइबाग में मुमताज को दफनाया गया था। मुमताज को बेहद सुरक्षित ताबूत में रखा गया था। अपनी पसंदीदा बेगम के यूं अचानक चले जाने से शाहजहां दुखी हो उठे। उन्होंने मुमताज महल की याद में एक भव्य स्मारक बनाने की ठानी और ताजमहल की रूपरेखा तैयार हुई। इसे पहले बुरहानपुर में ही बनाया जाना था, लेकिन बुरहानपुर की मिट्टी ताजमहल जैसी धरोहर के लिए उपयुक्त नहीं पाई गई। इसलिए शाहजहां ने मजबूरी में ताजमहल के लिए आगरा को चुना।
ये हैं हालात

शहर से पांच किमी दूर ताप्ती के उस पार जैनाबाद में ये पाइबाग बना है। जहां मुमताज को पहले दफनाया गया था। कई पर्यटक इसे देखने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन एप्रोच रोड न होने के कारण कोई भी यहां जाने की जहमत नहीं करता। यहां पर धरोहर को सहेजने के लिए प्रयास तो किए गए, लेकिन अब तक काम अधूरे हैं। यहां धरोहर का जीर्णोद्धार का भी काम चल रहा है। आसपास उद्यान विकसित किया जा रहा है।
एमपी में क्यों नहीं बन सका ताजमहल?

एमपी के बुरहानपुर में ताजमहल बनाने के लिए मुगल शासक शाहजहां ने एक्सपर्ट से उसकी पूरी रूपरेखा तक तैयार करवा ली थी। लेकिन, ताजमहल तो शफक संग-ए-मरमर (सफेद संगमरमर) से बनाया जाना था। खूबसूरत और मुलायम सा दिखने वाला संगमरमर वजन में भारी था और जब एक्सपर्ट ने यहां की मिट्टी और जमीन का मुआयना किया तो पता चला कि यहां की मिट्टी का स्तर संगमरमर से बने महल को ज्यादा लंबे समय तक खड़ा नहीं रख पाएगी। इसलिए शाहजहां का एमपी के बुरहानपुर में दूधिया ताजमहल बनवाने का सपना अधूरा रह गया। लेकिन, बाद में शाहजहां ने मुमताज महल से जुड़ी अपनी यादों के ताजमहल को आगरा में बनवाया और इस तरह मुमताज का ताबूत जमीन से निकलवाकर वहां ले जाया गया।
मुमताज महल महोत्सव अब 20 जून को
मुमताज महल महोत्सव इस साल अब 20 जून को आयोजित किया जाएगा। ये महोत्सव हर साल 7 जून को होता है, लेकिन इस बार दादा मियां नजीर अहमद के उर्स का आयोजन भी इन्हीं तिथियों में होने के कारण महोत्सव की तिथि में बदलाव किया गया है। डॉ. वासिफ खान ने बताया कि, ये महोत्सव बुरहानपुर की गौरवशाली धरोहर को जन-जन तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक माध्यम है। समिति ने साहित्य, कला, संस्कृति व इतिहास के सभी अध्येताओं, कलाकारों और नागरिकों से इस आयोजन में सहभागिता का आग्रह किया है।


