मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि चुनाव याचिकाओं के निपटारे में देरी लोकतंत्र को कमजोर कर सकती है और देश को तानाशाही की राह पर ले जा सकती है। जस्टिस जी. जयचंद्रन ने बुधवार को 2016 के राधापुरम विस चुनाव विवाद पर फैसला सुनाते हुए कहा, जनप्रतिनिधित्व एक्ट, 1951 की धारा 86(7) के तहत चुनाव याचिकाओं का निपटारा छह महीने में होना चाहिए। यदि अदालतें मोहम्मद अकबर मामले में सुप्रीम कोर्ट की अपनी ही टिप्पणियों का पालन नहीं करेंगी, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है। कोर्ट ने अन्नाद्रमुक के आईएस इनबादुरई का 2016 का चुनाव रद्द कर डीएमके नेता तथा तमिलनाडु विस के पूर्व अध्यक्ष एम. अप्पावु को 2016-21 के लिए राधापुरम से निर्वाचित घोषित किया। इनबादुरई 49 वोट से जीते थे, लेकिन पुनर्गणना में कोर्ट ने अप्पावु को 109 वोट से विजेता माना। 10 साल बाद बदला नतीजा, हारा प्रत्याशी जीता 2016 के राधापुरम विधानसभा चुनाव में डीएमके के अप्पावु 49 वोट से हार गए थे। उन्होंने चुनाव याचिका दायर कर आरोप लगाया कि डाक मतपत्रों की गिनती और ईवीएम मतों की गणना में अनियमितताएं हुईं। 2019 में मद्रास हाई कोर्ट ने पाया कि रिटर्निंग ऑफिसर ने मतगणना प्रक्रिया को लेकर शपथ पर गलत बयान दिया था। इसके बाद कोर्ट ने 1,508 डाक मतपत्रों और 19वें, 20वें तथा 21वें चरण में गिने गए 39 ईवीएम के 15,700 से अधिक वोटों की पुनर्गणना का आदेश दिया। पुनर्गणना में अप्पावु के वोट ज्यादा निकले और अंततः हाई कोर्ट ने उन्हें 109 वोट से विजेता घोषित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक हाई कोर्ट के पुनर्गणना आदेश को चुनौती देकर इनबादुरई 2019 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। शीर्ष अदालत ने पुनर्गणना जारी रहने दी, लेकिन परिणाम जारी करने पर रोक लगा दी। 21 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा, विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो चुका है और फैसला सुनाने से अंतरिम रोक हटा दी। इसके बाद हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया। —————————————————— ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- कुछ पद सिर्फ कम शिक्षितों के लिए:बड़ी डिग्री छिपाकर ये नौकरी हासिल करना गलत; यह असली हकदार से रोजगार छीनने जैसा सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि कम शैक्षणिक योग्यता के लिए आरक्षित नौकरी के लिए अपनी शिक्षा छुपाना पद के असली हकदार से रोजगार छीनना है। इसलिए उच्च योग्यता छिपाकर ली गई नौकरी कानूनन अमान्य होगी। पूरी खबर पढे़ं…
मद्रास हाईकोर्ट ने फैसलों में देरी पर सवाल उठाए:कहा- सुप्रीम कोर्ट की अपनी टिप्पणियों का पालन नहीं करेगा, तो बुरा असर पड़ सकता है


