सभी माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे बेहतर शिक्षा हासिल करें और अपने सपने पूरे करें। लेकिन महंगाई के इस दौर में पढ़ाई का खर्च तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई के लिए पहले से एजुकेशन फंड तैयार करना बेहद जरूरी है, ताकि सही समय पर पैसों की कमी बच्चों के भविष्य में बाधा न बने। सही निवेश और स्मार्ट फाइनेंशियल प्लानिंग से बच्चों की पढ़ाई के लिए बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है। अगर आप भी अपने बच्चे के भविष्य को सुरक्षित करना चाहते हैं तो इस बारे में सबकुछ जानना जरूरी है। आज ‘आपका पैसा’ कॉलम में हम ‘एजुकेशन फंड’ की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: सीए आदर्श ब्यौहार, फाइनेंशियल एक्सपर्ट, भोपाल सवाल- भविष्य में बच्चों की पढ़ाई का खर्च कितना होगा, ये कैसे कैलकुलेट करें? जवाब- इसके लिए ये तीन चीजें पता करें- आज जिस कोर्स की फीस 1 लाख रुपए है, वही 10-15 साल बाद 4-5 लाख तक पहुंच सकता है। इसे ग्राफिक से समझिए- सवाल- एजुकेशन इंफ्लेशन क्या है और यह कितनी तेजी से बढ़ रहा है? जवाब- एजुकेशन इंफ्लेशन का मतलब है, वक्त बीतने के साथ शिक्षा से जुड़ी लागत यानी फीस, कोचिंग, बुक्स, हॉस्टल की कीमत का लगातार बढ़ना। इसका मतलब आज जो पढ़ाई 1 लाख में हो रही है, वही कुछ साल बाद 2-3 लाख तक हो सकती है। सवाल- बच्चों की पढ़ाई के लिए फंड बनाना कब शुरू करना चाहिए? जवाब- इसके लिए जितनी जल्दी फंड बनाएं, उतना बेहतर है। आइडियली बच्चे के जन्म के तुरंत बाद या शुरुआती सालों में ही निवेश शुरू कर देना चाहिए। जल्दी शुरुआत क्यों जरूरी? सवाल- जल्दी शुरुआत करने से क्या फायदा होता है? जवाब- यह फाइनेंशियल बोझ को काफी कम कर सकता है। इसके सभी फायदे ग्राफिक में देखिए- सवाल- एजुकेशन फंड के लिए हर महीने कितना निवेश करना चाहिए? जवाब- इसके लिए आमतौर पर अपनी इनकम का 10-15% हर महीने निवेश करना एक अच्छा नियम माना जाता है। सही रकम इन बातों पर निर्भर करती है- इसलिए बेहतर है कि अपने लक्ष्य के हिसाब से निवेश तय करें। अगर लक्ष्य बड़ा है या समय कम है, तो 10-15% से ज्यादा भी निवेश करना पड़ सकता है। सवाल- बच्चों की पढ़ाई के लिए कौन-से निवेश विकल्प बेहतर हैं? जवाब- इसके लिए निवेश करते समय ऐसे विकल्प चुनने चाहिए, जो लॉन्ग टर्म में अच्छा रिटर्न दें और रिस्क भी संतुलित हो। ग्राफिक में निवेश के विकल्प देखिए- सवाल- SIP क्या है और यह कैसे काम करता है? जवाब- SIP एक ऐसा तरीका है, जिसमें हर महीने एक तय रकम म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। इससे धीरे-धीरे एक बड़ा फंड बना सकते हैं। एजुकेशन फंड बनाने में SIP इसलिए फायदेमंद है, क्योंकि- उदाहरण के लिए, अगर कोई हर महीने थोड़ी रकम SIP में निवेश करता है तो 10-15 साल में यह एक अच्छा खासा एजुकेशन फंड बन सकता है। सवाल- कंपाउंडिंग का बच्चों के एजुकेशन फंड पर क्या असर पड़ता है? जवाब- कंपाउंडिंग का मतलब है कि निवेश पर मिलने वाला रिटर्न भी आगे चलकर रिटर्न कमाने लगता है। यानी ब्याज पर ब्याज मिलता है। एजुकेशन फंड बनाने में इसका बड़ा फायदा मिलता है, क्योंकि- सवाल- अगर बीच में निवेश रोक दिया तो क्या होगा? जवाब- इसके ये नुकसान हो सकते हैं- इसलिए, बेहतर है कि SIP को लंबे समय तक जारी रखा जाए, ताकि बच्चों के एजुकेशन फंड का लक्ष्य आसानी से हासिल कर सकें। सवाल- क्या एजुकेशन लोन एक अच्छा विकल्प है? जवाब- हां, यह एक अच्छा विकल्प है, लेकिन इसे आखिरी विकल्प के रूप में ही इस्तेमाल करना चाहिए। एजुकेशन लोन के फायदे-नुकसान ग्राफिक में देखिए- सवाल- पेरेंट्स एजुकेशन फंड बनाने में क्या कॉमन गलतियां करते हैं? जवाब- ये गलतियां एजुकेशन फंड को कमजोर बना देती हैं और लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो सकता है। सभी गलतियां ग्राफिक में देखिए- सवाल- अगर अभी तक शुरुआत नहीं की है तो क्या करें? जवाब- अगर बच्चा बड़ा हो गया है और आपने अभी तक एजुकेशन फंड की शुरुआत नहीं की है, तो भी घबराएं नहीं। अभी से शुरुआत कर सकते हैं। क्या करें? शुरुआत भले ही देर से हो, लेकिन सही स्ट्रेटजी और डिसिप्लिन के साथ बच्चे के एजुकेशन फंड का अच्छा खासा हिस्सा तैयार कर सकते हैं। सवाल- बच्चों की पढ़ाई के लिए फंड बनाते समय किन बातों का ध्यान रखें? जवाब- सही प्लानिंग और अनुशासन के साथ बच्चों की पढ़ाई का लक्ष्य आसानी से हासिल कर सकते हैं। गोल्डन रूल्स- ………………
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