पंचायत चुनाव: प्रशासक तो बन गए लेकिन ग्राम प्रधानों को कौन-कौन से कार्यों के लिए लेनी होगी अनुमति? कई सवाल बरकरार

पंचायत चुनाव: प्रशासक तो बन गए लेकिन ग्राम प्रधानों को कौन-कौन से कार्यों के लिए लेनी होगी अनुमति? कई सवाल बरकरार

Panchayat Chunav Update: लखनऊ जिले की 491 ग्राम पंचायतों में बुधवार से विकास कार्यों की जिम्मेदारी प्रशासकों ने संभाल ली। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त होने के बाद अब वही प्रधान अगले छह महीने तक प्रशासक के रूप में काम करेंगे। सरकार ने उन्हें विकास कार्यों की जिम्मेदारी तो सौंप दी है, लेकिन कई अहम मुद्दों पर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।

अधिकार बढ़े, लेकिन नियमों को लेकर असमंजस

प्रशासक बनने के बाद प्रधानों की शक्तियां पहले से बढ़ गई हैं। हालांकि अब भी यह स्पष्ट नहीं है कि किन कार्यों के लिए उन्हें अनुमति लेनी होगी और किन फैसलों में स्वतंत्र रूप से निर्णय लिया जा सकेगा। प्रधानों का सवाल है कि ग्राम प्रधानों को कौन-कौन से कार्यों के लिए अनुमति लेनी होगी? पंचायत स्तर पर कामकाज की नई व्यवस्था को लेकर ग्राम प्रधानों और अधिकारियों के बीच कई सवाल बने हुए हैं।

मानदेय और पंचायत कल्याण कोष को लेकर संशय

वर्तमान व्यवस्था के तहत ग्राम प्रधानों को हर महीने पांच हजार रुपये मानदेय दिया जाता है। लेकिन अब जब वे प्रशासक बन गए हैं तो यह मानदेय जारी रहेगा या नहीं, इस पर अभी कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने नहीं आए हैं।

10 लाख की सहायता राशि पर भी सवाल

ग्राम प्रधान के कार्यकाल के दौरान असमय निधन होने पर पंचायत कल्याण कोष से परिवार को 10 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाती है। कई परिवारों को इसका लाभ भी मिल चुका है। अब प्रशासक बनने के बाद यह सुविधा जारी रहेगी या नहीं, इस पर भी चर्चा हो रही है।

16वें वित्त आयोग की राशि पर भी संशय

ग्राम पंचायतों को मिलने वाली 16वें वित्त आयोग की धनराशि को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है। जिला पंचायत राज अधिकारी जितेंद्र गौड़ ने बताया कि प्रशासकों के अधिकारों और उनकी भूमिका को लेकर एक-दो दिन में शासन की ओर से दिशा-निर्देश जारी हो जाएंगे।

प्रधानों ने सरकार से मांगा ज्यादा बजट

भदौरी गांव के प्रधान और प्रशासक देवेंद्र सिंह ने एक निजी चैनल से बातचीत में कहा कि सरकार ने प्रधानों पर भरोसा जताते हुए उन्हें प्रशासक नियुक्त किया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ग्राम पंचायतों को समय पर और पर्याप्त बजट दिया जाए, ताकि विकास कार्यों में कोई बाधा न आए।

प्रशासक और प्रधान की भूमिका में बताया अंतर

देवेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधान और प्रशासक की जिम्मेदारियों में काफी अंतर होता है। पहले कई फैसले ग्राम पंचायत स्तर पर ही हो जाते थे, लेकिन अब कई मामलों में अनुमति और परामर्श जरूरी हो गया है।

‘प्रशासक बनने के बाद प्रधान और ताकतवर हुए’

राष्ट्रीय पंचायतीराज ग्राम प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अखिलेश सिंह ने कहा कि ग्राम पंचायतों के प्रशासक बनने के बाद प्रधान पहले से ज्यादा ताकतवर हो गए हैं। अब वे कई मामलों में खुद निर्णय लेने की स्थिति में होंगे।

सरकार को ‘रिटर्न गिफ्ट’ देने की तैयारी

डॉ. अखिलेश सिंह ने बताया कि संगठन जिला, मंडल और राज्य स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर सरकार का आभार व्यक्त करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधान अब सरकार को “रिटर्न गिफ्ट” देंगे।

पंचायत चुनाव टलने की चर्चा तेज

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ललित शर्मा ने कहा कि पिछड़ा आयोग अभी 2011 की जनगणना के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर रहा है, जबकि पिछले 15 वर्षों में सामाजिक और जनसंख्या संबंधी हालात काफी बदल चुके हैं।

विधानसभा चुनाव के बाद हो सकते हैं पंचायत चुनाव

उन्होंने कहा कि ऐसी चर्चा है कि पंचायत चुनाव अब विधानसभा चुनाव के बाद कराए जा सकते हैं। संगठन सरकार और आयोग के सामने नई जनगणना के आधार पर रिपोर्ट तैयार करने की मांग रखेगा।

प्रेसवार्ता में कई पदाधिकारी रहे मौजूद

प्रेसवार्ता में संगठन के राष्ट्रीय सचिव गणेश ठाकुर, प्रदेश उपाध्यक्ष श्वेता सिंह, प्रदेश सचिव प्रभाकर सिंह, गोरखपुर जिलाध्यक्ष सत्यपाल सिंह और सिद्धार्थनगर से दिलीप पांडेय सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

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