रेगिस्तान में पड़ रही भीषण गर्मी अब इंसानों के साथ बेजुबान पशुओं पर भी सितम बन रही है। रामदेवरा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में पानी के अभाव ने हालात इतने भयावह कर दिए हैं कि जल संग्रहण के सभी स्त्रोत लगभग सूख चुके हैं और प्यास से तड़पकर पशुधन दम तोड़ रहा है।
आसमान से बरसती आग अब इंसानों के साथ-साथ बेजुबान पशुओं के लिए भी काल बनने लगी है। इस दौरान स्थानीय टैंकर वालो ने निःशुल्क पानी के टैंकर विभिन्न तलाई, जलकुंडों व खेलियों में डालने का बीड़ा उठाया है। पशु और पक्षियों को भीषण गर्मी में सर्वाधिक पानी की जरूरत रहती हैं। ऐसे कार्य 13 टैंकर चालकों ने पुण्य कार्य को शुरू किया है। जिसे शुरू किए हुए 2 दिन बीते है।
5 किमी क्षेत्र में पानी डालेंगे
रामदेवरा क्षेत्र के करीब 5 किलोमीटर परिधि में जो भी तालाब, तलाई, जलकुंडों व खेलियों पानी से सूखे हुए हैं। उनमें पशु और पक्षियों के जरूरत के अनुसार पानी के टैंकर नि:शुल्क डालकर पानी की व्यवस्था की जाएगी। वर्तमान में 13 टैंकर चालकों की ओर से 2 दिन दो तलाई के भीतर पानी के टैंकर डालकर पशु व पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था की गई है। भीषण गर्मी में पानी की खपत इंसान के साथ-साथ पशुओं में भी बढ़ गई है। पानी की संग्रहण के लिए बने तालाब और छोटी तलाई बरसात की पानी पर निर्भर रहती है। इनमें बरसात के दौरान ही पानी आता है। भीषण गर्मी में रामदेवरा क्षेत्र के टैंकर चालकों ने सूखी तलाई, तालाब, खेली आदि को टैंकर के माध्यम से पानी से भरकर पशु पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था की जा रही है।
इनकी रही सहभागिता
रामदेवरा के पानी टैंकर चालक संचालक पप्पूसिंह वीरमदेवरा, रावलसिंह, गोवर्धनसिंह, उदयसिंह, खींवसिंह, मगाराम, मानकराम, महेंद्र बेलदार, महेंद्रसिंह, मोतीसिंह, नाथूराम, किशन कुमावत का निःशुल्क पानी के टैंकर से पशु पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था की जा रही हैं। पहले दिन मंगलवार को बैरीसाल सिंह की ढाणी के पास तलाई में 7 टैंकर पानी डाला गया, वही दलेरी तलाई भुट्टो की ढाणी रामदेवरा में दूसरे दिन बुधवार को 13 पानी के टैंकर खाली किए गए।
पोकरण क्षेत्र में भीषण गर्मी व लू का बुधवार को असर अधिक रहा। बुधवार को सुबह से सूर्य की तेज किरणें निकली। सुबह 9 बजे बाद लू के थपेड़े चलने लगे। दोपहर में आसमान से आग उगलती सूर्य की किरणों से तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई। भीषण गर्मी और लू के सितम के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया, जिससे मुख्य मार्गों पर चहल पहल कम नजर आई।


