वाराणसी: गाय को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद तरह-तरह की यात्राएं निकाल रहे हैं। वहीं, सरकार को खोजते हुए गाय को राष्ट्र माता का दर्जा नहीं देने का आरोप लगा रहे हैं। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी का कार्यकर्ताओं ने गाय को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने के लिए जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करने की सोची, जिसके बाद करीब दर्जन पर कार्यकर्ता एक गाय को लेकर मुख्यालय पहुंचे, लेकिन यहां मामला उलटा पड़ गया और गाय भड़क उठी।
सड़क पर भागने लगी गाय
दरअसल, सोमवार को नौतपा की शुरुआत होते ही तपती धूप में जिला मुख्यालय पर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता जीशान अपने करीब एक दर्जन कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे थे। उनके साथ एक गाय भी थी और कार्यकर्ताओं की मांग थी कि गाय को राष्ट्र माता का दर्जा दिया जाए। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करना शुरू किया, जिससे गाय घबरा उठी। वहीं, गाय को शांत करने के लिए एक कार्यकर्ता ने जैसे ही रोटी खिलाई वैसे ही गाय सींग से धकेलते हुए कार्यकर्ताओं को सड़क पर दौड़ने लगी।
गाय को सड़क पर दौड़ता देख समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में अफरा तफरी का माहौल हो गया। इसके साथ ही राहगीर भी इधर-उधर भागते नजर आए। किसी तरह गाय पर उसके मालिक की मदद से काबू पाया गया, लेकिन गाय मानने को तैयार नहीं थी। गर्मी इतनी तेज थी कि गाय भी चाहती थी कि वह धूप में न जाए, लेकिन कार्यकर्ता प्रदर्शन करने के लिए गाय को अपने साथ सड़क पर लाने को आतुर थे।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को दिया समर्थन
इसके बाद समाजवादी पार्टी का कार्यकर्ताओं ने बताया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की मांग जायज है। गाय हमारी माता है और गाय को राष्ट्र माता का दर्जा भी दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बयान ‘उत्तर प्रदेश में गौ हत्याएं नहीं रुकी हैं’ को लेकर समर्थन दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जितने भी गौशालाएं बनाई गई हैं उनमें गौ माता सुरक्षित नहीं है और उनकी हालत बद से बदतर हो चुकी है।
बहरहाल, कार्यकर्ताओं ने गाय को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने के लिए यह प्रदर्शन किया था। इसके साथ ही जिला प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन भी भेजा गया, लेकिन जिस तरह प्रदर्शन हुआ वह जिला मुख्यालय पर चर्चा का विषय बना रहा। आगे आगे गौ माता और पीछे-पीछे समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता सड़कों पर दौड़ते नजर आए, जो हंसी के पात्र भी बने।


