बेगूसराय सदर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर ग्रामीण इलाकों में दिखने लगा है। पेट्रोल पंप संचालकों के अनुसार, पेट्रोल 105.06 रुपये से बढ़कर 108.37 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि डीजल 91.30 रुपये से बढ़कर 94.44 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। डीजल महंगा होने से खेती-किसानी का खर्च बढ़ गया है। खेतों की जुताई, सिंचाई और फसल ढुलाई पर किसानों को अब अधिक पैसा खर्च करना पड़ रहा है। धान रोपनी के मौसम से पहले बढ़ती लागत ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, खासकर उन किसानों की जो सिंचाई के लिए डीजल चालित पंपसेट का उपयोग करते हैं। ट्रैक्टर मालिक भी किराया बढ़ाने की तैयारी में हैं, जिससे छोटे और मध्यम किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। सब्जियों और फलों की ढुलाई महंगी होने से ग्रामीण हाट और मंडियों पर भी असर दिख रहा है। व्यापारियों का अनुमान है कि परिवहन खर्च बढ़ने से आने वाले दिनों में सब्जियों और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। स्थानीय किसान संतोष साह, फुलेना महतो, अर्जुन महतो, रौशन साह और पंकज महतो सहित अन्य किसानों ने बताया कि डीजल महंगा होने से सिंचाई, जुताई और ट्रैक्टर का खर्च काफी बढ़ गया है। किसानों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत के कारण खेती करना मुश्किल होता जा रहा है। कुछ इलाकों में पेट्रोल पंपों पर आवश्यकतानुसार ही तेल दिए जाने की भी चर्चा है। बाइक और ऑटो चालकों का खर्च भी बढ़ गया है, जिससे मजदूर, छोटे व्यवसायी और दैनिक वेतन भोगी लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। एक पेट्रोल पंप संचालक ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर स्थानीय कीमतों पर पड़ा है। किसानों का मानना है कि यदि डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी रही, तो इसका असर खेती के साथ-साथ आम लोगों की रसोई पर भी पड़ेगा। बेगूसराय सदर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर ग्रामीण इलाकों में दिखने लगा है। पेट्रोल पंप संचालकों के अनुसार, पेट्रोल 105.06 रुपये से बढ़कर 108.37 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि डीजल 91.30 रुपये से बढ़कर 94.44 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। डीजल महंगा होने से खेती-किसानी का खर्च बढ़ गया है। खेतों की जुताई, सिंचाई और फसल ढुलाई पर किसानों को अब अधिक पैसा खर्च करना पड़ रहा है। धान रोपनी के मौसम से पहले बढ़ती लागत ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, खासकर उन किसानों की जो सिंचाई के लिए डीजल चालित पंपसेट का उपयोग करते हैं। ट्रैक्टर मालिक भी किराया बढ़ाने की तैयारी में हैं, जिससे छोटे और मध्यम किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। सब्जियों और फलों की ढुलाई महंगी होने से ग्रामीण हाट और मंडियों पर भी असर दिख रहा है। व्यापारियों का अनुमान है कि परिवहन खर्च बढ़ने से आने वाले दिनों में सब्जियों और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। स्थानीय किसान संतोष साह, फुलेना महतो, अर्जुन महतो, रौशन साह और पंकज महतो सहित अन्य किसानों ने बताया कि डीजल महंगा होने से सिंचाई, जुताई और ट्रैक्टर का खर्च काफी बढ़ गया है। किसानों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत के कारण खेती करना मुश्किल होता जा रहा है। कुछ इलाकों में पेट्रोल पंपों पर आवश्यकतानुसार ही तेल दिए जाने की भी चर्चा है। बाइक और ऑटो चालकों का खर्च भी बढ़ गया है, जिससे मजदूर, छोटे व्यवसायी और दैनिक वेतन भोगी लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। एक पेट्रोल पंप संचालक ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर स्थानीय कीमतों पर पड़ा है। किसानों का मानना है कि यदि डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी रही, तो इसका असर खेती के साथ-साथ आम लोगों की रसोई पर भी पड़ेगा।


