कटिहार के कदवा प्रखंड स्थित शिकारपुर पंचायत के बेनीबारी गांव में आजादी के समय बना मध्य विद्यालय माहीनगर अब मूलभूत सुविधाओं से वंचित हो गया। हालत यह है कि इसे पक्के मकान की जगह स्कूल एक निजी जमीन पर बांस-बल्लियों और टिन की छत वाले अस्थायी ढांचे में चल रहा है वहीं ग्रामीण वर्षों से मांग कर रहे है कि इस स्कूल के लिए पक्के मकान का निर्माण किया जाए।
दरवाजे और शौचालय भी नहीं लोगों ने बताया कि यह विद्यालय वर्तमान में बदहाली का शिकार हो गया है। यहां पक्के कमरे, दरवाजे और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। बारिश के दिनों में यहां न तो बच्चे बैठ कर पढ़ पाते हैं न हीं शिक्षक पढ़ा पाते हैं।
निजी जमीन पर हो रहा संचालन स्थानीय निवासी और विद्यालय के पूर्व छात्र मोहम्मद मुश्फिक ने बताया कि पहले यहां बड़ी संख्या में छात्र पढ़ते थे, जिनमें से कई आज उच्च पदों पर कार्यरत हैं। डॉ. एहतमाम ने सरकार से स्थायी भवन, शौचालय और स्कूल तक पहुंचने के लिए उचित रास्ते की व्यवस्था करने की मांग की है। आगे उन्होंने कहा कि चंदा इकट्ठा कर इसका संचालन निजी जमीन पर किया गया था। हालांकि, जमीन मालिक के निधन के बाद से इसकी रजिस्ट्री नहीं हो पाई है। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन पर इस मामले में उदासीनता बरतने का आरोप लगाया है।
कई बार बदला जा चुका स्कूल का स्थान शिक्षक मोहम्मद इफ्तिखार ने बताया कि नदी कटाव के कारण यह स्कूल तीन-चार बार अपनी जगह बदल चुका है, और वर्तमान स्थान पर भी इसे ढूंढना मुश्किल होता है। इस संबंध में हेडमास्टर इंतखाबुर रहमान ने बताया कि उन्होंने स्कूल की बदहाली को लेकर उच्च अधिकारियों को आवेदन दिया है। कटिहार के कदवा प्रखंड स्थित शिकारपुर पंचायत के बेनीबारी गांव में आजादी के समय बना मध्य विद्यालय माहीनगर अब मूलभूत सुविधाओं से वंचित हो गया। हालत यह है कि इसे पक्के मकान की जगह स्कूल एक निजी जमीन पर बांस-बल्लियों और टिन की छत वाले अस्थायी ढांचे में चल रहा है वहीं ग्रामीण वर्षों से मांग कर रहे है कि इस स्कूल के लिए पक्के मकान का निर्माण किया जाए।
दरवाजे और शौचालय भी नहीं लोगों ने बताया कि यह विद्यालय वर्तमान में बदहाली का शिकार हो गया है। यहां पक्के कमरे, दरवाजे और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। बारिश के दिनों में यहां न तो बच्चे बैठ कर पढ़ पाते हैं न हीं शिक्षक पढ़ा पाते हैं।
निजी जमीन पर हो रहा संचालन स्थानीय निवासी और विद्यालय के पूर्व छात्र मोहम्मद मुश्फिक ने बताया कि पहले यहां बड़ी संख्या में छात्र पढ़ते थे, जिनमें से कई आज उच्च पदों पर कार्यरत हैं। डॉ. एहतमाम ने सरकार से स्थायी भवन, शौचालय और स्कूल तक पहुंचने के लिए उचित रास्ते की व्यवस्था करने की मांग की है। आगे उन्होंने कहा कि चंदा इकट्ठा कर इसका संचालन निजी जमीन पर किया गया था। हालांकि, जमीन मालिक के निधन के बाद से इसकी रजिस्ट्री नहीं हो पाई है। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन पर इस मामले में उदासीनता बरतने का आरोप लगाया है।
कई बार बदला जा चुका स्कूल का स्थान शिक्षक मोहम्मद इफ्तिखार ने बताया कि नदी कटाव के कारण यह स्कूल तीन-चार बार अपनी जगह बदल चुका है, और वर्तमान स्थान पर भी इसे ढूंढना मुश्किल होता है। इस संबंध में हेडमास्टर इंतखाबुर रहमान ने बताया कि उन्होंने स्कूल की बदहाली को लेकर उच्च अधिकारियों को आवेदन दिया है।


