Akhilesh Yadav ने उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर भारतीय जनता पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोला है। समाजवादी पार्टी प्रमुख ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है और सरकारी दावे जमीनी हकीकत से पूरी तरह अलग दिखाई देते हैं।
सोशल मीडिया
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “उप्र में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों का आंकड़ा देखकर तो लगता है : भाजपा जाए तो महिला बच पाए! भाजपा राज में महिलाओं को न तो आरक्षण मिल सकता है, न संरक्षण!” उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में महिला सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। विपक्ष लगातार कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर सरकार को घेरने में जुटा है, जबकि भाजपा सरकार अपने कार्यकाल में अपराध नियंत्रण और महिला सशक्तिकरण को बड़ी उपलब्धि बता रही है।

महिला अपराधों के आंकड़ों पर राजनीति गरम
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य होने के कारण यहां अपराध के आंकड़े हमेशा राजनीतिक बहस का विषय बने रहते हैं। हाल के दिनों में महिलाओं के साथ छेड़छाड़, दुष्कर्म, घरेलू हिंसा और उत्पीड़न की घटनाओं ने विपक्ष को सरकार पर हमलावर होने का मौका दिया है।
सपा प्रमुख का कहना है कि प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार केवल प्रचार और विज्ञापनों में व्यस्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं को सुरक्षा देने में सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है। अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की बात तो करती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं।
आरक्षण और संरक्षण पर भी उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष ने अपने बयान में महिला आरक्षण और संरक्षण दोनों मुद्दों को जोड़ते हुए भाजपा पर राजनीतिक हमला बोला। उनका कहना है कि महिलाओं को केवल चुनावी नारों तक सीमित रखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि महिलाओं को वास्तविक सम्मान देना है तो उन्हें सुरक्षा, न्याय और अवसर तीनों मिलना चाहिए। केवल भाषणों और योजनाओं की घोषणाओं से महिलाओं की स्थिति मजबूत नहीं हो सकती। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए महिला सुरक्षा और महिला सम्मान का मुद्दा आने वाले समय में बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है।
भाजपा सरकार का पक्ष
वहीं भाजपा सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था पहले की तुलना में बेहतर हुई है। सरकार का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। सरकार द्वारा मिशन शक्ति अभियान, महिला हेल्पलाइन, एंटी रोमियो स्क्वॉड और फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसी योजनाओं को महिला सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम बताया जाता है।

भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। सरकार अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है और महिलाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
जनता के बीच बड़ा मुद्दा बन रही महिला सुरक्षा
महिला सुरक्षा का मुद्दा हमेशा से जनता के लिए बेहद संवेदनशील रहा है। खासकर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के खिलाफ होने वाली घटनाएं लोगों की चिंता बढ़ाती रही हैं।राजनीतिक दल भी अच्छी तरह जानते हैं कि महिला मतदाता किसी भी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों को लेकर बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होना स्वाभाविक माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि केवल राजनीतिक बयान देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। ज़रूरत इस बात की है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानूनों का सख्ती से पालन हो, पुलिस व्यवस्था मजबूत बने और समाज में जागरूकता बढ़ाई जाए।
सियासी बयान से बढ़ी राजनीतिक हलचल
अखिलेश यादव के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी इसे महिला सम्मान और सुरक्षा का मुद्दा बता रही है, जबकि भाजपा इसे विपक्ष की निराशा और राजनीतिक हताशा करार दे रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक रूप ले सकता है, क्योंकि विपक्ष लगातार सरकार को कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। फिलहाल इतना तय है कि महिलाओं की सुरक्षा का सवाल उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर प्रमुख मुद्दा बन चुका है और इस पर सियासी घमासान अभी और तेज होने की संभावना है।


