पाकिस्तान ने संकट के बीच ईरान के लिए अपने सभी बंदरगाह खोल दिए हैं। ईरानी बंदरगाह अमेरिकी ब्लॉकेड के कारण पूरी तरह से बंद हैं, ऐसे में पाकिस्तान का यह फैसला ईरान के लिए बड़ी मदद है।
आयात-निर्यात अब पाकिस्तानी बंदरगाहों के जरिए आसानी से हो सकेगा। यह खबर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है क्योंकि यह सीधे अमेरिका की नीति के उलट है।
क्या है पीछे की कहानी?
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज एक सवाल के जवाब में ईरान पर लगे ब्लॉकेड को ‘फ्रेंडली’ बता दिया। उनका यह बयान चौंकाने वाला था। इस बीच, सूत्रों और जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान को यह छूट ट्रंप प्रशासन की मौन सहमति से मिली हो सकती है।
खुलकर तो अमेरिका विरोध कर रहा है, लेकिन पीछे से पाकिस्तान को कुछ आजादी दी गई लगती है। ट्रंप से जब पाकिस्तान द्वारा ईरान के लिए लैंड रूट पहले ही खोल दिए जाने का जिक्र किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि उन्हें इसकी जानकारी है। यह बयान दर्शाता है कि अमेरिका इस पूरे मामले को पूरी तरह अनदेखा नहीं कर रहा है।
ईरान के लिए लगातार आगे आ रहा पाक
पाकिस्तान ने पहले तो ईरान के लिए जमीन मार्ग खोल दिया था और अब समुद्री बंदरगाह भी उपलब्ध करा दिए हैं। इससे ईरान को अपने सामान को बाहर भेजने और जरूरी चीजें आयात करने में बड़ी मदद मिलेगी।
पाकिस्तान के इस कदम से ईरान पर अमेरिकी दबाव कम हो सकता है। दोस्ती के नाम पर पाकिस्तान ईरान की मदद कर रहा है, लेकिन साथ ही अमेरिका के साथ अपने संबंध भी बिगाड़ना नहीं चाहता। जानकार कहते हैं कि पाकिस्तान इस समय दोनों तरफ संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
क्या अमेरिका चुप रहेगा?
अभी तक अमेरिका की तरफ से इस पर कोई सख्त प्रतिक्रिया नहीं आई है। ट्रंप का ‘फ्रेंडली ब्लॉकेड’ वाला बयान कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या अमेरिका ईरान पर दबाव बनाने की अपनी रणनीति में बदलाव ला रहा है?
या फिर पाकिस्तान को कुछ खास रियायत देकर क्षेत्रीय संतुलन बिठाने की कोशिश की जा रही है? पाकिस्तान के बंदरगाहों के इस्तेमाल से ईरान की अर्थव्यवस्था को नई जान मिल सकती है। खासकर पेट्रोलियम उत्पादों और अन्य सामानों के व्यापार में आसानी होगी।


