सीवान में महिला थाना में पीड़िता से गलत बर्ताव:शिकायत दर्ज कराने पहुंची थी, डांटकर भगाया; महिला पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

सीवान में महिला थाना में पीड़िता से गलत बर्ताव:शिकायत दर्ज कराने पहुंची थी, डांटकर भगाया; महिला पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

सीवान जिले में सामने आए दो अलग-अलग मामलों ने पुलिस तंत्र की कार्यशैली और संवेदनशीलता पर गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। पहला मामला मैरवा थाना क्षेत्र का है, जहां पंजाब के लुधियाना से पहुंची एक पीड़िता ने आरोप लगाया कि शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए गए और फिर आरोपी शादी से मुकर गया। इस मामले में मैरवा थाना प्रभारी राहुल कुमार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर पहुंचकर न सिर्फ पीड़िता की बात सुनी, बल्कि तत्काल केस दर्ज कर आरोपी युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और होने वाली शादी को भी रुकवा दिया। शारीरिक संबंध बनाया, गर्भवती होने पर एबॉर्शन कराया लेकिन ठीक इसी के उलट हुसैनगंज थाना क्षेत्र में सामने आया मामला पुलिस की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा को उजागर करता है। हरियाणा के पानीपत की रहने वाली मेनका न्याय की उम्मीद लेकर सीवान पहुंची थी। उसका आरोप है कि 2018 में उसकी शादी जितेंद्र नामक युवक से तय हुई थी, जिसमें दहेज के रूप में दो लाख रुपये भी दिए गए थे। इस दौरान आरोपी ने शादी का झांसा देकर कई बार शारीरिक संबंध बनाए, जिससे वह गर्भवती भी हुई और बाद में गर्भपात हो गया। जब उसे पता चला कि युवक 1 मई को किसी और से शादी करने जा रहा है, तो वह सीधे महिला थाना पहुंची। मेनका को उम्मीद थी कि महिला थाना प्रभारी सोनी कुमारी उसकी पीड़ा को समझेंगी और तुरंत कार्रवाई करेंगी। लेकिन आरोप है कि हुआ इसके ठीक विपरीत। न तो उसकी शिकायत दर्ज की गई और न ही आरोपी की शादी रोकने का कोई प्रयास किया गया। उल्टे उसे डांटकर भगा दिया गया और देर रात अकेले आरोपी के गांव जाने के लिए कहा गया। यह न सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना रवैया था, बल्कि एक पीड़ित महिला की सुरक्षा के साथ खुला खिलवाड़ भी था। तैनात सब इंस्पेक्टर चांदनी कुमारी पर भी गंभीर आरोप लगे मामला यहीं नहीं रुका। हुसैनगंज थाना में तैनात सब इंस्पेक्टर चांदनी कुमारी पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़िता का कहना है कि उनसे मदद मांगने पर उसे अपशब्द कहे गए और यहां तक कि पैसे लेकर मामला खत्म करने का दबाव बनाया गया। 48 घंटे तक पीड़िता को महिला थाना और हुसैनगंज थाना के बीच भटकाया गया, लेकिन कहीं भी उसकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। सबसे गंभीर आरोप यह है कि एएसपी स्तर से केस दर्ज करने का निर्देश दिए जाने के बावजूद महिला थाना प्रभारी सोनी कुमारी ने उसे नजरअंदाज कर दिया। यह न सिर्फ अनुशासनहीनता का मामला है, बल्कि कानून व्यवस्था पर सीधा प्रहार भी है। जब मामला एसपी पूरन कुमार झा तक पहुंचा, तब जाकर केस दर्ज हुआ, लेकिन जांच की जिम्मेदारी फिर उसी अधिकारी को दे दी गई, जिन पर पहले से ही पक्षपात के आरोप लगे थे। पीड़िता न्याय के लिए दर-दर भटकती रह गई इस पूरे घटनाक्रम के दौरान आरोपी युवक की शादी संपन्न हो गई और पीड़िता न्याय के लिए दर-दर भटकती रह गई। मेनका का कहना है कि उसने सभी सबूत पुलिस को दिए, लेकिन उसे न्याय नहीं मिला। यहां तक कि जांच अधिकारी द्वारा उसके फोन कॉल तक ब्लॉक कर दिए गए। यह मामला सिर्फ एक पीड़िता की कहानी नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे एक ही जिले में पुलिस का रवैया पूरी तरह से अलग हो सकता है। जहां एक ओर पुरुष पुलिस अधिकारी ने तत्परता और संवेदनशीलता दिखाई, वहीं महिला पुलिस पदाधिकारियों पर गंभीर लापरवाही, भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता के आरोप लगे हैं। एसपी पूरन कुमार झा ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह होगा कि क्या पीड़िता को न्याय मिल पाता है या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। सीवान जिले में सामने आए दो अलग-अलग मामलों ने पुलिस तंत्र की कार्यशैली और संवेदनशीलता पर गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। पहला मामला मैरवा थाना क्षेत्र का है, जहां पंजाब के लुधियाना से पहुंची एक पीड़िता ने आरोप लगाया कि शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए गए और फिर आरोपी शादी से मुकर गया। इस मामले में मैरवा थाना प्रभारी राहुल कुमार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर पहुंचकर न सिर्फ पीड़िता की बात सुनी, बल्कि तत्काल केस दर्ज कर आरोपी युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और होने वाली शादी को भी रुकवा दिया। शारीरिक संबंध बनाया, गर्भवती होने पर एबॉर्शन कराया लेकिन ठीक इसी के उलट हुसैनगंज थाना क्षेत्र में सामने आया मामला पुलिस की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा को उजागर करता है। हरियाणा के पानीपत की रहने वाली मेनका न्याय की उम्मीद लेकर सीवान पहुंची थी। उसका आरोप है कि 2018 में उसकी शादी जितेंद्र नामक युवक से तय हुई थी, जिसमें दहेज के रूप में दो लाख रुपये भी दिए गए थे। इस दौरान आरोपी ने शादी का झांसा देकर कई बार शारीरिक संबंध बनाए, जिससे वह गर्भवती भी हुई और बाद में गर्भपात हो गया। जब उसे पता चला कि युवक 1 मई को किसी और से शादी करने जा रहा है, तो वह सीधे महिला थाना पहुंची। मेनका को उम्मीद थी कि महिला थाना प्रभारी सोनी कुमारी उसकी पीड़ा को समझेंगी और तुरंत कार्रवाई करेंगी। लेकिन आरोप है कि हुआ इसके ठीक विपरीत। न तो उसकी शिकायत दर्ज की गई और न ही आरोपी की शादी रोकने का कोई प्रयास किया गया। उल्टे उसे डांटकर भगा दिया गया और देर रात अकेले आरोपी के गांव जाने के लिए कहा गया। यह न सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना रवैया था, बल्कि एक पीड़ित महिला की सुरक्षा के साथ खुला खिलवाड़ भी था। तैनात सब इंस्पेक्टर चांदनी कुमारी पर भी गंभीर आरोप लगे मामला यहीं नहीं रुका। हुसैनगंज थाना में तैनात सब इंस्पेक्टर चांदनी कुमारी पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़िता का कहना है कि उनसे मदद मांगने पर उसे अपशब्द कहे गए और यहां तक कि पैसे लेकर मामला खत्म करने का दबाव बनाया गया। 48 घंटे तक पीड़िता को महिला थाना और हुसैनगंज थाना के बीच भटकाया गया, लेकिन कहीं भी उसकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। सबसे गंभीर आरोप यह है कि एएसपी स्तर से केस दर्ज करने का निर्देश दिए जाने के बावजूद महिला थाना प्रभारी सोनी कुमारी ने उसे नजरअंदाज कर दिया। यह न सिर्फ अनुशासनहीनता का मामला है, बल्कि कानून व्यवस्था पर सीधा प्रहार भी है। जब मामला एसपी पूरन कुमार झा तक पहुंचा, तब जाकर केस दर्ज हुआ, लेकिन जांच की जिम्मेदारी फिर उसी अधिकारी को दे दी गई, जिन पर पहले से ही पक्षपात के आरोप लगे थे। पीड़िता न्याय के लिए दर-दर भटकती रह गई इस पूरे घटनाक्रम के दौरान आरोपी युवक की शादी संपन्न हो गई और पीड़िता न्याय के लिए दर-दर भटकती रह गई। मेनका का कहना है कि उसने सभी सबूत पुलिस को दिए, लेकिन उसे न्याय नहीं मिला। यहां तक कि जांच अधिकारी द्वारा उसके फोन कॉल तक ब्लॉक कर दिए गए। यह मामला सिर्फ एक पीड़िता की कहानी नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे एक ही जिले में पुलिस का रवैया पूरी तरह से अलग हो सकता है। जहां एक ओर पुरुष पुलिस अधिकारी ने तत्परता और संवेदनशीलता दिखाई, वहीं महिला पुलिस पदाधिकारियों पर गंभीर लापरवाही, भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता के आरोप लगे हैं। एसपी पूरन कुमार झा ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह होगा कि क्या पीड़िता को न्याय मिल पाता है या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।  

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