धरती माता बचाओ अभियान, जैविक खेती अपनाएं किसान, रासायनिक खादों का उपयोग हो कम- जैन

धरती माता बचाओ अभियान, जैविक खेती अपनाएं किसान, रासायनिक खादों का उपयोग हो कम- जैन

सरकार के महत्वाकांक्षी ‘धरती माता बचाओ अभियान’ के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर पंचायत समिति सभागार सुवाणा में उपखंड स्तरीय निगरानी समिति की बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए एसडीएम अरुण कुमार जैन ने किसानों से रासायनिक खाद का मोह छोड़कर प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने का आह्वान किया।

जैन ने कहा कि भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए उर्वरकों का संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग बेहद जरूरी है। अनुदानित उर्वरकों के गैर-कृषि कार्यों में उपयोग और राज्य से बाहर तस्करी को रोकने के लिए किसानों को जागरूक करना होगा। उन्होंने डीएपी के स्थान पर सिंगल सुपर फास्फेट या एनपीके के उपयोग, हरी खाद को बढ़ावा देने और स्वयं के उपयोग के लिए किचन गार्डन लगाने की सलाह दी। उन्होंने सभी अधिकारियों को अभियान की प्रगति पर सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए।

विकास अधिकारी जितेन्द्र कुमार गुरनानी ने कृषि विभाग को निर्देश दिए कि नियमित कृषक गोष्ठियां व प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएं। इससे किसानों को मृदा संरक्षण और कीट प्रबंधन की सटीक जानकारी मिल सके। कृषि अधिकारी कजोड़मल गुर्जर ने बताया कि ग्राम स्तर पर आपणो खेत-आपणी खाद कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत किसानों को वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत और ढैंचा (हरी खाद) तैयार करने व उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। बैठक में कृषि आदान संघ के शांतिलाल, सहकारी समिति के प्रकाश सुथार, शरद अग्रवाल, कृषि अधिकारी प्रहलाद राय सारस्वत, संगीता महारानियां, श्यामलाल तंबोली सहित खाद-बीज विक्रेता मौजूद रहे।

सहकारी समिति व्यवस्थापकों का कार्य बहिष्कार समाप्त

भीलवाड़ा. ग्राम सेवा सहकारी समिति के व्यवस्थापकों और सहायक व्यवस्थापकों की ओर से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पिछले दो महीने से किया जा रहा कार्य बहिष्कार मंगलवार को समाप्त हो गया। राजस्थान स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड जयपुर के प्रबंध निदेशक के साथ हुई सकारात्मक वार्ता और उनकी ओर से मिले आश्वासन के बाद संगठन ने हड़ताल वापस लेने का ऐलान किया है। इस फैसले से जिले के हजारों किसानों ने बड़ी राहत की सांस ली है।

ज्ञात हो कि व्यवस्थापकों की इस लंबी हड़ताल के कारण पिछले 60 दिनों से ग्रामीण स्तर पर समितियों का कामकाज पूरी तरह ठप पड़ा था। इसका सबसे ज्यादा खमियाजा उन काश्तकारों को भुगतना पड़ रहा था, जिन्हें अपना अल्पकालीन फसली ऋण जमा कराना था या खेती-किसानी के लिए नया ऋण प्राप्त करना था। आर्थिक चक्र रुकने से किसानों के सामने भारी परेशानी खड़ी हो गई थी। कार्य बहिष्कार समाप्त होने के बाद अब सभी ग्राम सेवा सहकारी समितियों में सुचारू रूप से कामकाज शुरू हो जाएगा। इससे न केवल अटका हुआ फसली ऋण वितरण फिर से गति पकड़ेगा, बल्कि पुराने ऋणों की वसूली और उनका नवीनीकरण भी सुगमता से हो सकेगा।

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