India US Trade Deal हो गई लगभग पूरी, मोदी-ट्रंप की बातचीत के बाद बदला माहौल, कभी भी हो सकता है ऐलान

India US Trade Deal हो गई लगभग पूरी, मोदी-ट्रंप की बातचीत के बाद बदला माहौल, कभी भी हो सकता है ऐलान

India US Trade Deal: वॉशिंगटन डीसी में इन दिनों एक ऐसी बातचीत चल रही है जिसका असर भारत के करोड़ों कारोबारियों और आम लोगों की जिंदगी पर पड़ सकता है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की बात अब सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि आखिरी टेबल पर आ चुकी है। वॉशिंगटन डीसी में चल रही ताजा बातचीत में अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि डील का ज्यादातर हिस्सा तय हो चुका है, बस कुछ आखिरी मुद्दे सुलझाने बाकी हैं। अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा कि बातचीत “सकारात्मक और उपयोगी” रही है। उन्होंने साफ कहा कि “ज्यादातर काम लगभग हो चुका है।”

20 से 22 अप्रैल तक अमेरिका में है भारतीय प्रतिनिधिमंडल

भारतीय प्रतिनिधिमंडल 20 से 22 अप्रैल के बीच वॉशिंगटन में है। भारत की तरफ से वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन इस टीम का नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय की ओर से ब्रेंडन लिंच बातचीत में शामिल हैं। दोनों तरफ से सीनियर अधिकारियों का आना यह बताता है कि मामला अब बेहद करीब आ गया है।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में कहा था कि पहले चरण की डील “लगभग तैयार” है। भारत की कोशिश है कि उसे अमेरिकी बाजार में चीन और दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर पहुंच मिले, यानी कम टैरिफ पर ज्यादा माल बेचने का मौका।

मोदी-ट्रंप की बातचीत के बाद बदला माहौल

इस पूरी कवायद की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बातचीत के बाद हुई थी, जिसमें दोनों देशों ने आपसी फायदे वाले व्यापार को बढ़ावा देने का ढांचा तय किया था। उसके बाद से दोनों देशों के अफसर लगातार मिल रहे हैं। इस बीच अमेरिका ने इस साल एक अस्थायी 10 फीसदी टैरिफ लगाया था, जिसके चलते कुछ पुराने प्रावधानों पर फिर से बात करनी पड़ी। यह रोड़ा भी अब धीरे-धीरे हट रहा है।

“दोनों के लिए फायदे का सौदा” -अमेरिकी राजदूत

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस डील को दोनों देशों के लिए “विन-विन” स्थिति यानी दोनों की जीत बताया है। उनके मुताबिक यह समझौता सिर्फ कागजी नहीं, बल्कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने वाला होगा।

अगर यह समझौता हो जाता है तो यह भारत-अमेरिका के आर्थिक रिश्तों में एक बड़ा मील का पत्थर होगा। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सबसे तेज बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के बीच यह समझौता आने वाले दशकों के व्यापार की दिशा तय कर सकता है। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आखिरी बचे हुए मुद्दों पर कब तक सहमति बनती है और कब दोनों देश औपचारिक एलान करते हैं।

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