India-South Korea की नई जुगलबंदी, Defence, AI और Chip Making पर हुई Mega Deal

India-South Korea की नई जुगलबंदी, Defence, AI और Chip Making पर हुई Mega Deal
सोमवार को भारत और दक्षिण कोरिया के रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ता नजर आया, जब दोनों देशों ने आपसी सहयोग को और मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इस मौके पर नरेंद्र मोदी और ली जे म्युंगने संयुक्त बयान भी जारी किया है।
बता दें कि दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की यह भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है, जिसे दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बयान में कहा कि राष्ट्रपति ली का जीवन संघर्ष, सेवा और समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही यह उनकी पहली भारत यात्रा है, लेकिन भारत के प्रति उनका जुड़ाव पहले से ही दिखाई देता रहा है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने इस यात्रा को दोनों देशों के बीच संबंधों को एक नए और उन्नत स्तर पर ले जाने वाला कदम बताया है। मौजूद जानकारी के अनुसार, भारत और दक्षिण कोरिया के बीच लोकतांत्रिक मूल्यों, बाजार आधारित व्यवस्था और कानून के शासन को लेकर समान सोच है। इसके साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर भी दोनों देशों का दृष्टिकोण काफी हद तक मेल खाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में दोनों देशों के रिश्ते और अधिक व्यापक और सक्रिय हुए हैं और अब इन्हें भविष्य की जरूरतों के हिसाब से और मजबूत बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि चिप निर्माण से लेकर जहाज निर्माण, प्रतिभा से लेकर तकनीक, पर्यावरण से लेकर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में नए अवसरों की तलाश की जाएगी, जिससे दोनों देशों की प्रगति सुनिश्चित हो सके।
वहीं, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने भी द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देश मौजूदा करीब 25 अरब डॉलर के वार्षिक व्यापार को वर्ष 2030 तक बढ़ाकर लगभग 50 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रख रहे हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार, दोनों देशों ने जहाज निर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वित्त और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है।
बता दें कि दोनों पक्षों ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संपर्क को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया है, ताकि रिश्ते केवल सरकारी स्तर तक सीमित न रहकर आम जनता तक भी मजबूत हों।
गौरतलब है कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक संबंधों को 2010 में व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के लागू होने के बाद नई गति मिली थी। इसके बाद से व्यापार और निवेश में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली।
मौजूद जानकारी के अनुसार, दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करने का भी संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि साझा प्रयासों के जरिए दोनों देश इस क्षेत्र में शांति और प्रगति को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते रहेंगे।

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