आज अक्षय तृतीया पर उदयपुर नगर अपना 474वां स्थापना दिवस मना रहा है। पहाड़ों की गोद में बसीं झीलें, महल और धरोहरें आज भी दुनिया को अपनी ओर खींचती है। शहर तो वही है, लेकिन नजर बदलते ही उसकी किस्मत चमक उठी। और ये जादू किया कर्नल जेम्स टॉड ने। अपनी प्रसिद्ध किताब Annals and Antiquities of Rajasthan में टॉड ने लिखा — “उदयपुर भारत महाद्वीप का सबसे रोमांटिक स्थान है।” ये कोई साधारण वाक्य नहीं था। ये मुहर थी, जिसने उदयपुर को दुनिया भर की सबसे रोमांटिक जगहों की सूची में हमेशा के लिए जगह दिला दी। आज भी जब कोई उदयपुर कहता है, तो सबसे पहले “रोमांटिक सिटी” शब्द ही जुबान पर आता है। बता दें, नवंबर, 2023 और जुलाई 2024 में खूबसूरती और हेरिटेज की वजह से उदयपुर को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शहरों में दूसरा स्थान मिला था जबकि एशिया में नंबर वन और देश से इकलौता शहर भी रहा। ट्रेवल प्लस लीजर मैग्जीन के रीडर्स च्वॉइस अवॉर्ड के तहत ये रैंकिंग दी गई थी। जुलाई 2024 में मैग्जीन ने अमेरिका में 125 कैटेगरी में वर्ल्ड बेस्ट अवॉर्ड घोषित किए थे। टॉप 10 शहरों में मैक्सिको का सैन मिगुएल डी ऑलेंडे पहला और जापान का क्योटो तीसरे नंबर पर रहा। जबकि उदयपुर दूसरे स्थान पर था। टॉड ने उदयपुर को सस्टेनेबल प्लानिंग का बेहतर उदाहरण बताया टॉड ने उदयपुर को महज खूबसूरत नहीं बताया। उन्होंने लिखा कि यहां की झीलें -पिछोला, फतेहसागर, उदयसागर, एक सुनियोजित वाटर-डिफेंस नेटवर्क का हिस्सा थीं। ये न सिर्फ पानी का स्रोत थीं, बल्कि दुश्मन को रोकने का प्राचीन स्मार्ट सिस्टम भी। छोटे-छोटे बांध, नहरें और जुड़ी हुई झीलें आज की भाषा में कहें तो “सस्टेनेबल प्लानिंग” का बेहतर उदाहरण हैं। इतिहासकार डॉ. श्रीकृष्ण ‘जुगनू’ बताते हैं कि टॉड 1818-1822 के बीच उदयपुर में रहे। आहड़ सभ्यता को उन्होंने करीब से देखा और अपनी किताब में दर्ज किया। यही वो मुहरत था, जिसने आहड़ सभ्यता को दुनिया के सामने ला दिया। तब जेम्स टॉड उदयपुर आए और नगर में प्रवेश करना था तब उनकी तबियत भी खराब थी लेकिन उनके नगर में जाने का मुर्हूत आए उससे पहले आहड़ वर्तमान आयड़ में रोका गया था। डा. जुगनू कहते है कि जेम्स टॉड के मुर्हूत के इंतजार आयड़ सभ्यता को देखा और ये हमारे सामने आती है। जेम्स टॉड ने इस मुर्हूत के इंतजार में इस देश को ऐसा मुर्हूत् दे दिया जिसे हम आहड़ सभ्यता कहते है। उदयपुर को लेकर कवियों ने अनेक रचनाएं की किसी ने गजल तो किसी ने दोहा लिखे। इसी कड़ी में मारवाड़ी कवि बांकीदास ने दोहा लिखा- सांई करे परेवड़ा, जगपद रहे दरबार, पिछोले पानी पीवा और चुगो चुगे कोठार। मतलब कि जगत सिंह के दरबार में कोठार का चुगा चुगेंगे और पिछोला का पानी पीएंगे। उन्होंने लिखा-अगर अगला जन्म मिला, तो कबूतर बनकर भी उदयपुर में ही रहूंगा। कवि जयशंकर प्रसाद ने उदयपुर की पिछोला झील के किनारे बैठकर ‘पेशोला (पिछोला) की प्रतिध्वनि’ नामक प्रसिद्ध कविता लिखी थी। यह कविता उनके काव्य-संग्रह ‘लहर’ में थी। उनके कविता में भाव थे कि प्रताप फिर लौटे। उन्होंने महाराणा प्रताप के समय के गौरवपूर्ण अतीत को याद करते हुए वर्तमान की निर्बलता पर दु:ख जताया। साधु ने कहा-मेरी हामी के बिना नहीं बनेगी पाल महाराणा उदय सिंह ने पानी जमा करने के लिए उदयसागर बनवाया। दो बार पाल टूट गई। फिर एक नाथ साधु ने कहा “मेरी हामी के बिना पाल नहीं बनेगी।” साधु को डबोक के पास धुणीमाता स्थान पर विराजमान किया गया। उसके बाद पाल बनी। आज तक एक दरार नहीं आई। उस समय आबादी कम थी लेकिन उस समय भी उनकी लंबी सोच थी और पानी व्यर्थ नहीं जाए इसके लिए उदयसागर का निर्माण करवाया। इतिहासकार डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू बताते हैं कि महाराणा उदयसिंह के समय कम खर्च में बांध बनें, क्योंकि पहाड़ियों के बीच तालाब बनाए गए। उदयपुर को खूबसूरत शहर बनाने की सोच महाराणा उदयसिंह की मानव-मंदिर-जल पर आधारित रही। आज भी उदयपुर विश्व के सुंदर शहरों में शुमार है। महाराणा उदयसिंह को 1303 ई. यह निर्णय लिया कि किसी भी परिस्थिति में राज्य के उत्तराधिकारी को बचाना उनका सबसे बड़ा कर्तव्य है। इसी कारण उन्होंने चित्तौड़गढ़ को छोड़कर पर्वतीय शृंखलाओं के मध्य स्थित उदयपुर जैसी राजधानी का निर्माण करवाया। फतहसागर झील की कहानी फतहसागर एक सुंदर नाशपती फल के आकार की कृत्रिम झील है। इस झील का निर्माण सन् 1688 में उदयपुर के महाराणा जयसिंह ने कराया था। यहीं पर एक बांध भी बनाया गया था। जिसकी नींव इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया के बेटे कनॉट के ड्यूक ने रखी थी। इसके बाद 1888 में आयी भीषण बारिश की वजह से यह झील और इस पर बना बांध टूटकर बिखर गया था। तब उदयपुर के महाराणा फतहसिंह ने इस झील पर बने बांध का दोबारा निर्माण करवाया। तब महाराणा फतहसिंह के नाम पर ही यह फतहसागर झील कहलाई। इस झील पर बने एक टापू को नेहरू उद्यान के रुप में विकसित किया गया है। पिछोला झील उदयपुर की पिछोला झील एक पिच्छू नाम के बंजारे की मेहनत और दूरदर्शिता का परिणाम थी, जिसने आने वाले युगों के लिए एक धरोहर की नींव रखी। इतिहासकार बताते हैं कि पिछोला झील की शुरुआत 1362 ईस्वी में एक बंजारे ने की थी, जिसका नाम भी पिच्छू था। वह अपने मवेशियों को पानी पिलाने के लिए इस क्षेत्र में आता था, लेकिन जब उसने पानी की कमी देखी तो उसने स्थानीय लोगों की मदद से एक छोटा सा तालाब खुदवाया। समय के साथ यह तालाब झील का रूप लेने लगा। वर्षों बाद महाराणा लाखा ने इस झील की सुंदरता और उपयोगिता को देखते हुए इसका विस्तार करवाया। बाद में, महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने झील की सुंदरता से प्रभावित होकर इसे और विकसित किया। आज हम पगड़ी उछाल रहे हैं, लेकिन मेवाड़ ने तो हमेशा मूल्य दिया है। मीरा कन्या महाविद्यालय, उदयपुर के प्रोफेसर और इतिहासकार डॉ. चंद्रशेखर शर्मा बताते हैं कि मुगलों से संधि मेवाड़ की शर्तों पर हुई। जहांगीर-पुत्र खुर्रम (बाद में शाहजहां) यहां शरण पाया। ऐतिहासिक पगड़ी (जगमंदिर): 1622 ई. में, जब शाहजहां ने अपने पिता जहांगीर के खिलाफ विद्रोह किया था, तब वह यहां रुके थे और उन्होंने महाराणा करण सिंह के साथ पगड़ी बदलकर संबंध मजबूत किए थे। आज हम पगड़ी उछाल रहे हैं, लेकिन मेवाड़ ने तो हमेशा मूल्य दिया है।
— ये खबर भी पढ़ें उदयपुर में नया रिकॉर्ड, जनवरी में 2.44 लाख टूरिस्ट आए:शोर और ट्रैफिक जाम ने बढ़ाई विदेशी मेहमानों की चिंता, पढ़िए क्या बोले सैलानी
पर्यटन सिटी उदयपुर में देसी-विदेशी टूरिस्ट का आवगमन लगातार बना हुआ है। साल 2026 की शुरुआत शहर के लिए पर्यटन के लिहाज से काफी सुखद रही है। पर्यटन विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार पिछले महीने जनवरी में ही उदयपुर में 2 लाख 44 हजार 558 टूरिस्ट घूमने पहुंचे। इसमें 2 लाख 25 हजार से ज्यादा घरेलू (देसी) टूरिस्ट थे, जबकि 19 हजार 558 विदेशी मेहमानों ने यहां की झीलों और महलों की खूबसूरती को निहारा। (पूरी खबर पढ़ें)
उदयपुर में 8 सालों में टूरिज्म का ट्रेंड बदला:2018 के मुकाबले 2025 में डबल हुए पर्यटक, घरेलु टूरिस्ट बने गेम चेंजर; सकारात्मक संकेत उदयपुर की टूरिज्म इंडस्ट्री के लिए साल 2025 काफी अच्छा रहा है। 2025 के 12 महीनों में कुल 21 लाख 57 हजार 787 टूरिस्ट लेकसिटी के अलग-अलग टूरिस्ट पॉइंट्स पर घूमने पहुंचे। इनमें 19 लाख 96 हजार 700 देसी और 1 लाख 61 हजार 87 विदेशी हैं। 2018 से 2025 के बीच उदयपुर में आने वाले टूरिस्ट लगभग डबल हो गए हैं। (पूरी खबर पढ़ें)


