समस्तीपुर में दहेज के लिए विवाहिता की हत्या का मामले सामने आया है। मायके पक्ष को सूचना दिए बिना शव को दफना दिया गया। शव की बरामदगी और मामले की जांच के लिए पिता को 33 दिनों का संघर्ष करना पड़ा।
18 अप्रैल की शाम शव को कब्र से निकाल कर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल लाया गया है। मृतका की पहचान हरीपुर गांव के मो. नेमोतुल्ला की पत्नी रोजेदा खातुन(18) के तौर पर हुई है। पिता की जुबानी जानिए क्या है पूरा मामला लिलहोल गांव निवासी पिता मो. शौकत अली ने बताया कि 23 अक्टूबर 2025 को धूमधाम से बेटी की शादी हरीपुर गांव में नेमोतुल्ला के साथ की थी। ढाई लाख कैश और एक लाख रुपए के जेवरात की डिमांड की गई थी। उस समय सवा लाख रुपए कैश और एक लाख का गहना दिया था। शेष राशि रमजान के बाद देने की बात हुई थी। 9 मार्च 2026 को रमजान के दौरान उसका पति और समधी बिदागरी कराकर ले गए। ससुराल पहुंचते ही बेटी से बकाया राशि की मांग शुरू हुई। उसने फोन कर बताया कि परिवार के लोग जमीन खरीदने के लिए पैसे मांग रहे हैं। जिसके बाद दामाद और समधी से फोन पर मैंने कहा कि रमजान के बाद बकाया पैसा दे देंगे। 14 मार्च की रात समधी के भाई ने फोन किया करके कहा कि आपकी बेटी की मौत हो गई है, आप लोग जल्दी आइए। रात में मेरी तबीयत ठीक नही थी। मैंने अपने बेटे और परिवार को सदस्यों तुरंत मौके पर भेजा, लेकिन किसी से मुलाकात नहीं हुई। बिना जानकारी दिए शव को दफना दिया गया। ग्रामीणों से पता चला कि करंट लगाकर मेरी बेटी को मारा गया है। हर जगह फरियाद लेकर पहुंचा, किसी ने नहीं सुनी शौकत अली ने आगे बताया कि ग्रामीणों की मदद से घटना के दो दिन बाद बेटी को दफनाने से पहले का वीडियो मिला। सीने पर चोट और गले पर काला निशान था। 17 मार्च को परिवार के साथ सिंघिया थाना पहुंचा। उस दिन बड़ा बाबू मौजूद नहीं थे। दूसरे दिन फिर गया, लेकिन मेरी किसी ने नहीं सुनी। थक-हारकर 21 मार्च को रोसड़ा डीएसपी ऑफिस गया, लेकिन वो भी छुट्टी पर थे। डीएसपी ऑफिस के एक पुलिसकर्मी ने सिंघिया थाना में बात की। जिसके बाद 22 मार्च को फिर थाना गया। फिर भी किसी ने मेरी नहीं सुनी। हरीपुर गांव के पंचायत प्रतिनिधियों से बात करने पर मदद नहीं मिली। मामले को रफा-दफा करने की बात कही गई। 27 मार्च को न्याय के लिए एसपी के पास पहुंचे। एसपी ने गंभीरता के साथ मेरी बात सुनी। उन्होंने वीडियो देखा। तुरंत मजिस्ट्रेट बहाल कर शव कब्र से बाहर निकालने और पोस्टमार्टम कराने का निर्देश दिया। इस आदेश के दस दिन बाद शुक्रवार सुबह फोन आया। मुझे थाना बुलाया गया, कहा कि शव खोद कर कौन निकालेगा। जिस पर मैंने कहा वह खुद निकालेंगे। जिसके बाद पुलिस पदधिकारी की टीम शनिवार दोपहर हरीपुर कब्रिस्तान पहुंची। अकेले ही कब्र खोदकर शव बाहर निकाला। परिवार के लोगों को पास नहीं आने दिया गया। किसी को वीडियो भी बनाने नहीं दिया। मारपीट के बाद करंट लगाकर मेरी बेटी को ससुरालवालों ने मार डाला। दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी वहीं, इस संबंध में एएसपी संजय पांडेय ने बताया कि कब्र खोदकर शव बाहर निकाला गया है। शनिवार रात पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल लाया गया है। ताकि मौत का सही कारण स्पष्ट हो सके। इस मामले में कहां पर पुलिस चूक और लापरवाही हुई है। उसकी जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने पर पुलिसकर्मी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। समस्तीपुर में दहेज के लिए विवाहिता की हत्या का मामले सामने आया है। मायके पक्ष को सूचना दिए बिना शव को दफना दिया गया। शव की बरामदगी और मामले की जांच के लिए पिता को 33 दिनों का संघर्ष करना पड़ा।
18 अप्रैल की शाम शव को कब्र से निकाल कर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल लाया गया है। मृतका की पहचान हरीपुर गांव के मो. नेमोतुल्ला की पत्नी रोजेदा खातुन(18) के तौर पर हुई है। पिता की जुबानी जानिए क्या है पूरा मामला लिलहोल गांव निवासी पिता मो. शौकत अली ने बताया कि 23 अक्टूबर 2025 को धूमधाम से बेटी की शादी हरीपुर गांव में नेमोतुल्ला के साथ की थी। ढाई लाख कैश और एक लाख रुपए के जेवरात की डिमांड की गई थी। उस समय सवा लाख रुपए कैश और एक लाख का गहना दिया था। शेष राशि रमजान के बाद देने की बात हुई थी। 9 मार्च 2026 को रमजान के दौरान उसका पति और समधी बिदागरी कराकर ले गए। ससुराल पहुंचते ही बेटी से बकाया राशि की मांग शुरू हुई। उसने फोन कर बताया कि परिवार के लोग जमीन खरीदने के लिए पैसे मांग रहे हैं। जिसके बाद दामाद और समधी से फोन पर मैंने कहा कि रमजान के बाद बकाया पैसा दे देंगे। 14 मार्च की रात समधी के भाई ने फोन किया करके कहा कि आपकी बेटी की मौत हो गई है, आप लोग जल्दी आइए। रात में मेरी तबीयत ठीक नही थी। मैंने अपने बेटे और परिवार को सदस्यों तुरंत मौके पर भेजा, लेकिन किसी से मुलाकात नहीं हुई। बिना जानकारी दिए शव को दफना दिया गया। ग्रामीणों से पता चला कि करंट लगाकर मेरी बेटी को मारा गया है। हर जगह फरियाद लेकर पहुंचा, किसी ने नहीं सुनी शौकत अली ने आगे बताया कि ग्रामीणों की मदद से घटना के दो दिन बाद बेटी को दफनाने से पहले का वीडियो मिला। सीने पर चोट और गले पर काला निशान था। 17 मार्च को परिवार के साथ सिंघिया थाना पहुंचा। उस दिन बड़ा बाबू मौजूद नहीं थे। दूसरे दिन फिर गया, लेकिन मेरी किसी ने नहीं सुनी। थक-हारकर 21 मार्च को रोसड़ा डीएसपी ऑफिस गया, लेकिन वो भी छुट्टी पर थे। डीएसपी ऑफिस के एक पुलिसकर्मी ने सिंघिया थाना में बात की। जिसके बाद 22 मार्च को फिर थाना गया। फिर भी किसी ने मेरी नहीं सुनी। हरीपुर गांव के पंचायत प्रतिनिधियों से बात करने पर मदद नहीं मिली। मामले को रफा-दफा करने की बात कही गई। 27 मार्च को न्याय के लिए एसपी के पास पहुंचे। एसपी ने गंभीरता के साथ मेरी बात सुनी। उन्होंने वीडियो देखा। तुरंत मजिस्ट्रेट बहाल कर शव कब्र से बाहर निकालने और पोस्टमार्टम कराने का निर्देश दिया। इस आदेश के दस दिन बाद शुक्रवार सुबह फोन आया। मुझे थाना बुलाया गया, कहा कि शव खोद कर कौन निकालेगा। जिस पर मैंने कहा वह खुद निकालेंगे। जिसके बाद पुलिस पदधिकारी की टीम शनिवार दोपहर हरीपुर कब्रिस्तान पहुंची। अकेले ही कब्र खोदकर शव बाहर निकाला। परिवार के लोगों को पास नहीं आने दिया गया। किसी को वीडियो भी बनाने नहीं दिया। मारपीट के बाद करंट लगाकर मेरी बेटी को ससुरालवालों ने मार डाला। दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी वहीं, इस संबंध में एएसपी संजय पांडेय ने बताया कि कब्र खोदकर शव बाहर निकाला गया है। शनिवार रात पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल लाया गया है। ताकि मौत का सही कारण स्पष्ट हो सके। इस मामले में कहां पर पुलिस चूक और लापरवाही हुई है। उसकी जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने पर पुलिसकर्मी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


