डर के मारे होर्मुज स्ट्रेट से वापस लौटे दो पाकिस्तानी जहाज, अचानक बदलना पड़ा रास्ता, जानें क्या हुआ?

डर के मारे होर्मुज स्ट्रेट से वापस लौटे दो पाकिस्तानी जहाज, अचानक बदलना पड़ा रास्ता, जानें क्या हुआ?

Pakistani Oil Tankers Turn Back Strait of Hormuz: होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव का असर अब समुद्री रास्तों पर साफ दिखने लगा है। अमेरिका और ईरान के डबल नाकाबंदी ने हालात को और भी ज्यादा गंभीर बना दिया है। इसी बीच एक ऐसी घटना सामने आई है, जब पाकिस्तान के झंडे वाले दो बड़े तेल टैंकर पहला खैरपुर और दूसरा शालामार ने अचानक अपना रास्ता बदल लिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये दोनों जहाज होर्मुज स्ट्रेट की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन कुछ देर बाद 180 डिग्री का यू-टर्न ले लिया और पश्चिम दिशा में लौट गए। बताया जा रहा है कि इलाके में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और सुरक्षा जोखिम के चलते यह फैसला लिया गया।

बता दें होर्मुज स्ट्रेट में ट्रैफिक पूरी तरह से ईरान की सेना के मैनेजमेंट में है और ईरान के साथ तालमेल और इजाजत मिलने के बाद जहाज इस रास्ते से गुजर सकते हैं। उधर अमेरिका ने भी इस अहम समुद्री मार्ग से किसी भी जहाज को गुजरने से मनाही की है।

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब खुली चेतावनियों तक पहुंच गया है। सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर ईरान का कोई भी नौसैनिक जहाज होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नाकाबंदी के करीब आया, तो उसे तुरंत तबाह कर दिया जाएगा।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दावा किया कि ईरान की नौसेना पहले ही काफी कमजोर हो चुकी है और उसके कई जहाज नष्ट हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि कुछ फास्ट अटैक जहाज अब भी बचे हैं, लेकिन उन्हें ज्यादा खतरा नहीं माना गया है।

उन्होंने ईरान को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिकी सेना बेहद तेज और सख्त कार्रवाई करने के लिए तैयार है। यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब शांति वार्ता नाकाम हो चुकी है और अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी लागू कर दी है, जिससे हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं।

होर्मुज स्ट्रेट कितना इम्पोर्टेन्ट?

होर्मुज स्ट्रेट, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है, दुनिया के सबसे जरूरी तेल ट्रांजिट रास्तों में से एक है, जो दुनिया भर के तेल शिपमेंट का लगभग पांचवाँ हिस्सा ले जाता है।

यह घटना दिखाती है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्र में भी डर का माहौल बन चुका है, जिसका असर वैश्विक तेल सप्लाई पर पड़ सकता है।

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