दुर्ग जिले में साइबर ठगी के दो मामले सामने आए हैं, जिनमें कुल 1.47 लाख रुपए की धोखाधड़ी हुई है। अपराधियों ने लोन दिलाने और बिजली मीटर अपडेट करने के बहाने लोगों का भरोसा जीता और फिर उनके बैंक खातों से पैसे निकाल लिए। इन घटनाओं ने साइबर अपराधियों के नए तौर-तरीकों को उजागर किया है। पहला मामला नेवई थाना क्षेत्र की पूर्णिमा साहू से जुड़ा है, जो मजदूरी कर परिवार चलाती हैं और घर खरीदने के लिए लोन की तलाश में थीं। उन्हें अपने घर के पास लगे एक पोस्टर पर ‘आसान लोन सुविधा’ का विज्ञापन दिखा। पोस्टर पर दिए मोबाइल नंबर पर संपर्क करने के तुरंत बाद, राम और संजय नाम के दो युवक एक घंटे के भीतर पूर्णिमा के घर पहुंच गए। उनकी बातों और आत्मविश्वास ने महिला का भरोसा जीत लिया। आरोपियों ने पूर्णिमा को 7 लाख रुपए तक का लोन दिलाने का झांसा दिया और इसके लिए आधार कार्ड व प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज मांगे। इसके बाद ‘प्रोसेसिंग चार्ज’ के नाम पर 6,500 रुपए नकद लिए गए। ठगों ने पूर्णिमा को अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाने के लिए कहा। सबसे पहले उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक में खाता खुलवाया गया और चेकबुक दिलाई गई। कुछ समय बाद, हेमंत और एक अन्य युवक पूर्णिमा के घर पहुंचे और उनसे तीन ब्लैंक चेक लेकर चले गए। इसके बाद इक्विटस बैंक और इंडसइंड बैंक में भी उनके खाते खुलवाए गए। महिला को लगातार लोन की प्रक्रिया पूरी होने का भ्रम दिया जाता रहा, जबकि वास्तव में उसका आर्थिक शोषण जारी था। दूसरे मामले में, बिजली मीटर अपडेट के नाम पर एक युवक के बैंक खातों से 80,000 रुपए ठग लिए गए। QR कोड से 60 हजार ट्रांसफर, फिर गायब हुए ठग 2 मार्च 2026 को आरोपियों ने महिला को बताया कि लोन की फाइल तैयार हो गई है और अंतिम प्रक्रिया के लिए 60,000 रुपए जमा करने होंगे। गरीबी के बावजूद महिला ने उधार लेकर यह रकम एक QR कोड के जरिए ट्रांसफर कर दी, जो हेमंत गुप्ता के नाम से जुड़ा था। इसके बाद आरोपियों ने फोन उठाना बंद कर दिया और लोन भी नहीं मिला। ब्लैंक चेक के जरिए अब धमकी जब महिला ने अपने पैसे और चेक वापस मांगे तो आरोपी बदतमीजी पर उतर आए। आरोप है कि वे ब्लैंक चेक को बैंक में लगाकर बाउंस कराने और कानूनी केस में फंसाने की धमकी दे रहे हैं। साथ ही गाली-गलौज कर महिला और उसके परिचितों को डराया जा रहा है। दूसरा मामला: APK लिंक से 80 हजार पार इसी तरह का एक और मामला छावनी थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां प्रगति नगर निवासी गौतम यादव, जो ट्रांसपोर्टिंग का काम करते हैं, साइबर ठगी का शिकार हो गए। गौतम ने अपने घर में बिजली मीटर लगाने के लिए आवेदन दिया था। 8 अप्रैल 2026 को उन्हें एक अज्ञात नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को बिजली विभाग का कर्मचारी बताया। “मीटर अपडेट” के नाम पर भेजा APK लिंक आरोपी ने गौतम को एक लिंक भेजा और कहा कि उसमें मोबाइल नंबर और बीपी नंबर डालकर 13 रुपए का भुगतान कर दें, जिससे उनका मीटर अपडेट हो जाएगा। व्हाट्सएप पर भेजी गई APK फाइल को जैसे ही गौतम ने खोला, उनके बैंक खातों से रकम कटनी शुरू हो गई। दो खातों से उड़े 80 हजार रुपए गौतम के आईडीबीआई बैंक खाते से 50,000 रुपए और एचडीएफसी बैंक खाते से 30,000 रुपए, कुल 80,000 रुपए निकाल लिए गए। जब उन्होंने आरोपी को फोन किया, तो मोबाइल नंबर बंद मिला। पुलिस ने दर्ज किए केस, जांच जारी दोनों मामलों में पीड़ितों की शिकायत पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) सहित अन्य धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और जल्द ही आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी की जाएगी।


