मोहाली में अयोध्या की तर्ज पर राम मंदिर:बाल्यावस्था में दिखेंगे भगवान राम, स्पेशल ईंटों से बना, आज से कर पाएंगे दर्शन

मोहाली में अयोध्या की तर्ज पर राम मंदिर:बाल्यावस्था में दिखेंगे भगवान राम, स्पेशल ईंटों से बना, आज से कर पाएंगे दर्शन

मोहाली के खरड़ में अयोध्या की तर्ज पर राम मंदिर बना है। अज्ज सरोवर पर बना यह मंदिर राज्य में सबसे भव्य और सबसे बड़ा राम मंदिर है, जिसे अयोध्या के राम मंदिर की शैली पर डिजाइन किया गया है। गर्भगृह में भगवान राम की 6 फुट की प्रतिमा रहेगी। इसके अलावा लोग राम परिवार, महाराजा अज्ज, महाराज दशरथ की प्रतिमाओं के दर्शन कर पाएंगे। आज 26 मार्च को मंदिर को दर्शनों के लिए जनता के लिए खोल दिया जाएगा। इस मौके पंजाब के गवर्नर गुलाब चंद कटारिया भी शामिल होंगे। जिसके बाद इसे जनता के लिए खोल दिया जाएगा। यह सारी प्रतिमाएं जयपुर में तैयार की गई है। वहां से उन प्रतिमाओं को पूरी श्रद्वा से यहां पर लाया गया है। जिसके बाद प्राण प्रतिष्ठा के लिए समागम चल रहा है। वहीं रोजाना ट्राइसिटी से लोग दर्शनों के लिए पहुंच रहे है। मंदिर कमेटी के प्रमुख शशि पाल जैन कहा आज 51 हजार दीपकों से भगवान राम की आरती की जाएगी। मंदिर की मुख्य विशेषताएं – कुल क्षेत्रफल – 10,000 वर्ग फुट। मुख्य गुंबद की ऊंचाई – 150 फुट। भगवान राम की मूर्ति – सरोवर के बीचों-बीच 118 फुट ऊंची मूर्ति स्थापित होगी। अनुमानित लागत – लगभग 25 करोड़ रुपये। सरोवर का क्षेत्र – 152 कनाल में फैला महाराजा अज्ज सरोवर। राम के दादा से संबंधित है सरोवर यह राम मंदिर अज्ज सरोवर पर बना है, जो कि भगवान राम के परदादा थे। उनके नाम पर यह सरोवर बना हुआ है। कालिदास के रघुवंश में महाराजा अज और इंदुमती की प्रेम कथा भी इससे जुड़ी मानी जाती है। यह जगह राम परिवार की पंजाब में गहरी जड़ों को दर्शाती है। यह 152 साल पुराना (लगभग 1870 के आसपास का) बड़ा सरोवर है, जो लगभग 15 एकड़ में फैला हुआ है। ब्रिटिश काल में भी इसकी पवित्रता का सम्मान करते हुए यहां नाव चलाना और मछली पकड़ना प्रतिबंधित था। 1979 में सरोवर की खुदाई के दौरान 10वीं शताब्दी के प्राचीन हिंदू मंदिर के अवशेष और विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियां मिली थीं। पास में चिंता हरण मंदिर भी है, जो इस स्थल को और पवित्र बनाता है। मंदिर को अज्ज सरोवर धाम उत्तर अयोध्या नाम दिया गया है। समिति ने इसका साइन बोर्ड भी लगा दिया है। मान्यता है कि इस सरोवर का विकास

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