सरकारी ड्यूटी से बाहर होने के बावजूद बोलेरो पर लालनीली- बत्ती और पुलिस मोनोग्राम बने रहे। मामला सामने आने के बाद नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। यह गाड़ी कोटा में शिक्षा मंत्री के काफिले से जुड़ी थी। गाड़ी मालिक उसका परिवार इसे अपने निजी कार्यों में इस्तेमाल कर रहा है। शिक्षा मंत्री ने हटाई सभी गाड़ियां जहां एक ओर शिक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री के फ्यूल बचत संदेश पर अमल करते हुए अपने काफिले की सभी गाड़ियों का उपयोग सीमित कर दिया और खुद भी सादगी का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर उनके काफिले में लग चुकी एक बोलेरो गाड़ी निजी उपयोग में चलती हुई नजर आई। शिक्षा विभाग में लगाई थी बोलेरो जानकारी के अनुसार शिक्षा विभाग के लिए अनुबंधित यह बोलेरो पहले शिक्षा मंत्री के काफिले में शामिल थी। लेकिन पिछले करीब एक महीने से पेट्रोल-डीजल की बचत के चलते गाड़ी काफिले में उपयोग नहीं हो रही थी। इसके बावजूद गाड़ी पर लगी लाल बत्ती और पुलिस का मोनोग्राम नहीं हटाया गया। गाड़ी मालिक का बेटा लेकर घूम रहा था गाड़ी का मालिक और उसके परिवार के सदस्य इसी वाहन का निजी कार्यों और शहर में घूमने के लिए उपयोग कर रहे थे। शनिवार की रात इस गाड़ी में दो युवक और दो युवतियां मौजूद थे। गाड़ी मालिक पीरूलाल ने बताया कि उनकी गाड़ी शिक्षा विभाग में लगी हुई थी, जिसे बाद में शिक्षा मंत्री के काफिले में शामिल किया गया था। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने से गाड़ी खड़ी थी और कल उनका बेटा दीपक किसी काम से इसे गुमानपुरा क्षेत्र में लेकर गया था। पीरूलाल का दावा है कि अधिकारियों ने उन्हें निजी काम के लिए गाड़ी उपयोग करने की अनुमति दी थी, लेकिन लाल बत्ती को कपड़े से ढकने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि जब वाहन सरकारी ड्यूटी पर नहीं था तो उस पर लाल बत्ती और पुलिस मोनोग्राम क्यों बने रहे। मामला सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन भी सक्रिय हो गया है।


