दरभंगा में चैती छठ की दिखी धूम:सूर्य को अर्घ्य के साथ दिखी आस्था की झलक, घाटों को आकर्षक ढंग से सजाया

दरभंगा में चैती छठ की दिखी धूम:सूर्य को अर्घ्य के साथ दिखी आस्था की झलक, घाटों को आकर्षक ढंग से सजाया

दरभंगा में चैत महीने के पावन अवसर पर चैती छठ पर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। आज व्रतियों ने डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर लोक आस्था के इस महापर्व की गरिमा को और बढ़ाया। शहर से लेकर गांव तक छठ घाटों पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा वातावरण छठी मैया के गीतों से गूंज उठा। शहर के काली मंदिर परिसर स्थित तालाब में छठ पूजा की विशेष धूम देखी गई, जहां बड़ी संख्या में व्रती महिलाएं और पुरुष जल में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दे रहे थे। घाटों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था और साफ-सफाई के साथ सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे। कमतौल थाना क्षेत्र के मधुपुर गांव में भी चैती छठ को लेकर भक्तिमय माहौल देखने को मिला। नहाय-खाय से शुरू हुए इस पर्व में श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। छठ घाटों पर व्रतियों ने पूरे श्रद्धाभाव से अर्घ्य अर्पित किया और चारों ओर लोकगीतों की मधुर ध्वनि गूंजती रही। महिलाओं के साथ मिलकर छठी मैया की आराधना रतनपुरा गांव में भी छठ पूजा उत्साहपूर्वक मनाई गई। यहां पवन श्रीवास्तव के दरवाजे पर आयोजित पूजा में उनकी धर्मपत्नी गुड़िया श्रीवास्तव और नविता श्रीवास्तव ने गांव की महिलाओं के साथ मिलकर छठी मैया की आराधना की। कमोद श्रीवास्तव के घर पर भी पूजा का आयोजन हुआ, जहां पूरा परिवार तैयारियों में जुटा रहा। व्रती रुणा देवी ने बताया कि उन्होंने बेटा के लिए छठी मैया से मन्नत मांगी थी, जो पूरी होने पर इस साल उन्होंने 36 घंटे का निर्जला व्रत रखकर छठ पूजा किया। उन्होंने इसे छठी मैया की कृपा बताया। चैती छठ पर्व शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी तक चलता है, जिसमें व्रती 36 घंटे का निर्जला उपवास रखते हैं। नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के साथ यह पर्व संपन्न होता है। तारडीह प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय उत्तर टोल बैंका में चैती छठ के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शिक्षक रमन कुमार राजू के नेतृत्व में बच्चों ने छठ पूजा की परंपराओं का जीवंत मंचन किया, जिसे देखकर सभी भावविभोर हो उठे। प्रधान शिक्षिका चांदनी कुमारी ने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों को अपनी संस्कृति से जोड़ने का बेहतर माध्यम हैं। 301 कन्याओं के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली खिरमा-पथरा स्थित राम जानकी मंदिर परिसर से सार्वजनिक चैती दुर्गा पूजा समिति की ओर से 301 कन्याओं के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई। पारंपरिक वेशभूषा में सजी कन्याओं ने गांव का भ्रमण करते हुए मोहिनी पुल पहुंचकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जल पूजन किया। यात्रा के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सिंहवाड़ा प्रखंड के टेकटार गांव में भी चैती दुर्गा पूजा के तहत विल्व वृक्ष पूजन के साथ माता की विशेष आराधना शुरू हुई। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां पिछले 35 साल से यह परंपरा जारी है और दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आकर माता से मन्नत मांगते हैं। कुल मिलाकर दरभंगा जिले में चैती छठ पर्व और दुर्गा पूजा आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक एकता का अद्भुत संगम बनकर उभरा, जहां हर ओर भक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिला। दरभंगा में चैत महीने के पावन अवसर पर चैती छठ पर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। आज व्रतियों ने डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर लोक आस्था के इस महापर्व की गरिमा को और बढ़ाया। शहर से लेकर गांव तक छठ घाटों पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा वातावरण छठी मैया के गीतों से गूंज उठा। शहर के काली मंदिर परिसर स्थित तालाब में छठ पूजा की विशेष धूम देखी गई, जहां बड़ी संख्या में व्रती महिलाएं और पुरुष जल में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दे रहे थे। घाटों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था और साफ-सफाई के साथ सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे। कमतौल थाना क्षेत्र के मधुपुर गांव में भी चैती छठ को लेकर भक्तिमय माहौल देखने को मिला। नहाय-खाय से शुरू हुए इस पर्व में श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। छठ घाटों पर व्रतियों ने पूरे श्रद्धाभाव से अर्घ्य अर्पित किया और चारों ओर लोकगीतों की मधुर ध्वनि गूंजती रही। महिलाओं के साथ मिलकर छठी मैया की आराधना रतनपुरा गांव में भी छठ पूजा उत्साहपूर्वक मनाई गई। यहां पवन श्रीवास्तव के दरवाजे पर आयोजित पूजा में उनकी धर्मपत्नी गुड़िया श्रीवास्तव और नविता श्रीवास्तव ने गांव की महिलाओं के साथ मिलकर छठी मैया की आराधना की। कमोद श्रीवास्तव के घर पर भी पूजा का आयोजन हुआ, जहां पूरा परिवार तैयारियों में जुटा रहा। व्रती रुणा देवी ने बताया कि उन्होंने बेटा के लिए छठी मैया से मन्नत मांगी थी, जो पूरी होने पर इस साल उन्होंने 36 घंटे का निर्जला व्रत रखकर छठ पूजा किया। उन्होंने इसे छठी मैया की कृपा बताया। चैती छठ पर्व शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी तक चलता है, जिसमें व्रती 36 घंटे का निर्जला उपवास रखते हैं। नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के साथ यह पर्व संपन्न होता है। तारडीह प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय उत्तर टोल बैंका में चैती छठ के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शिक्षक रमन कुमार राजू के नेतृत्व में बच्चों ने छठ पूजा की परंपराओं का जीवंत मंचन किया, जिसे देखकर सभी भावविभोर हो उठे। प्रधान शिक्षिका चांदनी कुमारी ने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों को अपनी संस्कृति से जोड़ने का बेहतर माध्यम हैं। 301 कन्याओं के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली खिरमा-पथरा स्थित राम जानकी मंदिर परिसर से सार्वजनिक चैती दुर्गा पूजा समिति की ओर से 301 कन्याओं के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई। पारंपरिक वेशभूषा में सजी कन्याओं ने गांव का भ्रमण करते हुए मोहिनी पुल पहुंचकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जल पूजन किया। यात्रा के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सिंहवाड़ा प्रखंड के टेकटार गांव में भी चैती दुर्गा पूजा के तहत विल्व वृक्ष पूजन के साथ माता की विशेष आराधना शुरू हुई। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां पिछले 35 साल से यह परंपरा जारी है और दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आकर माता से मन्नत मांगते हैं। कुल मिलाकर दरभंगा जिले में चैती छठ पर्व और दुर्गा पूजा आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक एकता का अद्भुत संगम बनकर उभरा, जहां हर ओर भक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिला।  

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