राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्री राम यंत्र स्थापित किया और वैदिक मंत्रों के बीच प्रार्थना की, जो मंदिर निर्माण में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। श्री राम यंत्र को मंदिर की दूसरी मंजिल पर स्थापित किया गया है, जो इसका अंतिम तल भी है और पूर्णता का प्रतीक है। इस स्थापना के साथ ही मंदिर का निर्माण पूरा माना जाता है। धार्मिक अनुष्ठान दक्षिण भारत, काशी और अयोध्या के वैदिक विद्वानों द्वारा पुरोहित गणेश्वर शास्त्री के मार्गदर्शन में संपन्न किए गए।
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इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या में श्री राम यंत्र स्थापना कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम ने जिस अयोध्या नगरी में जन्म लिया उसकी पवित्र धूलि का स्पर्श प्राप्त करना ही मैं अपना परम सौभाग्य मानती हूं। स्वयं प्रभु श्रीराम ने अपनी इस जन्मभूमि को स्वर्ग से भी श्रेष्ठ बताया था। उन्होंने कहा कि इस परम पवित्र श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का भूमिपूजन, यहां रामलला के दिव्य विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा, राम दरबार का भक्तजनों के लिए खोला जाना तथा मंदिर के शिखर पर धर्म-ध्वजारोहण की तिथियां हमारे इतिहास और संस्कृति की स्वर्णिम तिथियां हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि हम सभी एक समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से वर्ष 2047 या शायद उससे पहले ही हम उन लक्ष्यों को प्राप्त कर लेंगे। राम-राज्य के आदर्शों पर चलते हुए हम सब नैतिकता और धर्माचरण पर आधारित राष्ट्र का निर्माण कर सकेंगे। मैं चाहूंगी कि हमारे सभी देशवासी ‘घट-घट व्यापी राम’ के पवित्र भक्ति-भाव के साथ एकात्म होकर आगे बढ़ें। हमारे देश का पुनर्जागरण आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक, इन सभी आयामों पर हो रहा है। देव-भक्ति और देश-भक्ति, दोनों का मार्ग एक ही है।
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अयोध्या पहुंचने पर राष्ट्रपति का स्वागत उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक ने किया। अपनी यात्रा के हिस्से के रूप में, राष्ट्रपति मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले लगभग 400 श्रमिकों को सम्मानित भी करेंगी। वह परिसर के बाहरी हिस्से में स्थित एक मंदिर पर ध्वजारोहण भी करेंगी, जिसे परकोटा के नाम से जाना जाता है। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए पूरे शहर में व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर की ओर जाने वाली सड़कों को भगवा झंडों और बैनरों से सजाया गया है, जिससे उत्सवपूर्ण और भक्तिमय वातावरण का निर्माण हुआ है।


