गयाजी के इमामगंज-सलैया-पकरी सड़क चौड़ीकरण काम में कथित लापरवाही मामले में कार्रवाई की गई है। ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता पर बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 के तहत 2500 रुपये का जुर्माना लगाने की सिफारिश की गई है। मामला तब सामने आया जब एक परिवादी ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सड़क चौड़ीकरण कार्य में निर्धारित मानकों का उल्लंघन किया जा रहा है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। जांच कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 के तहत दायर इस शिकायत पर सुनवाई के दौरान, ग्रामीण कार्य विभाग के लोक प्राधिकार सह कार्यपालक अभियंता, कार्य प्रमंडल, इमामगंज को जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। उन्हें इसके लिए पर्याप्त समय और कई अवसर भी दिए गए। हालांकि, कार्यपालक अभियंता ने निर्धारित समय-सीमा के अंदर न तो कोई अद्यतन रिपोर्ट प्रस्तुत की और न ही जांच से संबंधित कोई ठोस जानकारी दी। इस उदासीनता को प्राधिकार ने गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए कड़ी नाराजगी व्यक्त की। सुनवाई कर रहे अधिकारी ने जनहित के मामलों में ऐसी लापरवाही को अस्वीकार्य बताया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, अधिनियम की धारा 8 के तहत कार्यपालक अभियंता पर 2500 रुपये का जुर्माना लगाने की अनुशंसा की गई है। उन्हें तत्काल मामले की जांच कर विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने और परिवादी की शिकायत का शीघ्र निवारण करने का भी निर्देश दिया गया है। इस आदेश की एक प्रति जिला पदाधिकारी को भी भेजी जाएगी, ताकि उच्च स्तर पर मामले की निगरानी की जा सके। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही दोहराए जाने पर और भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। घटना सरकारी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व को रेखांकित करती है। यह भी दर्शाता है कि नागरिकों की ओर से की गई शिकायतें व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। गयाजी के इमामगंज-सलैया-पकरी सड़क चौड़ीकरण काम में कथित लापरवाही मामले में कार्रवाई की गई है। ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता पर बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 के तहत 2500 रुपये का जुर्माना लगाने की सिफारिश की गई है। मामला तब सामने आया जब एक परिवादी ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सड़क चौड़ीकरण कार्य में निर्धारित मानकों का उल्लंघन किया जा रहा है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। जांच कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 के तहत दायर इस शिकायत पर सुनवाई के दौरान, ग्रामीण कार्य विभाग के लोक प्राधिकार सह कार्यपालक अभियंता, कार्य प्रमंडल, इमामगंज को जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। उन्हें इसके लिए पर्याप्त समय और कई अवसर भी दिए गए। हालांकि, कार्यपालक अभियंता ने निर्धारित समय-सीमा के अंदर न तो कोई अद्यतन रिपोर्ट प्रस्तुत की और न ही जांच से संबंधित कोई ठोस जानकारी दी। इस उदासीनता को प्राधिकार ने गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए कड़ी नाराजगी व्यक्त की। सुनवाई कर रहे अधिकारी ने जनहित के मामलों में ऐसी लापरवाही को अस्वीकार्य बताया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, अधिनियम की धारा 8 के तहत कार्यपालक अभियंता पर 2500 रुपये का जुर्माना लगाने की अनुशंसा की गई है। उन्हें तत्काल मामले की जांच कर विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने और परिवादी की शिकायत का शीघ्र निवारण करने का भी निर्देश दिया गया है। इस आदेश की एक प्रति जिला पदाधिकारी को भी भेजी जाएगी, ताकि उच्च स्तर पर मामले की निगरानी की जा सके। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही दोहराए जाने पर और भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। घटना सरकारी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व को रेखांकित करती है। यह भी दर्शाता है कि नागरिकों की ओर से की गई शिकायतें व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।


