मुजफ्फरपुर में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैयद अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद शोक की लहर दौड़ गई है। इजरायल और अमेरिकी हमले में उनकी शहादत की सूचना मिलने पर शिया समुदाय में विशेष रूप से गहरा दुख और आक्रोश देखा जा रहा है। इसी कड़ी में, शहर के कमरा मोहल्ला स्थित शिया जामा मस्जिद के बाहर से एक कैंडल जुलूस निकाला गया। इस जुलूस का नेतृत्व मौलाना इतरत हुसैन नदीम और मौलाना नेहाल हैदर ने किया। जुलूस नमाज़-ए-मग़रिबैन के बाद शुरू हुआ और बनारस बैंक चौक होते हुए कमरा मोहल्ला के रौज़ा-ए-अमीरुल मोमिनीन तक पहुंचा। शिया समुदाय के एक बड़े धर्मगुरु थे ईरानी न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, सैयद अली खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों के साथ-साथ वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा अधिकारियों की मौत 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिकी हमले में हुई है। ईरान ने इस घटना पर चालीस दिनों के शोक की घोषणा की है और अमेरिका और इजरायल को इस हमले की भारी कीमत चुकाने की चेतावनी दी है। सैयद अली खामेनेई न केवल ईरान के सर्वोच्च नेता थे, बल्कि शिया समुदाय के एक बड़े धर्मगुरु भी थे, जिन्हें ‘मरजा’ और ‘मुजतहिद’ कहा जाता है। मुजफ्फरपुर के शिया समुदाय में उनकी शहादत को लेकर गम और अमेरिका-इजरायल के खिलाफ गुस्सा है। शिया जामा मस्जिद के इमाम मौलाना इतरत हुसैन नदीम ने कहा कि आयतुल्लाह खामेनेई कभी अमेरिका के सामने नहीं झुके और अंत तक लड़ते हुए शहीद हुए। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी शहादत को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। इस घटना को लेकर दुनिया भर के कई देशों में शोक का माहौल है और मुस्लिम समाज के लोग उनकी शहादत पर गहरा अफसोस व्यक्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रमजान के इस पाक महीने में इस तरह की जुर्म किया गया है इजराइल और अमेरिका के द्वारा उनकी शहादत को इतिहास में याद रखी जाएगा। उन्होंने कहा कि खुदा अमेरिका और इजरायल की इंसानियत विरोधी तानाशाही को जल्दी से जल्दी खत्म कर दे। मौलाना नेहाल हैदर रिज़वी इमाम सुगरा बेगम वक्फ एस्टेट ने कहा के आयतुल्ला ख़ामनाई क्रूर और अत्याचारी अमरीकी और इसराइली हुक़ूमत के सामने झुके नहीं और अपनी जान दे दी लेकिन इन साम्राजी ताकत के खिलाफ घुटना नहीं टेका। जबकि शिया बहुल इलाकों में शोक का निशाना काला परचम भी लगाया गया है । इस मौके पर तनवीर रज़ा विक्टर , मौलाना सादिक सैयद मुहम्मद बाकिर आदि के साथ बहुत बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे। मुजफ्फरपुर में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैयद अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद शोक की लहर दौड़ गई है। इजरायल और अमेरिकी हमले में उनकी शहादत की सूचना मिलने पर शिया समुदाय में विशेष रूप से गहरा दुख और आक्रोश देखा जा रहा है। इसी कड़ी में, शहर के कमरा मोहल्ला स्थित शिया जामा मस्जिद के बाहर से एक कैंडल जुलूस निकाला गया। इस जुलूस का नेतृत्व मौलाना इतरत हुसैन नदीम और मौलाना नेहाल हैदर ने किया। जुलूस नमाज़-ए-मग़रिबैन के बाद शुरू हुआ और बनारस बैंक चौक होते हुए कमरा मोहल्ला के रौज़ा-ए-अमीरुल मोमिनीन तक पहुंचा। शिया समुदाय के एक बड़े धर्मगुरु थे ईरानी न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, सैयद अली खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों के साथ-साथ वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा अधिकारियों की मौत 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिकी हमले में हुई है। ईरान ने इस घटना पर चालीस दिनों के शोक की घोषणा की है और अमेरिका और इजरायल को इस हमले की भारी कीमत चुकाने की चेतावनी दी है। सैयद अली खामेनेई न केवल ईरान के सर्वोच्च नेता थे, बल्कि शिया समुदाय के एक बड़े धर्मगुरु भी थे, जिन्हें ‘मरजा’ और ‘मुजतहिद’ कहा जाता है। मुजफ्फरपुर के शिया समुदाय में उनकी शहादत को लेकर गम और अमेरिका-इजरायल के खिलाफ गुस्सा है। शिया जामा मस्जिद के इमाम मौलाना इतरत हुसैन नदीम ने कहा कि आयतुल्लाह खामेनेई कभी अमेरिका के सामने नहीं झुके और अंत तक लड़ते हुए शहीद हुए। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी शहादत को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। इस घटना को लेकर दुनिया भर के कई देशों में शोक का माहौल है और मुस्लिम समाज के लोग उनकी शहादत पर गहरा अफसोस व्यक्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रमजान के इस पाक महीने में इस तरह की जुर्म किया गया है इजराइल और अमेरिका के द्वारा उनकी शहादत को इतिहास में याद रखी जाएगा। उन्होंने कहा कि खुदा अमेरिका और इजरायल की इंसानियत विरोधी तानाशाही को जल्दी से जल्दी खत्म कर दे। मौलाना नेहाल हैदर रिज़वी इमाम सुगरा बेगम वक्फ एस्टेट ने कहा के आयतुल्ला ख़ामनाई क्रूर और अत्याचारी अमरीकी और इसराइली हुक़ूमत के सामने झुके नहीं और अपनी जान दे दी लेकिन इन साम्राजी ताकत के खिलाफ घुटना नहीं टेका। जबकि शिया बहुल इलाकों में शोक का निशाना काला परचम भी लगाया गया है । इस मौके पर तनवीर रज़ा विक्टर , मौलाना सादिक सैयद मुहम्मद बाकिर आदि के साथ बहुत बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे।


