राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खां ने कहा कि देशर| डॉ. राजेंद्र प्रसाद का व्यक्तित्व दया, करुणा, सूझबूझ और प्रेम से परिपूर्ण था। संविधान निर्माण में उनकी अहम भूमिका थी। वे बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन द्वारा आयोजित देशर| डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्मृति व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक यात्रा प्राचीन और समृद्ध रही है। बिहार में उद्योग आैर कृषि के विकास पर जोर देते हुए कहा कि विकसित भारत तभी बनेगा, जब पिछड़े राज्यों का भी चहुंमुखी विकास हो। राज्यपाल ने कहा कि जिस राष्ट्र की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित हो, उसके समग्र विकास के लिए उद्योगों का सुदृढ़ होना अत्यंत आवश्यक है। कृषि का वास्तविक विकास कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार से ही संभव है, जिससे रोजगार सृजन और आर्थिक प्रगति को नई दिशा मिलती है। उन्होंने कहा कि पूर्व में बिहार के उद्यमियों ने अनेक चुनौतियों का सामना किया, जिसका प्रभाव औद्योगिक वातावरण पर पड़ा। इसके बावजूद उद्यमियों ने धैर्य, साहस और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते हुए सफलता हासिल की। वर्तमान में राज्य में व्यापक परिवर्तन और विकास दिखाई दे रहा है और औद्योगिक माहौल पहले की तुलना में बेहतर हुआ है। उन्होंने उद्यमियों से आह्वान किया कि वे अपनी जिम्मेदारियों को पहचानें और समाज में रोल मॉडल के रूप में स्वयं को स्थापित करें, क्योंकि सफल व्यक्तियों का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। छोटी सोच सुख और आनंद नहीं दे सकती : विभिन्नता में एकता की चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह देश सदियों से विभिन्न जातियों, समाजों और संस्कृतियों का मिलन स्थल रहा है। कहावत है कि 12 कोस पर पानी और पांच कोस पर वाणी बदल जाती है। बावजूद अनेकता में एकता की मिसाल भारत जैसा कोई दूसरा देश नहीं है। उपनिषद की चर्चा करते हुए कहा कि छोटी सोच कभी भी इंसान को सुख और आनंद नहीं दे सकती। लोगों से दूसरों के लिए रोल मॉडल बनने की अपील भी की। कृषि और उद्योग के संतुलित विकास के पक्षधर थे राजेंद्र बाबू : रामलाल खेतान एसोसिएशन के अध्यक्ष रामलाल खेतान ने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद केवल बिहार नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के गौरव थे। उनका सादा जीवन, उच्च विचार और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण आज भी समाज के लिए प्रेरणादायी है। उद्यमियों और युवाओं के लिए उनका व्यक्तित्व एक मार्गदर्शक प्रकाश स्तंभ की तरह है। बिहार के औद्योगिक विकास को लेकर डॉ. राजेंद्र प्रसाद की सोच दूरदर्शी थी। वे कृषि और उद्योग के संतुलित विकास के पक्षधर थे और आत्मनिर्भर और सशक्त बिहार की परिकल्पना रखते थे। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खां ने कहा कि देशर| डॉ. राजेंद्र प्रसाद का व्यक्तित्व दया, करुणा, सूझबूझ और प्रेम से परिपूर्ण था। संविधान निर्माण में उनकी अहम भूमिका थी। वे बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन द्वारा आयोजित देशर| डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्मृति व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक यात्रा प्राचीन और समृद्ध रही है। बिहार में उद्योग आैर कृषि के विकास पर जोर देते हुए कहा कि विकसित भारत तभी बनेगा, जब पिछड़े राज्यों का भी चहुंमुखी विकास हो। राज्यपाल ने कहा कि जिस राष्ट्र की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित हो, उसके समग्र विकास के लिए उद्योगों का सुदृढ़ होना अत्यंत आवश्यक है। कृषि का वास्तविक विकास कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार से ही संभव है, जिससे रोजगार सृजन और आर्थिक प्रगति को नई दिशा मिलती है। उन्होंने कहा कि पूर्व में बिहार के उद्यमियों ने अनेक चुनौतियों का सामना किया, जिसका प्रभाव औद्योगिक वातावरण पर पड़ा। इसके बावजूद उद्यमियों ने धैर्य, साहस और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते हुए सफलता हासिल की। वर्तमान में राज्य में व्यापक परिवर्तन और विकास दिखाई दे रहा है और औद्योगिक माहौल पहले की तुलना में बेहतर हुआ है। उन्होंने उद्यमियों से आह्वान किया कि वे अपनी जिम्मेदारियों को पहचानें और समाज में रोल मॉडल के रूप में स्वयं को स्थापित करें, क्योंकि सफल व्यक्तियों का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। छोटी सोच सुख और आनंद नहीं दे सकती : विभिन्नता में एकता की चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह देश सदियों से विभिन्न जातियों, समाजों और संस्कृतियों का मिलन स्थल रहा है। कहावत है कि 12 कोस पर पानी और पांच कोस पर वाणी बदल जाती है। बावजूद अनेकता में एकता की मिसाल भारत जैसा कोई दूसरा देश नहीं है। उपनिषद की चर्चा करते हुए कहा कि छोटी सोच कभी भी इंसान को सुख और आनंद नहीं दे सकती। लोगों से दूसरों के लिए रोल मॉडल बनने की अपील भी की। कृषि और उद्योग के संतुलित विकास के पक्षधर थे राजेंद्र बाबू : रामलाल खेतान एसोसिएशन के अध्यक्ष रामलाल खेतान ने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद केवल बिहार नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के गौरव थे। उनका सादा जीवन, उच्च विचार और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण आज भी समाज के लिए प्रेरणादायी है। उद्यमियों और युवाओं के लिए उनका व्यक्तित्व एक मार्गदर्शक प्रकाश स्तंभ की तरह है। बिहार के औद्योगिक विकास को लेकर डॉ. राजेंद्र प्रसाद की सोच दूरदर्शी थी। वे कृषि और उद्योग के संतुलित विकास के पक्षधर थे और आत्मनिर्भर और सशक्त बिहार की परिकल्पना रखते थे।


