6 फीट पानी में स्कूल, 15 दिन से पढ़ाई बंद:समस्तीपुर में 54 स्कूलों के 12 हजार बच्चों की परेशानी, शिक्षक भी नहीं आ रहे पढ़ाने

6 फीट पानी में स्कूल, 15 दिन से पढ़ाई बंद:समस्तीपुर में 54 स्कूलों के 12 हजार बच्चों की परेशानी, शिक्षक भी नहीं आ रहे पढ़ाने

समस्तीपुर जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर मोहिउद्दीननगर प्रखंड का बाढ़ प्रभावित चकला गांव। यहां का प्राइमरी स्कूल महावीर स्थान बाढ़ में पूरी तरह डूब चुका है। यहां गंगा का पानी फैला है। स्कूल परिसर में करीब 6 फीट तक पानी जमा है। पिछले 15 दिनों से स्कूल में पढ़ाई बंद है। इस विद्यालय में करीब 100 बच्चे नामांकित हैं। स्कूल में पानी भर जाने के कारण बच्चों की दिनचर्या भी बदल गई है। विद्यालय को मनियर स्थित प्राइमरी स्कूल से टैग किया गया है, जो चकला गांव से करीब दो किलोमीटर दूर है। दूरी अधिक होने के कारण बच्चे वहां पढ़ने नहीं जा पा रहे हैं। ऐसे में ज्यादातर समय बच्चे घर पर ही बिता रहे हैं। मनियर गांव का एसकेजे हाई स्कूल, अपग्रेडेड हाई स्कूल मनियर, सुल्तानपुर हाई स्कूल, डुमरी मिडिल स्कूल, डुमरी हाई स्कूल, चापर प्राइमरी स्कूल समेत मोहिउद्दीननगर और मोहनपुर प्रखंड के 54 स्कूल बाढ़ की चपेट में हैं। इससे करीब 12 हजार बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। इन विद्यालयों के बच्चे पिछले 15 दिनों से स्कूल से दूर हैं। बाढ़ प्रभावित स्कूलों के बच्चों को दूसरे विद्यालयों से टैग तो किया गया है, लेकिन कई जगहों पर दूरी एक किलोमीटर से अधिक है। रास्ते में भी बाढ़ का पानी भरा है। ऐसे में बच्चे दूसरे स्कूलों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। अभिभावक भी बच्चों को पानी भरे रास्ते से भेजने में खतरा महसूस कर रहे हैं। बाढ़ की कुछ तस्वीरें…. ‘पढ़ाई पूरी तरह से बंद है’ चकला प्राइमरी स्कूल के सामने वर्ग चार की छात्रा अनुष्का कुमारी ने बताया कि करीब 15 दिनों से प्राइमरी स्कूल महावीर स्थान में गंगा का पानी भरा हुआ है। इस कारण पढ़ाई पूरी तरह बंद है। अनुष्का ने बताया कि पानी उतरने के बाद भी स्कूल में पढ़ाई शुरू कराने में परेशानी होगी। स्कूल के कार्यालय समेत सभी कमरों में पानी भरा हुआ है। बाढ़ के पानी में जरूरी कागजात भी डूब गए हैं। वहीं, क्लासरूम में रखे बेंच-डेस्क भी पानी में फंसे हुए हैं। लंबे समय तक पानी में डूबे रहने से इनके खराब होने की आशंका है। उसने बताया कि विद्यालय के बच्चों को मनियर स्थित प्राइमरी स्कूल से टैग किया गया है, लेकिन स्कूल की दूरी करीब दो किलोमीटर से अधिक है। इस कारण बच्चे वहां नहीं जा पा रहे हैं। ज्यादातर बच्चे घर पर ही रहते हैं। ‘शिक्षक भी स्कूल नहीं आ रहे है’ वर्ग तीन की छात्रा अनिशा कुमारी ने बताया कि करीब 15 दिन पहले स्कूल परिसर में पानी घुसा था। धीरे-धीरे पूरा स्कूल पानी से भर गया। इसके बाद से शिक्षक भी स्कूल नहीं आ रहे हैं और पढ़ाई बंद है। वह घर पर ही पढ़ाई करती है। अनिशा ने कहा कि पानी जल्द उतरे, ताकि फिर से स्कूल जाकर पढ़ाई कर सकें। उसने बताया कि विद्यालय में करीब 100 बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल बंद होने से पढ़ाई के साथ मध्याह्न भोजन (एमडीएम) भी बंद है। गंगा का पानी फैला हुआ है अभिभावक धीरज कुमार ने बताया कि गंगा नदी का पानी विद्यालय के सभी कमरों में घुसा हुआ है। कमरों में करीब 6 फीट तक पानी जमा है। हालांकि जलस्तर में अब गिरावट शुरू है। उम्मीद है कि जल्द स्कूल से पानी निकल जाएगा और बच्चों की पढ़ाई शुरू हो सकेगी।
54 स्कूलों की एक जैसी स्थिति बाढ़ प्रभावित अन्य स्कूलों में भी पानी जमा रहने के कारण पठन-पाठन बाधित है। कमोबेश सभी विद्यालयों की स्थिति एक जैसी है। प्रभावित स्कूलों के बच्चों को दूसरे विद्यालयों से टैग किया गया है, लेकिन रास्ते में पानी भरा होने और स्कूलों की दूरी अधिक होने के कारण बच्चे वहां नहीं पहुंच पा रहे हैं। अभिभावक भी बच्चों को बाढ़ के पानी से होकर दूसरे स्कूल भेजने से बच रहे हैं। इससे हजारों बच्चों की पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर भी डूबे, हेल्थ कैंप में मरीजों की जांच बाढ़ प्रभावित इलाकों के 6 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों में भी गंगा नदी का पानी घुस गया है। इसके कारण इन केंद्रों पर नियमित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना मुश्किल हो गया है। ऐसे में बाढ़ प्रभावित इलाकों में जगह-जगह हेल्थ चेकअप कैंप लगाए गए हैं। इन कैंपों में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती की गई है। कैंपों में करीब 110 प्रकार की दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। सांप काटने की स्थिति में तत्काल उपचार के लिए एंटी-स्नेक वेनम की व्यवस्था भी रखी गई है। पानी कम होने के बाद हर घर जाएगी मेडिकल टीम मोहनपुर के प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अमित कुमार ने बताया कि हेल्थ चेकअप कैंपों में औसतन 300 से अधिक मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। इनमें पैरों में इचिंग, सर्दी, खांसी, बुखार और त्वचा से जुड़ी अन्य समस्याओं के मरीज अधिक हैं। उन्होंने बताया कि कैंपों में पर्याप्त मात्रा में दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि मरीजों को जरूरत के अनुसार तत्काल दवा दी जा सके। सांप के काटने की स्थिति में तत्काल इलाज के लिए एंटी-स्नेक वेनम भी सुरक्षित रखा गया है। डॉ. अमित कुमार ने बताया कि अब बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी कम होने लगा है। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य विभाग की टीम बाढ़ प्रभावित गांवों में डोर-टू-डोर जाकर लोगों के स्वास्थ्य की जांच करेगी। समस्तीपुर जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर मोहिउद्दीननगर प्रखंड का बाढ़ प्रभावित चकला गांव। यहां का प्राइमरी स्कूल महावीर स्थान बाढ़ में पूरी तरह डूब चुका है। यहां गंगा का पानी फैला है। स्कूल परिसर में करीब 6 फीट तक पानी जमा है। पिछले 15 दिनों से स्कूल में पढ़ाई बंद है। इस विद्यालय में करीब 100 बच्चे नामांकित हैं। स्कूल में पानी भर जाने के कारण बच्चों की दिनचर्या भी बदल गई है। विद्यालय को मनियर स्थित प्राइमरी स्कूल से टैग किया गया है, जो चकला गांव से करीब दो किलोमीटर दूर है। दूरी अधिक होने के कारण बच्चे वहां पढ़ने नहीं जा पा रहे हैं। ऐसे में ज्यादातर समय बच्चे घर पर ही बिता रहे हैं। मनियर गांव का एसकेजे हाई स्कूल, अपग्रेडेड हाई स्कूल मनियर, सुल्तानपुर हाई स्कूल, डुमरी मिडिल स्कूल, डुमरी हाई स्कूल, चापर प्राइमरी स्कूल समेत मोहिउद्दीननगर और मोहनपुर प्रखंड के 54 स्कूल बाढ़ की चपेट में हैं। इससे करीब 12 हजार बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। इन विद्यालयों के बच्चे पिछले 15 दिनों से स्कूल से दूर हैं। बाढ़ प्रभावित स्कूलों के बच्चों को दूसरे विद्यालयों से टैग तो किया गया है, लेकिन कई जगहों पर दूरी एक किलोमीटर से अधिक है। रास्ते में भी बाढ़ का पानी भरा है। ऐसे में बच्चे दूसरे स्कूलों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। अभिभावक भी बच्चों को पानी भरे रास्ते से भेजने में खतरा महसूस कर रहे हैं। बाढ़ की कुछ तस्वीरें…. ‘पढ़ाई पूरी तरह से बंद है’ चकला प्राइमरी स्कूल के सामने वर्ग चार की छात्रा अनुष्का कुमारी ने बताया कि करीब 15 दिनों से प्राइमरी स्कूल महावीर स्थान में गंगा का पानी भरा हुआ है। इस कारण पढ़ाई पूरी तरह बंद है। अनुष्का ने बताया कि पानी उतरने के बाद भी स्कूल में पढ़ाई शुरू कराने में परेशानी होगी। स्कूल के कार्यालय समेत सभी कमरों में पानी भरा हुआ है। बाढ़ के पानी में जरूरी कागजात भी डूब गए हैं। वहीं, क्लासरूम में रखे बेंच-डेस्क भी पानी में फंसे हुए हैं। लंबे समय तक पानी में डूबे रहने से इनके खराब होने की आशंका है। उसने बताया कि विद्यालय के बच्चों को मनियर स्थित प्राइमरी स्कूल से टैग किया गया है, लेकिन स्कूल की दूरी करीब दो किलोमीटर से अधिक है। इस कारण बच्चे वहां नहीं जा पा रहे हैं। ज्यादातर बच्चे घर पर ही रहते हैं। ‘शिक्षक भी स्कूल नहीं आ रहे है’ वर्ग तीन की छात्रा अनिशा कुमारी ने बताया कि करीब 15 दिन पहले स्कूल परिसर में पानी घुसा था। धीरे-धीरे पूरा स्कूल पानी से भर गया। इसके बाद से शिक्षक भी स्कूल नहीं आ रहे हैं और पढ़ाई बंद है। वह घर पर ही पढ़ाई करती है। अनिशा ने कहा कि पानी जल्द उतरे, ताकि फिर से स्कूल जाकर पढ़ाई कर सकें। उसने बताया कि विद्यालय में करीब 100 बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल बंद होने से पढ़ाई के साथ मध्याह्न भोजन (एमडीएम) भी बंद है। गंगा का पानी फैला हुआ है अभिभावक धीरज कुमार ने बताया कि गंगा नदी का पानी विद्यालय के सभी कमरों में घुसा हुआ है। कमरों में करीब 6 फीट तक पानी जमा है। हालांकि जलस्तर में अब गिरावट शुरू है। उम्मीद है कि जल्द स्कूल से पानी निकल जाएगा और बच्चों की पढ़ाई शुरू हो सकेगी।
54 स्कूलों की एक जैसी स्थिति बाढ़ प्रभावित अन्य स्कूलों में भी पानी जमा रहने के कारण पठन-पाठन बाधित है। कमोबेश सभी विद्यालयों की स्थिति एक जैसी है। प्रभावित स्कूलों के बच्चों को दूसरे विद्यालयों से टैग किया गया है, लेकिन रास्ते में पानी भरा होने और स्कूलों की दूरी अधिक होने के कारण बच्चे वहां नहीं पहुंच पा रहे हैं। अभिभावक भी बच्चों को बाढ़ के पानी से होकर दूसरे स्कूल भेजने से बच रहे हैं। इससे हजारों बच्चों की पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर भी डूबे, हेल्थ कैंप में मरीजों की जांच बाढ़ प्रभावित इलाकों के 6 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों में भी गंगा नदी का पानी घुस गया है। इसके कारण इन केंद्रों पर नियमित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना मुश्किल हो गया है। ऐसे में बाढ़ प्रभावित इलाकों में जगह-जगह हेल्थ चेकअप कैंप लगाए गए हैं। इन कैंपों में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती की गई है। कैंपों में करीब 110 प्रकार की दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। सांप काटने की स्थिति में तत्काल उपचार के लिए एंटी-स्नेक वेनम की व्यवस्था भी रखी गई है। पानी कम होने के बाद हर घर जाएगी मेडिकल टीम मोहनपुर के प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अमित कुमार ने बताया कि हेल्थ चेकअप कैंपों में औसतन 300 से अधिक मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। इनमें पैरों में इचिंग, सर्दी, खांसी, बुखार और त्वचा से जुड़ी अन्य समस्याओं के मरीज अधिक हैं। उन्होंने बताया कि कैंपों में पर्याप्त मात्रा में दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि मरीजों को जरूरत के अनुसार तत्काल दवा दी जा सके। सांप के काटने की स्थिति में तत्काल इलाज के लिए एंटी-स्नेक वेनम भी सुरक्षित रखा गया है। डॉ. अमित कुमार ने बताया कि अब बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी कम होने लगा है। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य विभाग की टीम बाढ़ प्रभावित गांवों में डोर-टू-डोर जाकर लोगों के स्वास्थ्य की जांच करेगी।  

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