दरभंगा में पांडुलिपियों की खोज और संरक्षण को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। शहर के समृद्ध ऐतिहासिक और पौराणिक अतीत को नए सिरे से सामने लाना शुरू कर दिया है। जिला पदाधिकारी कौशल कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पांडुलिपियों की खोज और सत्यापन काम में तेजी लाई जाए और इसकी नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि पांडुलिपियों का संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आम नागरिकों की भी सहभागिता जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अपने घरों में सुरक्षित 75 साल से अधिक पुरानी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक पांडुलिपियों को “ज्ञान भारतम्” पोर्टल पर साझा करें, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने अतीत को बेहतर ढंग से समझ सकें। 24 हजार से अधिक पांडुलिपियों का सत्यापन जिले में अब तक 24,139 से अधिक पांडुलिपियों का सत्यापन किया जा चुका है। “ज्ञान भारतम् मिशन” के तहत चल रहे इस अभियान में सरकारी, गैर-सरकारी और निजी संस्थानों में संरक्षित पांडुलिपियों का व्यापक सर्वेक्षण किया जा रहा है। राघोपुर ड्योढ़ी में मिली दुर्लभ धरोहर मंगलवार को जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी चंदन कुमार ने राघोपुर ड्योढ़ी स्थित हरिनंदन सिंह मेमोरियल ट्रस्ट में संरक्षित पांडुलिपियों को देखा। इस दौरान ट्रस्ट के संचालक रामदत्त सिंह (अधिवक्ता) ने इनके ऐतिहासिक महत्व और वर्तमान स्थिति की जानकारी दी। कई दुर्लभ और प्राचीन पांडुलिपियां सामने आईं, जिनमें लगभग 400 साल पुरानी ‘अचारादर्श’, 500 साल पुरानी ‘काव्य प्रकाशिका’ और ‘अमरकोष’ पर टीका सहित ताड़पत्र पर लिखित ग्रंथ शामिल हैं। इन अमूल्य दस्तावेजों से दरभंगा के इतिहास और पौराणिक परंपराओं को समझने का नया दृष्टिकोण मिल रहा है। संदूकों में छिपा है इतिहास अधिकारियों ने बताया कि अक्सर लोगों के घरों में पुराने कागजात और पांडुलिपियां साल तक संदूकों में पड़ी रहती हैं, जिनका महत्व समझा नहीं जाता। जबकि ये दस्तावेज इतिहास के महत्वपूर्ण प्रमाण हो सकते हैं और कई अपुष्ट तथ्यों को प्रमाणित करने में सहायक बनते हैं। डिजिटाइजेशन से शोध को मिलेगा बल भारत सरकार और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से संचालित इस मिशन के तहत 75 साल से अधिक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियों का डिजिटाइजेशन, संरक्षण और सर्वेक्षण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य शोधार्थियों को मूल ग्रंथों तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना है। जिलाधिकारी के नेतृत्व में यह अभियान जिले में प्रभावी रूप से चलाया जा रहा है, जिससे दरभंगा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हो रही है। दरभंगा में पांडुलिपियों की खोज और संरक्षण को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। शहर के समृद्ध ऐतिहासिक और पौराणिक अतीत को नए सिरे से सामने लाना शुरू कर दिया है। जिला पदाधिकारी कौशल कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पांडुलिपियों की खोज और सत्यापन काम में तेजी लाई जाए और इसकी नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि पांडुलिपियों का संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आम नागरिकों की भी सहभागिता जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अपने घरों में सुरक्षित 75 साल से अधिक पुरानी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक पांडुलिपियों को “ज्ञान भारतम्” पोर्टल पर साझा करें, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने अतीत को बेहतर ढंग से समझ सकें। 24 हजार से अधिक पांडुलिपियों का सत्यापन जिले में अब तक 24,139 से अधिक पांडुलिपियों का सत्यापन किया जा चुका है। “ज्ञान भारतम् मिशन” के तहत चल रहे इस अभियान में सरकारी, गैर-सरकारी और निजी संस्थानों में संरक्षित पांडुलिपियों का व्यापक सर्वेक्षण किया जा रहा है। राघोपुर ड्योढ़ी में मिली दुर्लभ धरोहर मंगलवार को जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी चंदन कुमार ने राघोपुर ड्योढ़ी स्थित हरिनंदन सिंह मेमोरियल ट्रस्ट में संरक्षित पांडुलिपियों को देखा। इस दौरान ट्रस्ट के संचालक रामदत्त सिंह (अधिवक्ता) ने इनके ऐतिहासिक महत्व और वर्तमान स्थिति की जानकारी दी। कई दुर्लभ और प्राचीन पांडुलिपियां सामने आईं, जिनमें लगभग 400 साल पुरानी ‘अचारादर्श’, 500 साल पुरानी ‘काव्य प्रकाशिका’ और ‘अमरकोष’ पर टीका सहित ताड़पत्र पर लिखित ग्रंथ शामिल हैं। इन अमूल्य दस्तावेजों से दरभंगा के इतिहास और पौराणिक परंपराओं को समझने का नया दृष्टिकोण मिल रहा है। संदूकों में छिपा है इतिहास अधिकारियों ने बताया कि अक्सर लोगों के घरों में पुराने कागजात और पांडुलिपियां साल तक संदूकों में पड़ी रहती हैं, जिनका महत्व समझा नहीं जाता। जबकि ये दस्तावेज इतिहास के महत्वपूर्ण प्रमाण हो सकते हैं और कई अपुष्ट तथ्यों को प्रमाणित करने में सहायक बनते हैं। डिजिटाइजेशन से शोध को मिलेगा बल भारत सरकार और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से संचालित इस मिशन के तहत 75 साल से अधिक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियों का डिजिटाइजेशन, संरक्षण और सर्वेक्षण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य शोधार्थियों को मूल ग्रंथों तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना है। जिलाधिकारी के नेतृत्व में यह अभियान जिले में प्रभावी रूप से चलाया जा रहा है, जिससे दरभंगा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हो रही है।


