संतकबीरनगर के जिलाधिकारी आलोक कुमार ने मंगलवार को विकास खंड नाथनगर के कठइचा और पौली ब्लॉक के मझौरा स्थित गो-आश्रय स्थलों का औचक निरीक्षण किया। मझौरा गो-आश्रय स्थल में गंभीर अनियमितताएं और गोवंशों की देखरेख में लापरवाही मिलने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। निरीक्षण के दौरान वहां तीन गोवंश मृत पाए गए, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए। मझौरा गो-आश्रय स्थल पहुंचने पर गौशाला बंद मिली, जबकि पांच केयरटेकर कार्यरत थे। निरीक्षण की सूचना मिलने पर एक केयरटेकर मौके पर पहुंचा और गौशाला का ताला खोला। जिलाधिकारी ने इस पर नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया कि कम से कम दो केयरटेकर हर समय गो-आश्रय स्थल पर मौजूद रहें। यहां कुल 199 गोवंश संरक्षित थे, जिनमें से तीन मृत पाए गए। अधिकारियों ने बताया कि इनकी मृत्यु उसी दिन हुई थी। जिलाधिकारी ने तत्काल मृत गोवंशों का अंतिम संस्कार कराने के निर्देश दिए।जिलाधिकारी ने हरे चारे की फसल को बाहरी पशुओं से बचाने और गोवंशों को संतुलित आहार उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने व्यवस्थाओं में गंभीर खामियां पाए जाने पर खंड विकास अधिकारी पौली, ग्राम पंचायत सचिव मझौरा, एडीओ पंचायत तथा संबंधित पशु चिकित्सा अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त, नोडल अधिकारी एवं डीसी एनआरएलएम से स्पष्टीकरण मांगते हुए प्रतिकूल प्रविष्टि देने को कहा गया। ग्राम पंचायत प्रशासक के निलंबन की कार्रवाई के लिए भी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया। इससे पहले, जिलाधिकारी आलोक कुमार ने कठइचा गो-आश्रय स्थल का निरीक्षण किया। यहां 73 गोवंश संरक्षित मिले और सभी की ईयर टैगिंग की गई थी। निरीक्षण में गोवंशों के लिए चारा, दाना और पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था पाई गई। दो केयरटेकरों में से एक मौके पर उपस्थित था, जबकि दूसरे के पारिवारिक कारणों से अनुपस्थित होने की जानकारी दी गई। जिलाधिकारी ने टीन शेड के आसपास मिट्टी भरवाकर खड़ंजा लगाने के निर्देश दिए, ताकि बरसात के मौसम में गोवंशों को परेशानी न हो।


