इंदौर के मानपुर (जामनिया गांव) में जनजातीय बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए शुरू हुआ ‘एकलव्य आदर्श गुरुकुलम’ प्रोजेक्ट सरकारी लेटलतीफी और अफसरों की अदूरदर्शिता का शिकार हो गया है। केंद्र सरकार की फंडिंग से साल 2014 में शुरू हुए इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में 12 साल और 27.48 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। अब तक एक भी आदिवासी बच्चे को इसका लाभ नहीं मिल सका है। जिस प्रोजेक्ट को महज 24 महीने (दो साल) में बनकर तैयार होना था, वह विभागों की मनमानी और बार-बार डिजाइन बदलने की उलझन में फंसकर खंडहर बनने की कगार पर है। अब केंद्र सरकार ने राज्य के विभागों द्वारा तैयार बढ़ा हुआ बजट देने से साफ इनकार कर दिया है। दीवार पर काई, जालियों में जंग लगी भास्कर टीम मौके पर पहुंची तो पता चला पहाड़ी पर बने इन भवनों तक जाने वाली सड़क इतनी संकरी घाटी में है कि टू-व्हीलर से जाना भी मुश्किल है। आधे-अधूरे ढांचे की बाहरी दीवारों पर काई और सीलन है, प्लास्टर उखड़ रहा है। दरवाजे टूटे हुए हैं और खिड़कियों की जालियों में जंग लग चुकी है। जिम्मेदारों के तर्क डिटेल प्रोजेक्ट रिपार्ट में बाद में हुए संशोधन के कारण ही प्रोजेक्ट में देरी हुई थी। – अजय यादव (पूर्व ईई, पीआईयू – वर्तमान में उज्जैन पदस्थ) जून 2026 में पीएस का पत्र आया था कि केंद्र से रिवाइज फंड की मंजूरी नहीं मिली है, इस कारण काम रोका गया है। विभाग से आगे जो निर्देश मिलेंगे, उसके अनुसार काम करेंगे। – अभिषेक कोष्ठा (ईई, पीडब्ल्यूडी पीआईयू) ऐसे बर्बाद होती है जनता की गाढ़ी कमाई: 24 माह में पूरा होना था, 12 साल में भी अधूरा, अफसर ने बीच में बदली डिजाइन 2014 से 2018 प्रस्ताव और जमीन आवंटन
मानपुर में 490 सीट का दो मंजिला विद्यालय, 280-280 सीट के बालक-बालिका छात्रावास (कुल 560 सीट) व शिक्षक आवास के लिए 26.89 करोड़ का प्रस्ताव बना। 2016 में आदिम जाति कल्याण विभाग ने 28 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति दी। 2 जनवरी 2018 को जमीन आवंटित हुई और 26 अप्रैल 2018 को 24 महीने में काम पूरा करने का अनुबंध हुआ। 2019 में पूरी डिजाइन ही बदल दी गई
निर्माण शुरू ही हुआ था कि 9 जनवरी 2019 को जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त ने 490 सीट को बढ़ाकर 720 करने और दो मंजिला होस्टल को चार मंजिला बनाने का नया पत्र जारी कर दिया। इससे बजट 42 करोड़ रुपए पहुंच गया और प्रोजेक्ट अटक गया। तब से लेकर अब तक काम अटका हुआ है। इमारत जर्जर होने लगी है। 2023- 2024 पुराने प्लान पर लौटे, नई DPR बनाई
चार साल की देरी के बाद 2023 में विभाग ने फिर से पुराने 490 सीट वाले प्लान पर लौटने का फैसला किया, लेकिन इसे मंजूरी नहीं मिली और ठेकेदार का अनुबंध निरस्त हो गया। 2024 में फिर नई संशोधित DPR बनी, जिसकी लागत बढ़कर 52.66 करोड़ रुपए हो गई। निर्माण अभी भी अधूरा है, एक बच्चा भी भर्ती नहीं हो पाया है।


