जमुई-सोनो मार्ग पर स्थित नरियाना और मांगोबंदर के दो प्रमुख पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। प्रशासन ने बैरिकेडिंग लगाकर सभी छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन रोक दिया है। वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण आसपास के कई दर्जन गांवों के निवासियों के साथ-साथ झारखंड और पश्चिम बंगाल जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब बाहरी वाहनों को जमुई मुख्यालय, गिद्धौर, झाझा और सोनो होते हुए चकाई मार्ग से गुजरना पड़ रहा है। इस वैकल्पिक मार्ग से यात्रियों को लगभग 20 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है, जिससे यात्रा का समय बढ़ गया है। पुल बंद होने के कारण जमुई शहर, सिकंदरा, खैरा, गिद्धौर, झाझा और सोनो में लगातार जाम की समस्या बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्य बाजारों में भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ने से घंटों तक जाम लगा रहता है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। 3 प्रमुख मार्गों का होता था उपयोग जिले में पहले तीन प्रमुख मार्गों का उपयोग होता था। पहला मुख्य मार्ग जमुई-गिद्धौर-झाझा-सोनो-चकाई होकर झारखंड और पश्चिम बंगाल तक जाता है। दूसरा शॉर्टकट मार्ग जमुई-खैरा-नरियाना-मांगोबंदर होकर सीधे सोनो निकलता था, जिससे 20 से 30 किलोमीटर की दूरी कम हो जाती थी। तीसरा मार्ग जमुई से गरसंडा-दाबिल होकर गिद्धौर तक जाता था, लेकिन वर्तमान में उस सड़क की स्थिति बेहद खराब है और जगह-जगह गड्ढे बने हुए हैं। 2 साल में ही पुल हुआ क्षतिग्रस्त स्थानीय लोगों के अनुसार, लगभग दस वर्ष पहले बने ये पुल एक-दो साल में ही क्षतिग्रस्त हो गए थे। लंबे समय से दोनों पुल जर्जर हालत में पड़े थे। दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ने पर प्रशासन ने हाल ही में इन पुलों को पूरी तरह बंद कर दिया, जिसके बाद जमुई से सोनो जाने वाला छोटा बायपास मार्ग पूरी तरह ठप हो गया है। दो वैकल्पिक रास्तों के खराब या बंद होने से ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कई गांवों के लोग अब पैदल आवागमन करने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर चुनाव से पहले नेताओं द्वारा पुलों की मरम्मत या नए निर्माण का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। हाल ही में नरियाना पुल के क्षतिग्रस्त होने की सूचना पर सांसद अरुण भारती ने स्थल निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण बड़ी दुर्घटना की आशंका थी, इसलिए प्रशासन ने बैरिकेडिंग की है। सांसद ने यह भी जानकारी दी कि 4-5 जून तक कॉजवे (अस्थायी पुल) निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है, जिससे लोगों को अस्थायी राहत मिल सकेगी। जमुई-सोनो मार्ग पर स्थित नरियाना और मांगोबंदर के दो प्रमुख पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। प्रशासन ने बैरिकेडिंग लगाकर सभी छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन रोक दिया है। वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण आसपास के कई दर्जन गांवों के निवासियों के साथ-साथ झारखंड और पश्चिम बंगाल जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब बाहरी वाहनों को जमुई मुख्यालय, गिद्धौर, झाझा और सोनो होते हुए चकाई मार्ग से गुजरना पड़ रहा है। इस वैकल्पिक मार्ग से यात्रियों को लगभग 20 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है, जिससे यात्रा का समय बढ़ गया है। पुल बंद होने के कारण जमुई शहर, सिकंदरा, खैरा, गिद्धौर, झाझा और सोनो में लगातार जाम की समस्या बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्य बाजारों में भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ने से घंटों तक जाम लगा रहता है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। 3 प्रमुख मार्गों का होता था उपयोग जिले में पहले तीन प्रमुख मार्गों का उपयोग होता था। पहला मुख्य मार्ग जमुई-गिद्धौर-झाझा-सोनो-चकाई होकर झारखंड और पश्चिम बंगाल तक जाता है। दूसरा शॉर्टकट मार्ग जमुई-खैरा-नरियाना-मांगोबंदर होकर सीधे सोनो निकलता था, जिससे 20 से 30 किलोमीटर की दूरी कम हो जाती थी। तीसरा मार्ग जमुई से गरसंडा-दाबिल होकर गिद्धौर तक जाता था, लेकिन वर्तमान में उस सड़क की स्थिति बेहद खराब है और जगह-जगह गड्ढे बने हुए हैं। 2 साल में ही पुल हुआ क्षतिग्रस्त स्थानीय लोगों के अनुसार, लगभग दस वर्ष पहले बने ये पुल एक-दो साल में ही क्षतिग्रस्त हो गए थे। लंबे समय से दोनों पुल जर्जर हालत में पड़े थे। दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ने पर प्रशासन ने हाल ही में इन पुलों को पूरी तरह बंद कर दिया, जिसके बाद जमुई से सोनो जाने वाला छोटा बायपास मार्ग पूरी तरह ठप हो गया है। दो वैकल्पिक रास्तों के खराब या बंद होने से ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कई गांवों के लोग अब पैदल आवागमन करने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर चुनाव से पहले नेताओं द्वारा पुलों की मरम्मत या नए निर्माण का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। हाल ही में नरियाना पुल के क्षतिग्रस्त होने की सूचना पर सांसद अरुण भारती ने स्थल निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण बड़ी दुर्घटना की आशंका थी, इसलिए प्रशासन ने बैरिकेडिंग की है। सांसद ने यह भी जानकारी दी कि 4-5 जून तक कॉजवे (अस्थायी पुल) निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है, जिससे लोगों को अस्थायी राहत मिल सकेगी।


