दो आरोपी फरार, धोखाधड़ी का शिकार हुए लोगों ने महिला को पकड़कर किया पुलिस के हवाले
आणंद. शहर में 13 से अधिक लोगों को विदेश भेजने का लालच देकर वीजा प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 79.80 लाख रुपए की ठगी के मामले में तीन लोगों पर आरोप लगाया गया। इस मामले में आरोपी हार्दिक शाह, साझेदार नंदकुमार उकाणी फरार हो गए। धोखाधड़ी का शिकार हुए लोगों ने महिला आरोपी अंकिता शाह को पकड़कर पुलिस के हवाले किया। उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। शिकायत के आधार पर आणंद टाउन पुलिस ने मामला दर्ज किया।
जानकारी के अनुसार, पेटलाद के सुणाव गांव की मूल निवासी और वर्तमान में पेटलाद कॉलेज चौकड़ी में रहने वाली कुंदनबेन पटेल ने नवंबर 2025 में सोशल मीडिया के माध्यम से आणंद के नवलीवाला बिल्डिंग में स्थित कृष्णा ओवरसीज कंसल्टेंसी के मालिक तथा आणंद कृष्णा हाउसिंग सोसाइटी में रहने वाले हार्दिक शाह, पत्नी अंकिता शाह के बारे में जानकारी प्राप्त की। दंपती लोगों को विदेश भेजने का काम करते थे। इसके बाद कुंदनबेन 25 नवंबर 2025 को पति के साथ कंसल्टेंसी के कार्यालय पहुंचीं और दंपती से विदेश जाने के संबंध में बातचीत की।
इस दौरान दंपती ने उन्हें यूरोप महाद्वीप के सर्बिया जाने के लिए दस्तावेजों के चार्ज के रूप में दो लोगों के लिए 1.20 लाख रुपए जमा कराने को कहा, दस्तावेजों की प्रतियां भी मांगीं और कहा कि प्रक्रिया पूरी करने के बाद आइडी और पासवर्ड उपलब्ध कराएंगे। कुंदनबेन ने 1.20 लाख रुपए ऑनलाइन जमा कराए। उन्हें बताया गया कि 10 दिन बाद आइडी और पासवर्ड मिलेंगे। 10 दिन बाद हार्दिक के कार्यालय में काम करने वाली प्रीती मकवाणा ने फोन कर आइडी और पासवर्ड लेने के लिए कार्यालय बुलाया। वहां पहुंचने पर दंपती ने कहा कि 3 लाख रुपए जमा करने पर वीजा प्रक्रिया शुरू की जाएगी। कुंदनबेन ने 1 लाख रुपए जमा किए, 2 लाख रुपए बैंक ट्रांसफर के माध्यम से जमा किए।
करीब 15 दिन बाद फोन करने पर कार्यालय के स्टाफ में काम करने वाली श्वेता ने कहा कि जिस कंपनी में उन्हें काम करना है, उस कंपनी का जॉइनिंग लेटर दो दिन में आएगा। 2 दिन बाद कार्यालय पहुंचने पर अंकिता ने बताया कि उनका जॉइनिंग लेटर आया है। इसमें ब्राइवेक्स इंटरनेशनल बेलग्रेड कंपनी द्वारा उन्हें प्रति माह 81,900 रुपए वेतन देने की बात कही गई थी। एग्रीमेंट की प्रति भी दी और बताया कि 3 महीने में विदेश जाने की पूरी प्रक्रिया होगी।
इसके बाद रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुआ। करीब दो महीने बाद संपर्क करने पर हार्दिक ने बताया कि युद्ध के कारण प्रक्रिया में 2-3 महीने की देरी होगी। जून 2026 में कार्यालय पहुंचने पर आरोपियों ने बताया कि युद्ध चलने के कारण सर्बिया जाने का काम संभव नहीं है। अब यूके का विजिटर वीजा करवाना पड़ेगा। इसके लिए करीब 14 लाख रुपए खर्च होंगे। इस पर कुंदनबेन ने सहमति जताई। उनकी सलाह पर 1 लाख रुपए ऑनलाइन किए।
करीब एक महीने बाद भी ई-वीजा नहीं आने पर कार्यालय पहुंचने पर हार्दिक की सलाह पर 2.50 लाख रुपए ऑनलाइन जमा कर दिए और बाकी 50 हजार रुपए तारीख आने के बाद देने की बात कही। इसके बाद आरोपी बहाने बनाने लगा। संदेह होने पर रुपए वापस मांगने शुरू किए गए। इस पर उन्हें 10 दिन इंतजार करने के लिए कहा गया। इसके बाद अपने स्तर पर जांच करने पर पता चला कि आरोपियों ने करीब 13 अन्य लोगों से भी विदेश भेजने के नाम पर प्रोसेसिंग फीस के बहाने बड़ी रकम वसूल की। ई-वीजा भी नकली होने की जानकारी सामने आई।

