औरंगाबाद में सुरक्षित बचपन अभियान के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने कई स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम किए। विद्यार्थियों को उनके अधिकारों, सुरक्षा, कानूनी मदद और साइबर अपराधों के बारे में बताया गया। कार्यक्रमों में बाल शोषण, बाल श्रम, बाल विवाह, ऑनलाइन उत्पीड़न और दूसरे संभावित खतरों से बचने की जानकारी दी गई। बच्चों के लिए सुरक्षित और भयमुक्त माहौल के महत्व पर भी बात हुई। जी.डी. गोयनका स्कूल, औरंगाबाद में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव तान्या पटेल ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “बच्चों की सुरक्षा केवल जिम्मेदारी नहीं, हमारा नैतिक और सामाजिक संकल्प है। हर बच्चे को सुरक्षित माहौल में रहने, शिक्षा पाने, सम्मान पाने और अपने सपने पूरे करने का अधिकार है।” पटेल ने कहा कि बच्चों का बचपन भय, शोषण और असुरक्षा से मुक्त होना चाहिए। इसके लिए परिवार, स्कूल, समाज और संबंधित संस्थाओं को मिलकर जिम्मेदारी से काम करना होगा। उन्होंने कहा कि बाल शोषण, बाल श्रम, बाल विवाह और बच्चों के साथ शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न का उनके व्यक्तित्व और भविष्य पर गहरा असर पड़ता है। इन समस्याओं को रोकने के लिए कानून के साथ समाज के लोगों का जागरूक और संवेदनशील होना भी जरूरी है। पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि अनुचित व्यवहार या शोषण की स्थिति में चुप न रहें। इसकी जानकारी अभिभावक, शिक्षक या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को दें और जरूरत पड़ने पर संबंधित प्राधिकार से मदद लें। उन्होंने कहा कि बच्चों को उनके अधिकारों और अपनी सुरक्षा के बारे में जानकारी देना सुरक्षित बचपन की दिशा में जरूरी कदम है। स्कूल बच्चों के विकास का प्रमुख केंद्र हैं, इसलिए शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका भी अहम है। बच्चों की बात ध्यान से सुनना और संभावित खतरे को समय रहते पहचानना जरूरी है। औरंगाबाद में सुरक्षित बचपन अभियान के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने कई स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम किए। विद्यार्थियों को उनके अधिकारों, सुरक्षा, कानूनी मदद और साइबर अपराधों के बारे में बताया गया। कार्यक्रमों में बाल शोषण, बाल श्रम, बाल विवाह, ऑनलाइन उत्पीड़न और दूसरे संभावित खतरों से बचने की जानकारी दी गई। बच्चों के लिए सुरक्षित और भयमुक्त माहौल के महत्व पर भी बात हुई। जी.डी. गोयनका स्कूल, औरंगाबाद में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव तान्या पटेल ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “बच्चों की सुरक्षा केवल जिम्मेदारी नहीं, हमारा नैतिक और सामाजिक संकल्प है। हर बच्चे को सुरक्षित माहौल में रहने, शिक्षा पाने, सम्मान पाने और अपने सपने पूरे करने का अधिकार है।” पटेल ने कहा कि बच्चों का बचपन भय, शोषण और असुरक्षा से मुक्त होना चाहिए। इसके लिए परिवार, स्कूल, समाज और संबंधित संस्थाओं को मिलकर जिम्मेदारी से काम करना होगा। उन्होंने कहा कि बाल शोषण, बाल श्रम, बाल विवाह और बच्चों के साथ शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न का उनके व्यक्तित्व और भविष्य पर गहरा असर पड़ता है। इन समस्याओं को रोकने के लिए कानून के साथ समाज के लोगों का जागरूक और संवेदनशील होना भी जरूरी है। पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि अनुचित व्यवहार या शोषण की स्थिति में चुप न रहें। इसकी जानकारी अभिभावक, शिक्षक या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को दें और जरूरत पड़ने पर संबंधित प्राधिकार से मदद लें। उन्होंने कहा कि बच्चों को उनके अधिकारों और अपनी सुरक्षा के बारे में जानकारी देना सुरक्षित बचपन की दिशा में जरूरी कदम है। स्कूल बच्चों के विकास का प्रमुख केंद्र हैं, इसलिए शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका भी अहम है। बच्चों की बात ध्यान से सुनना और संभावित खतरे को समय रहते पहचानना जरूरी है।

