बिहार भूदान यज्ञ समिति के कामकाज, जमीन के रिकॉर्ड और कर्मचारियों की व्यवस्था को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने कई अहम निर्देश दिए हैं। समिति के केंद्रीय और जिला कार्यालयों में रखे जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी। दान पत्र, संपुष्टि पंजी और वितरण पंजी को स्कैन कर डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा। इसके साथ ही भूदान की जमीन का एरियल मैप तैयार करने और जमीन वितरण की जांच से जुड़ी रिपोर्ट पर भी कार्रवाई की जाएगी। ये निर्देश आज राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में दिए गए। बैठक में बिहार भूदान यज्ञ समिति के कामकाज की समीक्षा की गई। इस दौरान कर्मचारियों के मानदेय, कार्यालय खर्च, पुराने रिकॉर्ड, जमीन वितरण और लंबित न्यायिक मामलों पर भी चर्चा हुई। 2018-19 से 2024-25 तक के अनुदान का हुआ इस्तेमाल बैठक में समिति को वित्तीय वर्ष 2018-19, 2019-20, 2020-21, 2022-23 और 2024-25 में मिले सरकारी अनुदान के इस्तेमाल की जानकारी दी गई। बताया गया कि इस राशि का उपयोग कर्मचारियों के मानदेय और वेतन, अधिकारियों के यात्रा खर्च, कार्यालय के खर्च और अन्य जरूरी कामों के लिए किया गया। खर्च की उपयोगिता का प्रमाण पत्र भी विभाग को उपलब्ध कराया गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 का अनुदान मिलने के बाद भी कुछ कारणों से कर्मचारियों के बकाया मानदेय और वेतन का भुगतान नहीं हो पाया है। बैठक में इस मुद्दे पर भी चर्चा की गई। समिति के कामकाज को लेकर पहले भी दिए गए थे निर्देश राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से 2 जुलाई 2024 को आयोजित बैठक में समिति के कामकाज से जुड़े 24 बिंदुओं पर कार्रवाई करने का सुझाव दिया गया था। 11 सितंबर 2026 के विभागीय आदेश के माध्यम से बिहार भूदान यज्ञ समिति के कर्तव्य, शक्तियों और कार्यों को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में शामिल किया गया। बैठक में इन निर्देशों के आधार पर समीक्षा करने और जरूरी सुधारों की कार्रवाई करने का फैसला लिया गया। साथ ही बिहार भूदान यज्ञ अधिनियम, 1954 और बिहार भूदान यज्ञ नियमावली, 1955 में आवश्यक संशोधन की कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। छह जोन में बंटेगी जांच की जिम्मेदारी बिहार भूदान यज्ञ समिति के क्षेत्रीय कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। इसके लिए पूरे बिहार को छह जोन में बांटने का निर्देश दिया गया है। प्रत्येक जोन में अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में एक टीम बनाई जाएगी। इस टीम में संबंधित अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। जिला स्तर पर कुल छह टीमें गठित की जाएंगी। निरीक्षण से पहले संबंधित टीम स्थानीय पुलिस की मदद से जिला भूदान कार्यालय के सभी रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच करेगी। दान पत्र, संपुष्टि पंजी और वितरण पंजी को जब्त कर जिला अभिलेखागार में सुरक्षित रखा जाएगा। ये दस्तावेज तब तक वहां रखे जाएंगे, जब तक उनकी स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन का काम पूरा नहीं हो जाता। संबंधित अधिकारियों को इस कार्रवाई की जानकारी पत्र के माध्यम से देने का निर्देश दिया गया है। पुराने दस्तावेजों को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा समिति के केंद्रीय और जिला भूदान कार्यालयों में रखे सभी अभिलेखों और जरूरी दस्तावेजों की स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन किया जाना है। इसका उद्देश्य पुराने रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना और जरूरत पड़ने पर उन्हें आसानी से उपलब्ध कराना है। बैठक में बताया गया कि विभागीय अभिलेखों की स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन के लिए टेंडर की समय-सीमा बढ़ाने की जरूरत होगी। इसके लिए जरूरी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा भूदान में प्राप्त वैसी जमीन, जो संपुष्ट है, उसकी पहचान कर एरियल मैप तैयार किया जाएगा। इससे जमीन का रिकॉर्ड तैयार करने और उसकी पहचान करने में मदद मिलेगी। 60 साल से अधिक उम्र वाले कर्मचारियों को हटाने का सुझाव बैठक में भूदान यज्ञ समिति के केंद्रीय और जिला कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों की उम्र और नियुक्ति से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई। निर्देश दिया गया कि 60 साल से अधिक उम्र वाले कर्मचारियों और ऐसे कर्मचारियों, जिन्होंने 18 साल से कम उम्र में समिति में काम करना शुरू किया था, उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाने की कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही समिति में काम कर रहे सभी कर्मचारियों के सेवा विस्तार पर पूरी तरह रोक लगाने का निर्देश दिया गया है। भूदान की जमीन के पर्चे की होगी जांच बैठक में भूदान यज्ञ समिति में कार्यरत या सेवानिवृत्त ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया गया, जिन्होंने खुद या अपने संबंधित लोगों के नाम पर भूदान की जमीन का पर्चा प्राप्त किया है। ऐसे पर्चों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई करने को कहा गया है। इस निर्देश का उद्देश्य भूदान की जमीन से जुड़े ऐसे मामलों की जांच करना है, जिनमें समिति के कर्मचारियों या उनके संबंधित लोगों के नाम पर जमीन का पर्चा जारी किया गया है। जमीन वितरण की जांच रिपोर्ट पांच खंडों में तैयार होगी भूदान भूमि वितरण जांच आयोग की ओर से सौंपी गई जांच रिपोर्ट को पांच खंडों में बांटकर उसकी पांच प्रतियां तैयार करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही आयोग की रिपोर्ट का अध्ययन कर उसमें दिए गए महत्वपूर्ण निष्कर्षों और सुझावों की बिंदुवार सूची तैयार की जाएगी। इस सूची को विभागीय मंत्री के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। यह जिम्मेदारी सर्वेक्षण कार्यालय के उपनिदेशक को दी गई है। लंबित न्यायिक मामलों का जल्द होगा निपटारा बैठक में भूदान की जमीन से जुड़े सभी लंबित न्यायिक मामलों पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को इन मामलों का जल्द से जल्द निपटारा करने के लिए जरूरी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा प्रत्येक जिला भूदान कार्यालय के जिला कार्यालय प्रभारी, अपर समाहर्ता और केंद्रीय भूदान कार्यालय के अधिकारियों के बीच बैठक आयोजित करने के लिए पत्र जारी करने को कहा गया। इन बैठकों में कार्यालयों की समस्याओं और कामकाज से जुड़ी जानकारी लेकर उनके समाधान का प्रयास किया जाएगा। बिहार भूदान यज्ञ समिति के कामकाज, जमीन के रिकॉर्ड और कर्मचारियों की व्यवस्था को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने कई अहम निर्देश दिए हैं। समिति के केंद्रीय और जिला कार्यालयों में रखे जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी। दान पत्र, संपुष्टि पंजी और वितरण पंजी को स्कैन कर डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा। इसके साथ ही भूदान की जमीन का एरियल मैप तैयार करने और जमीन वितरण की जांच से जुड़ी रिपोर्ट पर भी कार्रवाई की जाएगी। ये निर्देश आज राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में दिए गए। बैठक में बिहार भूदान यज्ञ समिति के कामकाज की समीक्षा की गई। इस दौरान कर्मचारियों के मानदेय, कार्यालय खर्च, पुराने रिकॉर्ड, जमीन वितरण और लंबित न्यायिक मामलों पर भी चर्चा हुई। 2018-19 से 2024-25 तक के अनुदान का हुआ इस्तेमाल बैठक में समिति को वित्तीय वर्ष 2018-19, 2019-20, 2020-21, 2022-23 और 2024-25 में मिले सरकारी अनुदान के इस्तेमाल की जानकारी दी गई। बताया गया कि इस राशि का उपयोग कर्मचारियों के मानदेय और वेतन, अधिकारियों के यात्रा खर्च, कार्यालय के खर्च और अन्य जरूरी कामों के लिए किया गया। खर्च की उपयोगिता का प्रमाण पत्र भी विभाग को उपलब्ध कराया गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 का अनुदान मिलने के बाद भी कुछ कारणों से कर्मचारियों के बकाया मानदेय और वेतन का भुगतान नहीं हो पाया है। बैठक में इस मुद्दे पर भी चर्चा की गई। समिति के कामकाज को लेकर पहले भी दिए गए थे निर्देश राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से 2 जुलाई 2024 को आयोजित बैठक में समिति के कामकाज से जुड़े 24 बिंदुओं पर कार्रवाई करने का सुझाव दिया गया था। 11 सितंबर 2026 के विभागीय आदेश के माध्यम से बिहार भूदान यज्ञ समिति के कर्तव्य, शक्तियों और कार्यों को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में शामिल किया गया। बैठक में इन निर्देशों के आधार पर समीक्षा करने और जरूरी सुधारों की कार्रवाई करने का फैसला लिया गया। साथ ही बिहार भूदान यज्ञ अधिनियम, 1954 और बिहार भूदान यज्ञ नियमावली, 1955 में आवश्यक संशोधन की कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। छह जोन में बंटेगी जांच की जिम्मेदारी बिहार भूदान यज्ञ समिति के क्षेत्रीय कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। इसके लिए पूरे बिहार को छह जोन में बांटने का निर्देश दिया गया है। प्रत्येक जोन में अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में एक टीम बनाई जाएगी। इस टीम में संबंधित अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। जिला स्तर पर कुल छह टीमें गठित की जाएंगी। निरीक्षण से पहले संबंधित टीम स्थानीय पुलिस की मदद से जिला भूदान कार्यालय के सभी रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच करेगी। दान पत्र, संपुष्टि पंजी और वितरण पंजी को जब्त कर जिला अभिलेखागार में सुरक्षित रखा जाएगा। ये दस्तावेज तब तक वहां रखे जाएंगे, जब तक उनकी स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन का काम पूरा नहीं हो जाता। संबंधित अधिकारियों को इस कार्रवाई की जानकारी पत्र के माध्यम से देने का निर्देश दिया गया है। पुराने दस्तावेजों को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा समिति के केंद्रीय और जिला भूदान कार्यालयों में रखे सभी अभिलेखों और जरूरी दस्तावेजों की स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन किया जाना है। इसका उद्देश्य पुराने रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना और जरूरत पड़ने पर उन्हें आसानी से उपलब्ध कराना है। बैठक में बताया गया कि विभागीय अभिलेखों की स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन के लिए टेंडर की समय-सीमा बढ़ाने की जरूरत होगी। इसके लिए जरूरी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा भूदान में प्राप्त वैसी जमीन, जो संपुष्ट है, उसकी पहचान कर एरियल मैप तैयार किया जाएगा। इससे जमीन का रिकॉर्ड तैयार करने और उसकी पहचान करने में मदद मिलेगी। 60 साल से अधिक उम्र वाले कर्मचारियों को हटाने का सुझाव बैठक में भूदान यज्ञ समिति के केंद्रीय और जिला कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों की उम्र और नियुक्ति से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई। निर्देश दिया गया कि 60 साल से अधिक उम्र वाले कर्मचारियों और ऐसे कर्मचारियों, जिन्होंने 18 साल से कम उम्र में समिति में काम करना शुरू किया था, उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाने की कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही समिति में काम कर रहे सभी कर्मचारियों के सेवा विस्तार पर पूरी तरह रोक लगाने का निर्देश दिया गया है। भूदान की जमीन के पर्चे की होगी जांच बैठक में भूदान यज्ञ समिति में कार्यरत या सेवानिवृत्त ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया गया, जिन्होंने खुद या अपने संबंधित लोगों के नाम पर भूदान की जमीन का पर्चा प्राप्त किया है। ऐसे पर्चों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई करने को कहा गया है। इस निर्देश का उद्देश्य भूदान की जमीन से जुड़े ऐसे मामलों की जांच करना है, जिनमें समिति के कर्मचारियों या उनके संबंधित लोगों के नाम पर जमीन का पर्चा जारी किया गया है। जमीन वितरण की जांच रिपोर्ट पांच खंडों में तैयार होगी भूदान भूमि वितरण जांच आयोग की ओर से सौंपी गई जांच रिपोर्ट को पांच खंडों में बांटकर उसकी पांच प्रतियां तैयार करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही आयोग की रिपोर्ट का अध्ययन कर उसमें दिए गए महत्वपूर्ण निष्कर्षों और सुझावों की बिंदुवार सूची तैयार की जाएगी। इस सूची को विभागीय मंत्री के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। यह जिम्मेदारी सर्वेक्षण कार्यालय के उपनिदेशक को दी गई है। लंबित न्यायिक मामलों का जल्द होगा निपटारा बैठक में भूदान की जमीन से जुड़े सभी लंबित न्यायिक मामलों पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को इन मामलों का जल्द से जल्द निपटारा करने के लिए जरूरी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा प्रत्येक जिला भूदान कार्यालय के जिला कार्यालय प्रभारी, अपर समाहर्ता और केंद्रीय भूदान कार्यालय के अधिकारियों के बीच बैठक आयोजित करने के लिए पत्र जारी करने को कहा गया। इन बैठकों में कार्यालयों की समस्याओं और कामकाज से जुड़ी जानकारी लेकर उनके समाधान का प्रयास किया जाएगा।

