100 पंजाबी महिलाओं ने एक साथ की करवा चौथ पूजा:लाल जोड़े, सोलह शृंगार-हाथों में चूड़ियां, पति की लंबी उम्र के लिए की कामना

100 पंजाबी महिलाओं ने एक साथ की करवा चौथ पूजा:लाल जोड़े, सोलह शृंगार-हाथों में चूड़ियां, पति की लंबी उम्र के लिए की कामना

गयाजी के स्वराजपुरी रोड स्थित श्री आनंदपुर सत्संग भवन में गुरुवार को करवा चौथ कर रहीं महिलाएं जुटी। पंजाबी समाज की महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर पूजा-अर्चना की। लाल जोड़े, हाथों में चूड़ियां, सोलह शृंगार और चेहरे पर पर्व की खुशी दिखी। यहां करीब करीब 100 महिलाओं ने एक साथ करवा चौथ की पूजा की और पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की। 35 साल बाद भी नहीं बदला उत्साह करवा चौथ का व्रत महिलाओं के लिए सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि आस्था, प्रेम और विश्वास से जुड़ा पर्व है। समय के साथ जिंदगी की जिम्मेदारियां भले बढ़ गई हों लेकिन इस पर्व को लेकर उत्साह कम नहीं हुआ है। सीमा अरोड़ा इसका उदाहरण हैं। उन्होंने बताया कि उनकी शादी को 35 साल हो चुके हैं, लेकिन करवा चौथ को लेकर उत्साह आज भी पहले जैसा ही है। एक साल का पर्व समाप्त होते ही अगले साल की तैयारियों के बारे में सोचने लगती हैं। नई दुल्हनों के लिए पहला करवा चौथ खास गीतांजलि ने बताया कि मैं पिछले 11 साल से लगातार करवा चौथ का व्रत रख रही। नई दुल्हनों के लिए पहला करवा चौथ बेहद खास होता है। इस दिन की तैयारियों से लेकर पूजा की परंपराओं तक, हर चीज से भावनाएं जुड़ी होती हैं। यह त्योहार पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास के साथ परिवार की खुशियों का भी प्रतीक है। नवरात्र से शुरू हो जाती हैं तैयारियां करवा चौथ को लेकर महिलाओं में कई दिन पहले से उत्साह दिखने लगता है। नवरात्र शुरू होने के साथ ही चूड़ियां, छलनी, पूजा की थाली, नए कपड़े और शृंगार के सामान की खरीदारी शुरू हो जाती है। पर्व के दिन महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनकर पूजा करती हैं। गयाजी के स्वराजपुरी रोड स्थित श्री आनंदपुर सत्संग भवन में गुरुवार को करवा चौथ कर रहीं महिलाएं जुटी। पंजाबी समाज की महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर पूजा-अर्चना की। लाल जोड़े, हाथों में चूड़ियां, सोलह शृंगार और चेहरे पर पर्व की खुशी दिखी। यहां करीब करीब 100 महिलाओं ने एक साथ करवा चौथ की पूजा की और पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की। 35 साल बाद भी नहीं बदला उत्साह करवा चौथ का व्रत महिलाओं के लिए सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि आस्था, प्रेम और विश्वास से जुड़ा पर्व है। समय के साथ जिंदगी की जिम्मेदारियां भले बढ़ गई हों लेकिन इस पर्व को लेकर उत्साह कम नहीं हुआ है। सीमा अरोड़ा इसका उदाहरण हैं। उन्होंने बताया कि उनकी शादी को 35 साल हो चुके हैं, लेकिन करवा चौथ को लेकर उत्साह आज भी पहले जैसा ही है। एक साल का पर्व समाप्त होते ही अगले साल की तैयारियों के बारे में सोचने लगती हैं। नई दुल्हनों के लिए पहला करवा चौथ खास गीतांजलि ने बताया कि मैं पिछले 11 साल से लगातार करवा चौथ का व्रत रख रही। नई दुल्हनों के लिए पहला करवा चौथ बेहद खास होता है। इस दिन की तैयारियों से लेकर पूजा की परंपराओं तक, हर चीज से भावनाएं जुड़ी होती हैं। यह त्योहार पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास के साथ परिवार की खुशियों का भी प्रतीक है। नवरात्र से शुरू हो जाती हैं तैयारियां करवा चौथ को लेकर महिलाओं में कई दिन पहले से उत्साह दिखने लगता है। नवरात्र शुरू होने के साथ ही चूड़ियां, छलनी, पूजा की थाली, नए कपड़े और शृंगार के सामान की खरीदारी शुरू हो जाती है। पर्व के दिन महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनकर पूजा करती हैं।  

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