प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बिना परीक्षा लिए ही छात्रों की मार्कशीट में ग्रेड भरने का मामला सामने आया है। भास्कर की 15 दिन की पड़ताल में खुलासा हुआ कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत जोड़े गए नए विषयों की परीक्षा ही नहीं ली जा रही है। बीते सत्र 2024-25 में तीसरी और छठवीं की शारीरिक शिक्षा, कला शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा के पेपर नहीं हुए। इसके बावजूद मार्कशीट में ग्रेड भर दिए गए। मौजूदा सत्र 2025-26 में चौथी और 7वीं में यही गड़बड़ी सामने आई है। अगस्त-सितंबर में हुई तिमाही परीक्षा के टाइम-टेबल में इन्हें शामिल नहीं किया गया। दरअसल, एनईपी के तहत सत्र 2024-25 से तीसरी में शारीरिक, कला शिक्षा तथा 6वीं में इन दोनों के साथ व्यावसायिक शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया। सत्र 2025-26 में चौथी और 7वीं में भी ये विषय जोड़े गए। अगले सत्र में 5वीं और 8वीं में इन्हें लागू करने की तैयारी है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद ने इनका पाठ्यक्रम बनाया। पाठ्यपुस्तक निगम ने दो सत्रों में 66.96 लाख किताबें छापकर जिलों तक पहुंचाईं। मार्कशीट में इन विषयों के लिए अलग कॉलम भी बनाए गए। परीक्षा न होने के पीछे विभागीय तालमेल की कमी सामने आई है। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) यह मानकर चल रहा था कि अन्य विषयों की तरह नए विषयों की परीक्षा की व्यवस्था भी जिला स्तर पर होगी। दूसरी ओर, जिला शिक्षा अधिकारी डीपीआई से निर्देश मिलने का इंतजार करते रहे। 50 स्कूलों तक पहुंचा भास्कर शिक्षक बोले- कॉलम खाली नहीं छोड़ सकते थे भास्कर ने रायपुर, महासमुंद, गरियाबंद, बलौदाबाजार, जांजगीर, बस्तर के जगदलपुर, बीजापुर, जशपुर, नारायणपुर, दुर्ग और धमतरी सहित 11 जिलों के 50 स्कूलों में पड़ताल की। शिक्षकों से परीक्षा और ग्रेडिंग की प्रक्रिया पूछी गई। कई शिक्षकों ने बताया कि नए विषयों के नाम मार्कशीट में पहले से दर्ज थे। उनके सामने ग्रेड भरने के लिए कॉलम भी दिए गए थे। ऐसे में कॉलम खाली छोड़ने के बजाय ग्रेड भर दिए। कुछ शिक्षकों का तर्क था कि 8वीं तक किसी विद्यार्थी को फेल नहीं करना है, इसलिए इन विषयों की परीक्षा नहीं होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। हालांकि, इस पड़ताल से एक और गंभीर सवाल सामने आया है। जब स्कूलों में इन विषयों के शिक्षक ही नहीं हैं, तो बच्चों को पढ़ाया किसने और उनका मूल्यांकन किस आधार पर किया गया? विद्यार्थियों की मार्कशीट
भास्कर ने पिछले सत्र की मार्कशीट हासिल कीं। इनमें शारीरिक शिक्षा, कला शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा के लिए ग्रेडिंग के कॉलम दिए गए थे। शिक्षकों ने स्वीकार किया कि बिना लिखित परीक्षा लिए इनमें ग्रेड भर दिए गए। परीक्षा का टाइम-टेबल: डीपीआई ने सितंबर में हुई परीक्षा के लिए समय-सारणी जारी की। इसमें दूसरे विषयों की परीक्षा का उल्लेख था, लेकिन नए विषयों का नाम नहीं था। कुछ शिक्षकों ने इस गड़बड़ी की जानकारी भास्कर को दी। यहीं से पड़ताल शुरू हुई। एससीईआरटी की बैठक के दस्तावेज: राज्य शिक्षा स्थायी समिति की बैठक में नए विषयों को अनिवार्य पाठ्यक्रम का हिस्सा माना गया है। पाठ्यक्रम 80 शिक्षकों ने बनाया था। दस्तावेज में समिति के 8 सदस्यों के दस्तखत भी हैं। समझिए… 3 नए विषय, उनकी जमीनी हकीकत जिम्मेदारों का कहना एनईपी के तहत कला और योग को अन्य विषयों की तरह अनिवार्य पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। इनकी किताबें स्कूलों तक पहुंचाई गई हैं। परीक्षा और मूल्यांकन के आधार पर ही परिणाम तैयार होना चाहिए। यदि बिना मूल्यांकन ग्रेड देना है तो पाठ्यक्रम तैयार करने की इतनी मेहनत का क्या मतलब? -कौस्तुभ चटर्जी, उप संचालक एवं पाठ्यक्रम शाखा प्रभारी, एससीईआरटी जब विषय पाठ्यक्रम में शामिल हैं और किताबें भी उपलब्ध कराई गई हैं तो परीक्षा होनी चाहिए। जिला स्तर पर प्रश्नपत्र तैयार कर परीक्षा ली जा सकती है। शिक्षक अपनी कमियां छिपाने के लिए बहाने बना रहे हैं। इस संबंध में दोबारा स्पष्ट निर्देश जारी करवाए जाएंगे। -अशोक बंजारा, उप संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय

