सोनीपत में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के चेयरमैन राजेश वर्मा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से उपायुक्तों के साथ बैठक की। उन्होंने धान की पराली जलाने और वायु प्रदूषण रोकने के इंतजामों की समीक्षा की। वर्मा ने अधिकारियों को पराली प्रबंधन पर कड़ी नजर रखने और आगजनी की घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उपायुक्त नेहा सिंह ने बताया कि सोनीपत में पराली जलाने से रोकने के लिए कड़े इंतजाम किए गए हैं। पिछले साल जिन गांवों में पराली जली थी, उन्हें यलो जोन में रखा गया है। इन गांवों में हर 50 किसानों पर एक नोडल अधिकारी तैनात है, जो घटनाओं पर नजर रखेंगे। पराली जलाने पर रोक के लिए जिला, उपमंडल और ब्लॉक स्तर पर पराली प्रोटेक्शन फोर्स बनाई गई है। इनमें राजस्व, कृषि और पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं। इन टीमों को अपने इलाकों में लगातार निगरानी रखने और सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई करने को कहा गया है। लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। पराली प्रबंधन के लिए प्रशासन के पास पर्याप्त संसाधन उपलब्ध उपायुक्त ने बताया कि जिले में धान की फसल के अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए जिला प्रशासन के पास आवश्यक संसाधन एवं कृषि यंत्र उपलब्ध हैं। किसानों को पराली प्रबंधन के लिए हरसंभव सहयोग उपलब्ध करवाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक कार्यालय में डैशबोर्ड भी स्थापित किया गया है, जिसके माध्यम से पराली जलाने से संबंधित गतिविधियों और कार्रवाई की निगरानी की जा रही है। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि वे धान की पराली को जलाने के बजाय उसका उचित प्रबंधन करें और इसे अपनी आमदनी बढ़ाने के अवसर के रूप में देखें। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा धान फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए 1200 रुपये प्रति एकड़ की अनुदान राशि भी दी जा रही है। पराली जलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यदि कोई किसान पराली जलाता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज करवाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि पराली जलाने पर निर्धारित जुर्माने की कार्रवाई के साथ-साथ संबंधित किसान के राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री भी की जाएगी। उन्होंने बताया कि ऐसी रेड एंट्री होने पर संबंधित किसान अगले दो वर्षों तक अपनी फसल को सरकारी दाम पर बेचने के लिए पात्र नहीं होगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि किसानों को जागरूक कर पराली जलाने की प्रवृत्ति को पूरी तरह समाप्त करना है। इसलिए अधिकारी किसानों को पराली प्रबंधन के उपलब्ध विकल्पों और सरकारी सहायता की जानकारी भी दें। गांवों के साथ स्कूल-कॉलेजों में भी चलाया जा रहा जागरूकता अभियान उपायुक्त ने बताया कि किसानों को पराली नहीं जलाने के प्रति जागरूक करने के लिए गांवों में जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। कृषि विभाग की टीमें किसानों से सीधे संवाद कर रही हैं और उन्हें पराली प्रबंधन के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक तरीकों की जानकारी दे रही हैं। इसके अलावा स्कूलों एवं कॉलेजों में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि विद्यार्थियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और पराली प्रबंधन का संदेश व्यापक स्तर तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए प्रशासन के साथ-साथ किसानों और आमजन की भागीदारी भी बेहद जरूरी है। बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. बलवंत सहारन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से आरओ अजय सिंह, सहायक कृषि अभियंता नवीन हुड्डा, एसएमएस राहुल सैनी, मनोज कुमार तथा जेई संदीप सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

