टोंक में रिश्वत के 10 साल पुराने मामले में भ्रष्टाचार निरोधक न्यायालय ने तत्कालीन पटवारी को 4 साल की सजा सुनाई है। साथ ही 25 हजार का जुर्माना लगाया है। जानकारी के मुताबिक- शिकायतकर्ता प्रहलाद कुमार ने 6 फरवरी 2016 को एसीबी टोंक में शिकायत दी थी। प्रहलाद ने शिकायत में बताया- मेरी जमीन हल्का पटवारी मोरभाटियान के गांव मोडयाला में खातेदारी की है। इसके पास में ही सिवायचक जमीन खसरा नम्बर 2077 है। उस पर मेरा और मेरे भाई का 1-1 बीघा पर करीब 50 साल से कब्जा चला आ रहा है। जमीन पर हमने सरसों की फसल बो रखी है। इस जमीन पर गश्त करने के लिए मैं पटवारी रमेश चंद से मिला तो हम दोनों भाइयों से 5-5 हजार रुपए की रिश्वत मांगी। शिकायत का एसीबी ने सत्यापन किया। शिकायत सही पाई गई। इसके बाद एसीबी की टीम ने 8 फरवरी 2016 को ट्रैप की कार्रवाई करते हुए पटवारी रमेश जाखड़ को 6 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। अब दोषी करार दिया गया इस मामले में जांच कर एसीबी ने आरोप पत्र 7 अप्रैल 2016 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम न्यायालय में पेश किया गया। शुक्रवार को तत्कालीन हल्का पटवारी जेकमाबाद अतिरिक्त प्रभार मोरभाटियान रमेश लाल जाखड़ को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7,13 (1) (डी), 13(2) के तहत दोषी माना है। एसीबी कोर्ट ने धारा 7,13 (1) (डी), में तीन साल का कारावास की सजा और 13(2) के तहत तत्कालीन पटवारी को चार साल साधारण कारावास और 25 हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया है। इस मामले में राज्य सरकार की तरफ से सहायक निदेशक अभियोजन भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम ने पैरवी की।

