सीवान के दारौंदा प्रखंड में मध्याह्न भोजन योजना के चावल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, सतजोरा से चावल के बोरे टेंपो पर लादकर ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद सरकारी अनाज के भंडारण और वितरण की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों ने चावल की हेराफेरी कर बाजार में बेचने का आरोप लगाया है। वायरल वीडियो में टेंपो पर लादे जा रहे चावल के बोरे सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में विद्यालय परिसर से चावल से भरे बोरों को टेंपो पर लादते हुए देखा जा रहा है। यह चावल सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के मध्याह्न भोजन के लिए आवंटित किया जाता है। ऐसे में विद्यालय से अनाज बाहर ले जाने की वजह और इसकी अनुमति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रधानाध्यापक और एमडीएम प्रभारी पर मिलीभगत स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय में मध्याह्न भोजन के लिए आने वाले चावल की लंबे समय से हेराफेरी की जा रही है। ग्रामीणों ने प्रधानाध्यापक और मध्याह्न भोजन प्रभारी की मिलीभगत से सरकारी चावल बाजार में बेचने की आशंका जताई है। उनका कहना है कि यदि बच्चों के नाम पर आवंटित अनाज का इस्तेमाल दूसरे काम में किया जा रहा है तो इससे योजना का उद्देश्य प्रभावित होगा। ग्रामीणों ने जांच और कार्रवाई की मांग की वीडियो सामने आने के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों में नाराजगी है। उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने विद्यालय को मिले चावल के आवंटन, भंडारण और वितरण का हिसाब सार्वजनिक करने तथा दोषी पाए जाने वाले कर्मियों पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है। बीईओ बोले- दूसरे विद्यालय भेजा जा रहा था चावल प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी दारौंदा सौरभ सुमन ने आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि चावल बाजार में बेचने के लिए नहीं ले जाया जा रहा था। दूसरे विद्यालय में मध्याह्न भोजन का चावल समाप्त हो गया था, इसलिए वहां भेजा जा रहा था। हालांकि, इस स्पष्टीकरण के बाद भी चावल दूसरे विद्यालय भेजने की प्रक्रिया पर सवाल बने हुए हैं। यह स्पष्ट होना बाकी है कि चावल किस विद्यालय को, कितनी मात्रा में और किस आदेश के तहत भेजा गया था। इसकी जांच के बाद ही वायरल वीडियो के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी। सीवान के दारौंदा प्रखंड में मध्याह्न भोजन योजना के चावल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, सतजोरा से चावल के बोरे टेंपो पर लादकर ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद सरकारी अनाज के भंडारण और वितरण की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों ने चावल की हेराफेरी कर बाजार में बेचने का आरोप लगाया है। वायरल वीडियो में टेंपो पर लादे जा रहे चावल के बोरे सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में विद्यालय परिसर से चावल से भरे बोरों को टेंपो पर लादते हुए देखा जा रहा है। यह चावल सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के मध्याह्न भोजन के लिए आवंटित किया जाता है। ऐसे में विद्यालय से अनाज बाहर ले जाने की वजह और इसकी अनुमति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रधानाध्यापक और एमडीएम प्रभारी पर मिलीभगत स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय में मध्याह्न भोजन के लिए आने वाले चावल की लंबे समय से हेराफेरी की जा रही है। ग्रामीणों ने प्रधानाध्यापक और मध्याह्न भोजन प्रभारी की मिलीभगत से सरकारी चावल बाजार में बेचने की आशंका जताई है। उनका कहना है कि यदि बच्चों के नाम पर आवंटित अनाज का इस्तेमाल दूसरे काम में किया जा रहा है तो इससे योजना का उद्देश्य प्रभावित होगा। ग्रामीणों ने जांच और कार्रवाई की मांग की वीडियो सामने आने के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों में नाराजगी है। उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने विद्यालय को मिले चावल के आवंटन, भंडारण और वितरण का हिसाब सार्वजनिक करने तथा दोषी पाए जाने वाले कर्मियों पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है। बीईओ बोले- दूसरे विद्यालय भेजा जा रहा था चावल प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी दारौंदा सौरभ सुमन ने आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि चावल बाजार में बेचने के लिए नहीं ले जाया जा रहा था। दूसरे विद्यालय में मध्याह्न भोजन का चावल समाप्त हो गया था, इसलिए वहां भेजा जा रहा था। हालांकि, इस स्पष्टीकरण के बाद भी चावल दूसरे विद्यालय भेजने की प्रक्रिया पर सवाल बने हुए हैं। यह स्पष्ट होना बाकी है कि चावल किस विद्यालय को, कितनी मात्रा में और किस आदेश के तहत भेजा गया था। इसकी जांच के बाद ही वायरल वीडियो के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।

