भाजपा से कम सीटें जीतकर भी सपा ने कैसे चौंकाया:MLC चुनाव का वोटिंग पैटर्न 2027 विधानसभा में भी रहा तो किसे नुकसान

भाजपा से कम सीटें जीतकर भी सपा ने कैसे चौंकाया:MLC चुनाव का वोटिंग पैटर्न 2027 विधानसभा में भी रहा तो किसे नुकसान

उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव में भाजपा से 1 सीट कम जीतकर भी सपा ने सबको चौंका दिया। इसकी वजह स्नातक खंड सीटों के नतीजों में छिपा है। इसमें सपा ने 5 में से 3 सीटें जीत लीं। शिक्षक खंड के प्रत्याशियों को सिर्फ शिक्षक चुनते हैं, लेकिन स्नातक खंड के चुनाव में युवा वोटरों की अहम भूमिका होती है। चुनाव नतीजों से संकेत मिल रहे हैं कि युवा वोटरों की पसंद बदल रही है। ऐसे में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यूपी के 3.27 करोड़ युवा वोटर भाजपा-सपा के लिए सबसे अहम हो गए हैं। एक वक्त पर युवा और महिला वोटर की पहली पसंद रही भाजपा के सामने क्या चुनौती है? MLC चुनाव का वोटिंग पैटर्न कैसे 2027 विधानसभा चुनाव का समीकरण बदल सकते हैं? ये आज की संडे बिग स्टोरी में पढ़ते हैं… प्रदेश के 13.39 करोड़ मतदाताओं में 21% मतलब 3.27 करोड़ वोटर्स की उम्र 18 से 29 साल है। 2022 विधानसभा चुनाव में 131 सीटों पर जीत-हार का अंतर 5% से कम था। मतलब इन सीटों पर युवा भाजपा या सपा के पक्ष में परिणाम बदल सकते हैं। इस बात को मुख्यमंत्री योगी और सपा प्रमुख अखिलेश, दोनों समझते हैं। यही वजह है कि मुख्यमंत्री 10 साल में 10 लाख से अधिक सरकारी नौकरी देने का दावा हर जनसभा में करते हैं। वहीं, सपा प्रमुख पेपरलीक और संविदा-आउटसोर्सिंग का मुद्दा उठाकर युवाओं को साधने का प्रयास कर रहे हैं। अगर MLC चुनाव में युवाओं का वोटिंग पैटर्न देखें, तो संकेत भाजपा को अलर्ट करने वाले हैं। MLC स्नातक खंड की 5 सीटों पर 11.85 लाख वोटर्स थे। इस चुनाव में कम से कम 3 साल पहले स्नातक कर चुके लोग वोटर बन सकते हैं। इनमें बड़ी संख्या युवाओं की होती है। हालांकि, सिर्फ 3.26 लाख ही वोट देने पहुंचे। इसमें भाजपा को 1.75 लाख और सपा को 2.12 लाख वोट मिले। वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्रा कहते हैं- आंकड़े से साफ है कि युवाओं ने भाजपा की तुलना में सपा के पक्ष में ज्यादा उत्साह दिखाया। यही कारण है कि सपा 5 में से 3 सीट जीतने में सफल रही। इसमें लखनऊ, वाराणसी और इलाहाबाद-झांसी की सीटें हैं। ये इलाके पूर्वांचल, बुंदेलखंड और अवध के हैं। युवाओं के बारे में कहा जाता है कि या तो ये किसी पार्टी के समर्थक होते हैं या फिर माहौल बनाने वाले। अभी तक युवाओं का समर्थन भाजपा को मिलता रहा है। MLC चुनाव में इस पैटर्न में तब्दीली दिखी। इसे 2022 विधानसभा और 2024 लोकसभा में भाजपा-सपा को मिले वोटों से समझ सकते हैं। मतलब भाजपा और सपा के बीच पिछले दो चुनावों में 70 से 85 लाख मतों का ही गैप रहा। भाजपा के लिए पश्चिम सेफ, पूर्वांचल-अवध की चिंता सपा ने सबसे अच्छा प्रदर्शन वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, बुंदेलखंड और आगरा में किया है। वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह कहते हैं- भाजपा को पूर्वांचल और अवध क्षेत्र की चिंता करनी होगी। पश्चिम का गढ़ तुलनात्मक रूप से सेफ है। गोरखपुर, वाराणसी, इलाहाबाद-झांसी और लखनऊ स्नातक सीटों के परिणाम से भाजपा को सबक लेना चाहिए। महिला कैंडिडेट को टिकट न देने का नुकसान MLC की स्नातक सीटों पर 3.26 लाख महिला वोटर थीं। इसमें से करीब 1.22 लाख स्नातकों ने वोट दिए। इसी तरह 6 शिक्षक खंड सीटों पर 63 हजार महिला शिक्षक वोटरों में लगभग 36 हजार ने वोट दिया। लखनऊ स्नातक सीट पर सबसे अधिक महिलाओं के वोट पड़े। जानकारों की मानें, तो महिलाओं का समर्थन स्नातक सीट पर सपा को मिला। जबकि, महिलाओं को भाजपा का कोर वोटबैंक माना जाता है। महिलाओं के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है। हर चुनाव में महिला वोटर्स की पहली पसंद भाजपा रही है। भाजपा ने 11 प्रत्याशियों में एक भी महिला को टिकट नहीं दिया था। जबकि, सपा ने लखनऊ स्नातक सीट पर कांति सिंह को उतारा था। मतलब विधानसभा चुनाव में भाजपा को अपनी रणनीति बदलनी होगी। अखिलेश पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि MLC चुनाव में सपा को महिलाओं का समर्थन अधिक मिला है। हम विधानसभा चुनाव में भाजपा की तुलना में अधिक महिला प्रत्याशी बनाएंगे। सुरेश बहादुर सिंह कहते हैं कि MLC और विधानसभा चुनाव अलग होते हैं। भाजपा ने महिलाओं के लिए कई स्कीम चला रखी हैं। MLC चुनाव के पैटर्न से महिलाओं को लेकर कोई अंदाजा लगाना सही नहीं होगा। MLC चुनाव परिणाम किसके लिए क्या संदेश शिक्षकों में अब अटेवा गुट प्रभावी होकर सामने आ रहा है। अटेवा गुट से गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक खंड सीट पर उतरे राजीव यादव ने भाजपा से जीते ध्रुव कुमार त्रिपाठी को कांटे की टक्कर दी। भाजपा से बागी बनकर सपा प्रत्याशी बने संजयन त्रिपाठी तीसरे नंबर पर रहे। मतलब बागी को लोगों ने स्वीकार नहीं किया। दूसरा सपा के कोर वोटर माने जाने वाले यादव ने भी राजीव यादव का साथ दिया। लखनऊ स्नातक सीट पर भी अटेवा गुट से उतरे निर्दलीय प्रत्याशी विजय कुमार बंधु को 10 हजार से अधिक वोट मिले और वो तीसरे नंबर पर रहे। आगरा स्नातक सीट पर चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी ने दक्ष प्रताप यादव को उतारा था, लेकिन उन्हें 600 वोट भी नहीं मिले। कांग्रेस से टिकट न मिलने पर भी पार्टी के 8 नेता निर्दलीय चुनाव में उतरे थे। लखनऊ स्नातक सीट पर भविष्यवक्ता इंदु प्रकाश मिश्रा की पत्नी स्मिता मिश्रा को सिर्फ 740 वोट मिले। वाराणसी शिक्षक खंड और स्नातक सीट पर संजय राय प्रियदर्शी और अरविंद सिंह पटेल भी हजार वोट नहीं क्रॉस कर पाए। ————————– यह खबर भी पढ़ें – अपर्णा की लखनऊ की 3 सीटों से दावेदारी मजबूत, मुलायम की छोटी बहू ने क्यों कहा- मैनपुरी से नहीं लड़ूंगी शेयर मुलायम सिंह की बहू अपर्णा यादव अगला यूपी विधानसभा चुनाव लड़ सकती हैं। मैनपुरी के सैफई में उन्होंने कहा- तैयारी पूरी है, लेकिन मैनपुरी से चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं है। मैं किस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ूंगी, इसका फैसला भाजपा करेगी। भाजपा सूत्रों के अनुसार, वह लखनऊ की 3 सीटों पर दावेदारी कर सकती हैं। लेकिन, भाजपा संगठन उन्हें किसी यादव बहुल सीट से उतारकर बड़ा राजनीतिक दांव चल सकती है। पढ़िए पूरी खबर…

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