एमजीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में डिजिटल उपचार व्यवस्था शुरू हो गई है। एचआईएमएस (हॉस्पिटल इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम) के तहत पहले दिन एमवायएच में करीब 1537 और एमटीएच महिला अस्पताल में 234 मरीजों का पंजीयन कर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया। सुपर स्पेशिएलिटी, चाचा नेहरू बाल अस्पताल, कैंसर अस्पताल और एमआरटीबी में भी ओपीडी मॉड्यूल सक्रिय हो गया है। नई व्यवस्था में मरीज की बीमारी, डॉक्टर का परामर्श, जांच और दवाओं से जुड़ी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। इससे मरीज के दोबारा अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर उसकी पुरानी केस हिस्ट्री देख सकेंगे। हालांकि, डिजिटल इलाज की शुरुआत फिलहाल ओपीडी तक ही सीमित है। भर्ती मरीजों का उपचार पेपरलेस करने के लिए वार्डों में कंप्यूटर और टैबलेट तक उपलब्ध नहीं हैं। नेटवर्क बिछाने के बावजूद आईपीडी मॉड्यूल शुरू करने की समय सीमा भी तय नहीं हो पाई है। एमवायएच और एमटीएच में पहले दिन कुल 1771 मरीजों का डिजिटल उपचार रिकॉर्ड तैयार किया गया। अगस्त से नए मरीजों के पंजीयन की प्रक्रिया शुरू कर ट्रायल किया जा रहा था। अब इसे औपचारिक रूप से लागू किया गया है। व्यवस्था के संचालन में कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने के लिए पहले दिन दोपहर में प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। एचआईएमएस अस्पताल की विभिन्न सेवाओं को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ता है। इसमें मरीज का पंजीयन, डॉक्टर का परामर्श, लैब जांच, दवाओं और उपचार संबंधी जानकारी दर्ज करने की सुविधा है। प्रत्येक मरीज को दिए गए ओपीडी नंबर के आधार पर उसका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। भविष्य में मरीज दोबारा अस्पताल पहुंचता है तो डॉक्टर उसकी पिछली बीमारी, जांच और उपचार का विवरण देख सकेंगे। इसका उद्देश्य अलग-अलग पर्चियों और जांच रिपोर्ट पर निर्भरता कम करना है। आईपीडी के लिए संसाधन नहीं, समय सीमा भी तय नहीं सॉफ्टवेयर में भर्ती मरीजों के उपचार का रिकॉर्ड दर्ज करने का विकल्प भी मौजूद है। इसके लिए एमवायएच समेत अन्य अस्पतालों में नेटवर्क बिछाया जा चुका है, लेकिन वार्डों में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के इस्तेमाल के लिए कम्प्यूटर और टैबलेट उपलब्ध नहीं हैं। आईपीडी व्यवस्था शुरू करने के लिए नए सिस्टम की जरूरत है। इसके लिए अब तक कोई स्पष्ट समय सीमा भी तय नहीं हुई है। ऐसे में भर्ती मरीजों की केस हिस्ट्री, दवाओं और जांच का रिकॉर्ड डिजिटल करने की प्रक्रिया फिलहाल शुरू नहीं हो सकी है। प्रदेश में करीब 300 करोड़ का डिजिटल हेल्थ प्रोजेक्ट प्रदेश सरकार ने मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पतालों से लेकर उप स्वास्थ्य केंद्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, इस परियोजना पर करीब 300 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन सॉफ्टवेयर विकसित कर रहा है। प्रदेश स्तर पर इसका उद्देश्य मरीज के उपचार और अस्पतालों के संचालन से संबंधित जानकारी को एकीकृत करना है।

