सपा नेता आजम खान बेटे अब्दुल्ला के साथ 11 महीने बाद शनिवार शाम सवा 7 बजे रामपुर जेल से बाहर आए। लेकिन, जेल के गेट से ही ED ने आजम को गिरफ्तार कर लिया। पहले जेल के बाहर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अफसरों ने आजम से पूछताछ की, फिर अपने साथ गाड़ी में बैठाकर ले गए। ED आज आजम को गाजियाबाद की विशेष पीएमएलए कोर्ट में पेश करेगी। इससे पहले ED और आजम के बीच जेल के बाहर काफी देर बहस भी हुई। इस दौरान आजम ने आसमान की तरफ हाथ उठाकर इशारा किया- अल्लाह सब देख रहा है। मीडिया से बड़ी मुश्किल से बात हुई, तो आजम भावुक हो गए। बोले- अब कहने को क्या है? यह मुसलमान होने की सजा है। गलती यह है कि एक मुसलमान ने यूनिवर्सिटी बनाई। यह हमारा गुनाह है। उनकी गिरफ्तारी पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने X पर लिखा- आजम खान साहब के साथ मुकदमों की जो साजिश की जा रही है, उसे पूरा देश ही नहीं पूरी दुनिया देख रही है। आज की सत्ता जिस गलत रवायत को हवा दे रही है। हवा बदलने पर वो खुद उसकी शिकार होगी। तब भागते नहीं बनेगा। बेटा बोला- हम इंसान नहीं, जानवर हैं बेटा अब्दुल्ला आजम रिहा होने के बाद सफेद रंग की कार से घर चला गया। कहने लगा- आजम थे, आजम हैं और आजम ही रहेंगे। हमें पिछले 8 सालों में भैंस चोरी, बकरी चोरी, मुर्गी चोरी में फंसाया गया। जो हमारे साथ हुआ, शायद वो किसी के साथ नहीं हुआ होगा। आजम साहब को 10 साल की सजा टीवी-फ्रिज चोरी करने में नहीं, करवाने में हो गई। उस जगह पर हो गई, जहां पर कभी घर-मकान थे ही नहीं। हमारे पास कोई राइट नहीं है। हम इंसान नहीं, जानवर हैं। हम वाकई जानवर हैं, जो इतनी बेइज्जती और जिल्लत की जिंदगी के बाद भी जिंदा हैं। दरअसल, आजम की रिहाई से करीब 15 मिनट पहले ईडी की एक टीम जेल के अंदर दाखिल हुई थी। CRPF के 24 जवान भी तैनात थे। 29 अक्टूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 पैन कार्ड मामले में आजम और अब्दुल्ला की 10 साल की सजा सस्पेंड कर दिया था। दोनों को जमानत दे दी थी। पहले समझिए, ED ने किस मामले में आजम को पकड़ा है ED की कार्रवाई का संबंध मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े जौहर ट्रस्ट से है। एजेंसी सरकारी निर्माण कार्यों के धन और सामग्री के कथित दुरुपयोग, जमीन की खरीद और विश्वविद्यालय के निर्माण में इस्तेमाल हुए धन के स्रोत की जांच कर रही है। ED के मुताबिक, इस मामले की जांच रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 एफआईआर के आधार पर शुरू हुई। एजेंसी ने अपनी जांच में आरोप लगाया कि सरकारी ठेकों से जुड़े धन और निर्माण सामग्री का इस्तेमाल विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण में किया गया। 59 इमारतों के निर्माण और 114 बैनामों से हासिल जमीन की कुल कीमत करीब 499.09 करोड़ रुपए आंकी गई, जबकि वैध स्रोतों से 72.63 करोड़ रुपए का हिसाब मिला। बाकी 426.46 करोड़ रुपए को एजेंसी ने कथित अपराध की कमाई माना है। इसी आधार पर 28 अक्टूबर को ED ने यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों की करीब 426.46 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच की थी। आजम के साथ अब क्या होगा? अब आजम खान को एक बार फिर जेल जाना पड़ेगा। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल है कि क्या आजम खान 2027 के विधानसभा चुनाव तक जेल में रहेंगे? क्या हाईकोर्ट उन्हें राहत दे सकता है? कानूनी प्रक्रिया और मौजूदा हालात को देखें तो उनके सामने कई रास्ते हैं, लेकिन फिलहाल जल्द रिहाई आसान नजर नहीं आती। ईडी पहले रिमांड मांग सकती है आजम खान को हिरासत में लेने के बाद ईडी की अगली कोशिश आजम की कोर्ट से रिमांड हासिल करने की होगी। इसके बाद 2 स्थितियां बन सकती हैं- पहली- कोर्ट ED की मांग स्वीकार कर आजम को पूछताछ के लिए एजेंसी की हिरासत में दे सकती है। इस दौरान उनसे जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण, जमीन की खरीद, सरकारी धन के इस्तेमाल और ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेन-देन पर सवाल किए जा सकते हैं। दूसरी- कोर्ट रिमांड अर्जी खारिज कर सकती है। ऐसी स्थिति में भी उनकी तत्काल रिहाई नहीं होगी। कोर्ट अन्य कानूनी आधारों और उनकी हिरासत की वैधता पर फैसला करेगी। क्या ED की गिरफ्तारी के बाद जमानत मिलना आसान होगा? इसका जवाब है- नहीं। मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में जमानत की प्रक्रिया सामान्य आपराधिक मामलों से ज्यादा कठिन होती है। पीएमएलए की धारा- 45 के तहत जमानत के लिए 2 शर्तें लागू होती है। पहली- कोर्ट को यह मानने का आधार हो कि आरोपी प्रथमदृष्टया दोषी नहीं है। दूसरी- कोर्ट को यह संतुष्टि हो कि जमानत मिलने के बाद आरोपी दोबारा अपराध नहीं करेगा। जमानत के लिए शुरू से अपनानी होगी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील शारिक अब्बासी कहते हैं- आजम को जमानत के लिए एक बार फिर से शुरुआत से प्रक्रिया अपनानी पड़ेगी। पहले ट्रायल कोर्ट में जमानत के लिए आवेदन करेंगे। ईडी के मामलों में निचली अदालतें आमतौर पर राहत नहीं देतीं। यहां से जमानत याचिका रिजेक्ट होने के बाद सेशन कोर्ट जाएंगे। फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। इस प्रक्रिया में लंबा समय लग सकता है। क्या आजम खान सीधे हाईकोर्ट जा सकते हैं? हां, विशेष पीएमएलए कोर्ट से राहत नहीं मिलने पर आजम के पास हाईकोर्ट जाने का रास्ता खुला रहेगा। वे गिरफ्तारी की वैधता, रिमांड आदेश और जमानत से जुड़े सवालों को उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत हाईकोर्ट में उठा सकते हैं। हाईकोर्ट के सामने उनके वकीलों की ओर से यह दलील दी जा सकती है कि जांच में सहयोग के लिए वे तैयार हैं। साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका नहीं है। उन्हें लंबे समय तक हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है। अब पढ़िए आजम के जेल से बाहर आने पर क्या-क्या हुआ जेल के गेट पर वकीलों से ईडी अफसरों की बहस रामपुर जिला जेल से करीब 11 महीने बाद बाहर निकले मोहम्मद आजम खान को ईडी के अफसर साथ ले गए। जेल के मेन गेट पर सफेद रंग की कार से पहुंचे अफसरों और आजम के वकीलों के बीच तीखी बहस हुई। इस दौरान आजम खान ने भी अफसरों के सवालों के जवाब दिए, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद अधिकारी उन्हें अपनी कार में बैठाकर ले गए। आजम खान के वकील जुबेर खान ने कहा कि कुछ लोग बिना आईडी कार्ड दिखाए जेल में दाखिल हुए। यह भी नहीं बताया कि वे कौन हैं और किस विभाग से आए हैं? मैंने ईडी के अफसरों को बताया कि आजम की तबीयत ठीक नहीं है। वह बीमार हैं, लेकिन उनकी बात सुने बिना ही उन्हें अपने साथ ले गए।
आजम के खिलाफ 2 मामले पेंडिंग पहला मामला- ईडी ने 14 अक्टूबर को जौहर ट्रस्ट और मो. अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर FIR दर्ज कराई थी। यह एफआईआर रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज हुई थी। ईडी को शक है कि ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी को मिले पैसों के सोर्स और उनके इस्तेमाल में गड़बड़ी हुई है। दूसरा मामला- यूपी राज्य हज समिति की जमीन की बिक्री में कथित गड़बड़ी से जुड़ा है। विजिलेंस की जांच में जमीन की बिक्री से समिति को 2.08 करोड़ के राजस्व का नुकसान की पुष्टि हुई थी। मामले में आजम समेत 5 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें तत्कालीन सचिव एखलाक अहमद, डॉ. एमएए खान, आमिश डेवलपर्स के प्रोपराइटर मोहम्मद अय्यूब और मुस्तकीम अहमद शामिल हैं। अब चौथी बार जेल जा सकते हैं आजम …………………….. ये खबर भी पढ़िए… वाराणसी से स्लीपर वंदेभारत शुरू, 9 घंटे में दिल्ली पहुंचेगी:प्रयागराज-कानपुर समेत 4 स्टेशनों पर रुकेगी; योगी ने रेलमंत्री के साथ अंदर से देखी सीएम योगी और रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को वाराणसी से वंदेभारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। यह देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन है, जो काशी से दिल्ली के बीच दौड़ेगी। पूरी खबर पढ़िए…

