बेतिया के चनपटिया विधायक अभिषेक रंजन ने पत्रकारों के साथ मारपीट, गाली-गलौज और धमकी की घटनाओं पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं और उनके साथ हिंसा लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला है। विधायक ने सरकार से पत्रकारों के साथ हुई घटनाओं में दोषियों के खिलाफ तुरंत और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। सवाल पूछने पर पत्रकार किसी का दुश्मन नहीं अभिषेक रंजन ने कहा कि पत्रकार का काम सवाल पूछना है। सवाल पूछने से कोई व्यक्ति किसी का दुश्मन नहीं हो जाता। यदि किसी को सवाल पसंद नहीं है तो उसका जवाब दिया जाना चाहिए, लेकिन पत्रकार के साथ मारपीट या दुर्व्यवहार किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। सहरसा और बेतिया की घटनाओं पर जताई चिंता विधायक ने सहरसा सदर अस्पताल और बेतिया जीएमसीएच में पत्रकारों से डॉक्टरों की कथित मारपीट और गाली-गलौज की घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में केवल एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। दोषियों के खिलाफ समय पर निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए। जीएमसीएच में मोबाइल छीनने की भी शिकायत अभिषेक रंजन ने कहा कि बेतिया जीएमसीएच में पत्रकारों के साथ बदसलूकी, मोबाइल छीनने और मारपीट की शिकायतें भी सामने आती रहती हैं। कई मामलों में दबाव के बाद एफआईआर दर्ज होती है, लेकिन कार्रवाई की धीमी रफ्तार को लेकर पत्रकारों में नाराजगी है। पत्रकारों पर दबाव बनाने की कोशिश गलत विधायक ने कहा कि बिहार ही नहीं, पूरे देश में पत्रकारों के साथ बदसलूकी और उन पर दबाव बनाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने हाल में दिल्ली में एक महिला पत्रकार के साथ पुलिसकर्मियों की कथित मारपीट के मामले का भी जिक्र किया। सत्ता में बैठे लोगों को भी देना होगा जवाब अभिषेक रंजन ने कहा कि पत्रकार बड़े नेताओं और सत्ता में बैठे लोगों से सवाल करते हैं। जब किसी सवाल का जवाब देना मुश्किल होता है, तो सवालों से बचने या पत्रकार पर दबाव बनाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। लोकतंत्र में सवालों से भागने का कोई रास्ता नहीं है। एफआईआर के साथ कार्रवाई भी जरूरी विधायक ने कहा कि किसी घटना के बाद सिर्फ एफआईआर दर्ज कर देना पर्याप्त नहीं है। जांच निष्पक्ष हो और दोषियों पर शीघ्र कार्रवाई हो, तभी पत्रकारों में कानून-व्यवस्था को लेकर भरोसा कायम होगा। सड़क से सदन तक आवाज उठाने का दावा अभिषेक रंजन ने कहा कि चनपटिया, पश्चिम चंपारण या बिहार के किसी भी हिस्से में पत्रकारों पर हमला हुआ तो कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर सदन तक आवाज उठाएगी। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा सत्र में पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्र पत्रकारिता के अधिकार का मुद्दा मजबूती से उठाया जाएगा। बोले- पत्रकार लोकतंत्र की आंख और कान विधायक ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र की आंख और कान हैं। उनकी आवाज दबाने की कोशिश लोकतंत्र को कमजोर करने जैसी है। उन्होंने कहा कि पत्रकार आज सवाल पूछ रहे हैं और कल जनता भी सवाल पूछेगी। सवालों से भागकर लोकतंत्र नहीं चल सकता। बेतिया के चनपटिया विधायक अभिषेक रंजन ने पत्रकारों के साथ मारपीट, गाली-गलौज और धमकी की घटनाओं पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं और उनके साथ हिंसा लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला है। विधायक ने सरकार से पत्रकारों के साथ हुई घटनाओं में दोषियों के खिलाफ तुरंत और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। सवाल पूछने पर पत्रकार किसी का दुश्मन नहीं अभिषेक रंजन ने कहा कि पत्रकार का काम सवाल पूछना है। सवाल पूछने से कोई व्यक्ति किसी का दुश्मन नहीं हो जाता। यदि किसी को सवाल पसंद नहीं है तो उसका जवाब दिया जाना चाहिए, लेकिन पत्रकार के साथ मारपीट या दुर्व्यवहार किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। सहरसा और बेतिया की घटनाओं पर जताई चिंता विधायक ने सहरसा सदर अस्पताल और बेतिया जीएमसीएच में पत्रकारों से डॉक्टरों की कथित मारपीट और गाली-गलौज की घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में केवल एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। दोषियों के खिलाफ समय पर निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए। जीएमसीएच में मोबाइल छीनने की भी शिकायत अभिषेक रंजन ने कहा कि बेतिया जीएमसीएच में पत्रकारों के साथ बदसलूकी, मोबाइल छीनने और मारपीट की शिकायतें भी सामने आती रहती हैं। कई मामलों में दबाव के बाद एफआईआर दर्ज होती है, लेकिन कार्रवाई की धीमी रफ्तार को लेकर पत्रकारों में नाराजगी है। पत्रकारों पर दबाव बनाने की कोशिश गलत विधायक ने कहा कि बिहार ही नहीं, पूरे देश में पत्रकारों के साथ बदसलूकी और उन पर दबाव बनाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने हाल में दिल्ली में एक महिला पत्रकार के साथ पुलिसकर्मियों की कथित मारपीट के मामले का भी जिक्र किया। सत्ता में बैठे लोगों को भी देना होगा जवाब अभिषेक रंजन ने कहा कि पत्रकार बड़े नेताओं और सत्ता में बैठे लोगों से सवाल करते हैं। जब किसी सवाल का जवाब देना मुश्किल होता है, तो सवालों से बचने या पत्रकार पर दबाव बनाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। लोकतंत्र में सवालों से भागने का कोई रास्ता नहीं है। एफआईआर के साथ कार्रवाई भी जरूरी विधायक ने कहा कि किसी घटना के बाद सिर्फ एफआईआर दर्ज कर देना पर्याप्त नहीं है। जांच निष्पक्ष हो और दोषियों पर शीघ्र कार्रवाई हो, तभी पत्रकारों में कानून-व्यवस्था को लेकर भरोसा कायम होगा। सड़क से सदन तक आवाज उठाने का दावा अभिषेक रंजन ने कहा कि चनपटिया, पश्चिम चंपारण या बिहार के किसी भी हिस्से में पत्रकारों पर हमला हुआ तो कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर सदन तक आवाज उठाएगी। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा सत्र में पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्र पत्रकारिता के अधिकार का मुद्दा मजबूती से उठाया जाएगा। बोले- पत्रकार लोकतंत्र की आंख और कान विधायक ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र की आंख और कान हैं। उनकी आवाज दबाने की कोशिश लोकतंत्र को कमजोर करने जैसी है। उन्होंने कहा कि पत्रकार आज सवाल पूछ रहे हैं और कल जनता भी सवाल पूछेगी। सवालों से भागकर लोकतंत्र नहीं चल सकता।

