जयपुर में बीजेपी ने सुनील कोठारी को मेयर पद का प्रत्याशी बनाया है। सुनील कोठारी को कभी जयपुर जिलाध्यक्ष का पद कुछ महीनों में ही छोड़ना पड़ा था। दरअसल, सुनील कोठारी को जनवरी 2020 में शहर बीजेपी अध्यक्ष बनाया गया था। लेकिन वे अपनी कार्यकारिणी नहीं बना पाए थे। उनके सरल और सौम्य स्वभाव के कारण वे सभी गुटों को एक मंच पर नहीं ला पाए थे। इसके चलते उनकी कार्यकारिणी में देरी हुई थी। ऐसे में अगस्त 2020 में ही उनसे इस्तीफा ले लिया गया। इसके बाद करीब ढ़ाई साल तक वे राजनीति में ज्यादा सक्रिय नहीं रहे। साल 2023 में हुए विधानसभा चुनावों में उन्हें एक बार फिर प्रदेश स्तरीय चुनाव प्रबंधन समिति और प्रदेश स्तरीय आर्थिक समिति का सदस्य बनाया गया। वहीं अब एक बार फिर पार्टी ने उन पर विश्वास जताते हुए उन्हें मेयर पद का प्रत्याशी बनाया हैं। गहलोत सरकार के फैसले के खिलाफ चलाया आंदोलन सुनील कोठारी राजनीति के साथ-साथ सामाजिक कार्यों मे भी हमेशा आगे रहे। साल 2023 में जब गहलोत सरकार ने प्रदेश में 17 नए जिले बनाते हुए जयपुर को दो जिलों में तोड़ने का निर्णय लिया। तब कोठारी ने ‘म्हारा जयपुर, प्यारा जयपुर, हमें चाहिए एक जयपुर’ अभियान चलाया। उन्होने सामाजिक संगठनों और जयपुर की जनता को साथ लेकर गहलोत सरकार के इस फैसले का विरोध भी किया। उन्होने संकल्प लिया था कि यह फैसला टलने पर वह सांगा बाबा मंदिर सांगानेर से शिला माता मंदिर आमेर तक पद यात्रा निकालेंगे। प्रदेश में सरकार बदलने और फैसला लागू नहीं होने पर उन्होने 4 फरवरी 2024 को पदयात्रा निकालकर संकल्प को पूरा किया। 40 साल की राजनीति में पहला चुनाव लड़ा सुनील कोठारी ने करीब 40 साल पहले राजनीति शुरू की थी। कोठारी को पार्टी में पहला पद साल 1987 में लोकसभा स्पीकर और तत्कालीन प्रदेश युवा मोर्चा के अध्यक्ष ओम बिरला ने दिया था। कोठारी को युवा मोर्चा में शहर कोषाध्यक्ष बनाया था। इसके बाद वे दो बार प्रदेश मंत्री, शहर जिलाध्यक्ष और प्रदेश उपाध्यक्ष भी रहे। लेकिन पार्टी ने उन्हें कभी कोई चुनाव नहीं लड़वाया। यह पहला मौका था, जब उन्होने कोई चुनाव लड़ा। मावर कांग्रेस का प्रमुख ओबीसी चेहरा वहीं, कांग्रेस की मेयर प्रत्याशी सुनीता मावर जयपुर के आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड 118 से कांग्रेस पार्षद हैं। वे पिछली बार भी मेयर की दावेदार थीं, पिछली बार उन्हें मेयर उम्मीदवार नहीं बनाया था। वे पिछले 20 साल से ज्यादा वक्त से जयपुर नगर निगम की राजनीति में सक्रिय हैं। नगर निगम में कई समितियों की अध्यक्ष रह चुकी हैं। जयपुर शहर में कांग्रेस का प्रमुख महिला ओबीसी चेहरा हैं। सुनीता मावर का कई निगम की राजनीति में बड़ा सियासी संपर्क, पार्टी से बगावत नहीं की कांग्रेस में भारी गुटबाजी के बीच सुनीता मावर को कांग्रेस का मेयर उम्मीदवार बनाने के पीछे सियासी समीकरण हैं। मावर लंबे समय से नगर निगम की राजनीति में सक्रिय हैं। शहरी वोटर्स पर पकड़ के साथ उनका ग्राउंड कनेक्ट अच्छा माना जाता है। जातीय समीकरणों में फिट बैठती हैं। ओबीसी और वैश्य समाज दोनों के सियासी समीकरण सधते हैं। मावर लगातार पार्टी से जुड़ी रही हैं। पिछली बार मेयर पद की प्रबल दावेदार थीं लेकिन मौका नहीं मिला, सरकार बदलने पर जब कांग्रेस पार्षदों ने बगावत की तो वे उनके साथ नहीं गई।

