भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) सहरसा इकाई की ओर से आयोजित तीन दिवसीय बिहार इप्टा राज्य स्तरीय नाट्योत्सव ‘सच का रंगमंच : रंगों और विचारों का उत्सव’ का समापन रविवार देर शाम हुआ। बिहार इप्टा के 80वें स्थापना वर्ष के अवसर पर आयोजित नाट्योत्सव के अंतिम दिन पटना इप्टा की ओर से प्रेमचंद लिखित, भीष्म साहनी रूपांतरित एवं दीपक कुमार निर्देशित ‘सदगति’ और कटिहार इप्टा की ‘सुन्दर’ नाटक की प्रस्तुति हुई। आर्यावर्त वैली पाठशाला परिसर में आयोजित कार्यक्रम में लोक नृत्य और जनगीतों की भी प्रस्तुति दी गई। पटना इप्टा के कलाकारों ने ‘सदगति’ के माध्यम से जातिगत भेदभाव, शोषण और सामंती मानसिकता पर तीखा प्रहार किया। नाटक का मुख्य पात्र गरीब दलित मजदूर दुखी बेटी के विवाह के लिए शुभ मुहूर्त निकलवाने पंडित के घर जाता है। पंडित उससे कठिन काम करवाता है। भूख, थकान और लगातार मेहनत से टूटकर दुखी की वहीं मौत हो जाती है। नाटक ने अमानवीय सामाजिक व्यवस्था और जाति के नाम पर होने वाले शोषण को प्रभावी ढंग से सामने रखा। पंडिताइन की भूमिका में गुड़िया कुमारी, घासीराम में विशाल तिवारी, गौंड में दिनेश शर्मा, दुखी में पीयूष सिंह और बेटी की भूमिका में प्राची सिंह ने अभिनय किया। इसके बाद कटिहार इप्टा के मुकेश कुमार मोनी लिखित एवं निर्देशित ‘सुन्दर’ ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। किन्नर समाज के जीवन, संघर्ष, अपमान और सामाजिक भेदभाव पर आधारित इस नाटक में सुन्दर की भूमिका मुकेश कुमार मोनी, बच्चा की जेनी साह, पार्वती की अंजलि प्रसाद, चंदर की प्रदीप भट्टाचार्य और आत्मा की कोमल साह ने निभाई। तीन कला मर्मज्ञों को मिला कला संस्कृति सम्मान : समापन समारोह में कला संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ. शिलेंद्र कुमार, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आरआर महतो और साउथ प्वाइंट स्कूल के प्राचार्य राजीव कुमार को ‘कला संस्कृति सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया। इप्टा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष एवं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित सीताराम सिंह, प्रदेश महासचिव फिरोज अशरफ खान एवं डॉ. दीपक कुमार गुप्ता ने मोमेंटो व शाल देकर सम्मानित किया। भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) सहरसा इकाई की ओर से आयोजित तीन दिवसीय बिहार इप्टा राज्य स्तरीय नाट्योत्सव ‘सच का रंगमंच : रंगों और विचारों का उत्सव’ का समापन रविवार देर शाम हुआ। बिहार इप्टा के 80वें स्थापना वर्ष के अवसर पर आयोजित नाट्योत्सव के अंतिम दिन पटना इप्टा की ओर से प्रेमचंद लिखित, भीष्म साहनी रूपांतरित एवं दीपक कुमार निर्देशित ‘सदगति’ और कटिहार इप्टा की ‘सुन्दर’ नाटक की प्रस्तुति हुई। आर्यावर्त वैली पाठशाला परिसर में आयोजित कार्यक्रम में लोक नृत्य और जनगीतों की भी प्रस्तुति दी गई। पटना इप्टा के कलाकारों ने ‘सदगति’ के माध्यम से जातिगत भेदभाव, शोषण और सामंती मानसिकता पर तीखा प्रहार किया। नाटक का मुख्य पात्र गरीब दलित मजदूर दुखी बेटी के विवाह के लिए शुभ मुहूर्त निकलवाने पंडित के घर जाता है। पंडित उससे कठिन काम करवाता है। भूख, थकान और लगातार मेहनत से टूटकर दुखी की वहीं मौत हो जाती है। नाटक ने अमानवीय सामाजिक व्यवस्था और जाति के नाम पर होने वाले शोषण को प्रभावी ढंग से सामने रखा। पंडिताइन की भूमिका में गुड़िया कुमारी, घासीराम में विशाल तिवारी, गौंड में दिनेश शर्मा, दुखी में पीयूष सिंह और बेटी की भूमिका में प्राची सिंह ने अभिनय किया। इसके बाद कटिहार इप्टा के मुकेश कुमार मोनी लिखित एवं निर्देशित ‘सुन्दर’ ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। किन्नर समाज के जीवन, संघर्ष, अपमान और सामाजिक भेदभाव पर आधारित इस नाटक में सुन्दर की भूमिका मुकेश कुमार मोनी, बच्चा की जेनी साह, पार्वती की अंजलि प्रसाद, चंदर की प्रदीप भट्टाचार्य और आत्मा की कोमल साह ने निभाई। तीन कला मर्मज्ञों को मिला कला संस्कृति सम्मान : समापन समारोह में कला संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ. शिलेंद्र कुमार, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आरआर महतो और साउथ प्वाइंट स्कूल के प्राचार्य राजीव कुमार को ‘कला संस्कृति सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया। इप्टा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष एवं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित सीताराम सिंह, प्रदेश महासचिव फिरोज अशरफ खान एवं डॉ. दीपक कुमार गुप्ता ने मोमेंटो व शाल देकर सम्मानित किया।

