सा रे गा मा पा का नया सीजन 19 सितंबर 2026 से जी टीवी पर शुरू हो चुका है। इस सीजन में शंकर महादेवन जज हैं। शो में देशभर से आए सिंगर्स अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान शंकर महादेवन ने शो की भव्यता, नए टैलेंट, संगीत की ताकत, सोशल मीडिया के दौर में कलाकारों की लोकप्रियता और एआई के बढ़ते इस्तेमाल पर बात की। उन्होंने बताया कि किसी कलाकार की पहचान सिर्फ सुर और तकनीक से नहीं होती, बल्कि उसकी आवाज में मौजूद वह खास एहसास भी मायने रखता है, जो सीधे दिल तक पहुंचता है। उन्होंने नए कलाकारों को लेकर अपने शुरुआती दिनों की यादें साझा कीं और अरिजीत सिंह से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। सवाल: इस बार सा रे गा मा पा में क्या खास देखने को मिलेगा? आपने शो को किस तरह तैयार होते देखा है? जवाब: इस बार शो की थीम मेगा है। आप अब तक जितने भी सा रे गा मा पा या दूसरे रियलिटी शो देखते आए हैं, उस लेवल को दस गुना कर दीजिए। इस बार शो उसी स्तर पर तैयार किया गया है। चाहे सेट की बात करें या म्यूजिशियंस की, यहां करीब 100 म्यूजिशियंस और लगभग 100 कोरस सिंगर्स हैं। भारत के अलग-अलग राज्यों से लोक कलाकार और स्थानीय डांसर्स भी शामिल किए गए हैं। सवाल: आपने अलग-अलग राज्यों के लोक कलाकारों का भी जिक्र किया। क्या इस बार शो में संगीत के साथ भारतीय संस्कृति को भी खास जगह दी गई है? जवाब: बिल्कुल। ओडिशा, केरल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, असम और दूसरे राज्यों के कलाकार यहां अपनी संस्कृति की झलक दिखा रहे हैं। इसलिए यह शो सांस्कृतिक रूप से भी समृद्ध है। यह म्यूजिक और कल्चर का शानदार प्रतिनिधित्व करता है। इसी वजह से इसे ‘हिंदुस्तान का संगीत स्थान’ कहा गया है। सवाल: यानी शो में संस्कृति और भव्यता के साथ संगीत की क्वालिटी भी सबसे अहम है? जवाब: बिल्कुल। सा रे गा मा पा सबसे पुराने और ओरिजिनल सिंगिंग रियलिटी शोज में से एक है। इसे करीब 31 साल हो चुके हैं। आप किसी इंसान को कितना भी अच्छा तैयार कर दें, उसे बड़े डिजाइनर कपड़े पहना दें, लेकिन अगर उसके अंदर आत्मा और जीवन नहीं है तो उसका कोई फायदा नहीं है। इस शो का जीवन उसका संगीत है। यहां के टैलेंट और म्यूजिक की क्वालिटी मजबूत है। सवाल: जब आप शो की बात करते हैं तो संगीत को उसकी आत्मा बता रहे हैं। शो में जो विजुअल और डांस का हिस्सा जोड़ा गया है, वह इस संगीत को किस तरह और बड़ा बनाता है? जवाब: इसके ऊपर जो विजुअल और सोनिक एक्सपीरियंस जोड़ा गया है, वह दर्शकों के लिए शानदार अनुभव है। हम लोग भी इसे देखकर हैरान रह गए। मैंने अपने बच्चों को भी इसके बारे में नहीं बताया था। मेरे दो बच्चे हैं, सिद्धार्थ और शिवम। दोनों म्यूजिक से जुड़े हैं, कंपोज करते हैं और परफॉर्म भी करते हैं। मैंने उन्हें सरप्राइज दिया और सीधे पहला एपिसोड दिखाया। उन्होंने शो देखा तो वे भी हैरान रह गए कि ऐसा लेवल उन्होंने पहले नहीं देखा। मुझे लगता है कि जी टीवी, प्रोड्यूसर्स, डायरेक्टर्स और क्रिएटिव टीम ने दर्शकों को ऐसा अनुभव देने की कोशिश की है, जो उन्होंने पहले नहीं देखा। सवाल: आपने कहा कि शो का असली जीवन उसका संगीत है। इसी बात से आगे बढ़ें तो नए कलाकारों में आप सबसे पहले क्या तलाशते हैं- सुर, रियाज या उनकी आवाज में कुछ और? जवाब: सब कुछ। दरअसल, सिंगिंग सिर्फ एक माध्यम है। एक कलाकार का अपना ऑरा होता है। यह सिर्फ उसकी सिंगिंग, सुर के ज्ञान या परफॉर्म करने की क्षमता से नहीं आता। किसी कलाकार में भगवान ऐसी चीज दे देते हैं कि वह सिर्फ खड़ा होकर चार लाइन गाए और लोग उसकी तरफ आकर्षित हो जाएं। यही मां सरस्वती का कमाल है। सवाल: यानी कई बार कलाकार तकनीकी रूप से बहुत अच्छा होने के बावजूद उतना असर नहीं छोड़ता, जबकि किसी साधारण आवाज में भी कुछ ऐसा होता है जो दिल को छू जाता है? जवाब: बिल्कुल। किसी कलाकार की आवाज में ऐसा कुछ होता है कि वह सीधे दिल को छू जाती है। हजारों लोग किसी गाने को सही सुर, हरकत और फील के साथ गा सकते हैं, लेकिन किसी खास कलाकार की आवाज में कुछ अलग होता है। लता जी ने ‘लग जा गले’ गाया। बहुत से लोग उसे सुर से सुर मिलाकर गा सकते हैं, लेकिन लता जी जब गाती थीं तो उसमें कुछ ऐसा क्यों था कि वह सीधे दिल तक पहुंचता था? यही सवाल है। सवाल: तो उस ‘कुछ अलग’ को आप किस तरह समझाते हैं? क्या यह चीज संगीत की तकनीक से आगे की है? जवाब: हां, यह सुर से आगे है, ताल से आगे है और संगीत से भी आगे है। संगीत तो मां सरस्वती का दिया हुआ है। अभी आप ‘हनुमान अंश’ के एक गाने में साधु तिवारी की आवाज सुनिए। उनकी आवाज कोई बहुत बड़ी क्लासिकल आवाज नहीं है, लेकिन उसमें ऐसी बात है कि वह सीधे दिल को छू जाती है। यही मां सरस्वती का देन है और हनुमान जी की कृपा है। इसलिए संगीत आध्यात्मिक और शक्तिशाली माध्यम है। इसे किसी पैमाने पर पूरी तरह नहीं तौला जा सकता। सवाल: जब संगीत और कलाकार की पहचान का तरीका बदल रहा है, तो क्या आज के दौर में हर नए सिंगर का लक्ष्य फिल्मी प्लेबैक सिंगर बनना भी जरूरी है? जवाब: नहीं। वह समय चला गया जब हर कलाकार का सपना सिर्फ फिल्मी प्लेबैक सिंगर बनना होता था। आज हर कलाकार अपनी अलग पहचान बना सकता है। सोशल मीडिया इतना बड़ा माध्यम बन चुका है कि कलाकार सीधे अपने फैंस से जुड़ सकता है। यह बिल्कुल अलग दौर है। सवाल: यानी आज किसी कलाकार के पास अपनी पहचान बनाने के लिए फिल्मों के अलावा भी कई रास्ते हैं? जवाब: बिल्कुल। आज रियलिटी शो से निकलने वाले बहुत से कलाकार व्यस्त हैं। वे पैसे कमा रहे हैं, अपना घर बसा रहे हैं और अपने तरीके से जिंदगी जी रहे हैं। अगर वे किसी दफ्तर में जाकर नौकरी करते, उससे ज्यादा कमाई कई कलाकार कर रहे हैं। आज कलाकारों के पास काम करने और अपनी पहचान बनाने के बहुत से रास्ते हैं। सवाल: लेकिन सोशल मीडिया ने पहचान बनाने का रास्ता आसान करने के साथ-साथ लोकप्रियता को बहुत तेज भी कर दिया है। लोग जल्दी वायरल हो जाते हैं। ऐसे में लंबे समय तक टिके रहने के लिए क्या जरूरी है? जवाब: यही तो मैं कहता हूं कि दो तरह के कलाकार होते हैं। एक तरह के कलाकारों के करियर में अचानक स्पाइक आता है। जितनी जल्दी स्पाइक आता है, उतनी जल्दी वह गायब भी हो सकता है। दूसरे कलाकार ऐसे होते हैं जो गुणी होते हैं, अपने आर्ट फॉर्म को जानते हैं, सुर के बारे में जानते हैं, राग-रागिनी समझते हैं और संगीत में डूबे हुए होते हैं। सवाल: यानी आपके हिसाब से सिर्फ अचानक मिली लोकप्रियता काफी नहीं है, कलाकार के पास अपने आर्ट फॉर्म की गहरी समझ भी होनी चाहिए? जवाब: हां। ऐसे कलाकारों के लंबे समय तक रहने की संभावना ज्यादा होती है। यह सिर्फ सिंगिंग में नहीं होता। हर फील्ड में ऐसा होता है। चाहे डांसर हो, सिंगर हो, पेंटर हो या एक्टर। कभी-कभी कोई कलाकार अचानक लोकप्रिय हो जाता है और लोग कहते हैं कि आखिर इसमें ऐसा क्या है। लेकिन कुछ समय बाद वह गायब हो जाता है। यह इंसानों के साथ होने वाली सामान्य घटना है। हर आर्ट फॉर्म में ऐसा होता है। कोई नई बात नहीं है। सवाल: आज कलाकारों के लिए सोशल मीडिया एक बड़ा प्लेटफॉर्म है, वहीं दूसरी तरफ एआई भी तेजी से म्यूजिक का हिस्सा बन रहा है। आपको लगता है कि एआई नए सिंगर्स के लिए चुनौती बनेगा? जवाब: एआई टेक्नोलॉजी की अगली बड़ी स्टेप है। जैसे लैंडलाइन टेलीफोन के बाद कॉर्डलेस टेलीफोन आया, फिर मोबाइल फोन आया। उसी तरह टेक्नोलॉजी लगातार आगे बढ़ती रही है। पहले बड़े-बड़े कंप्यूटर पूरे कमरे में हुआ करते थे। उसके बाद कंप्यूटर छोटे हुए, लैपटॉप आए, फिर टैबलेट आए और आज फोन में ही बहुत कुछ हो जाता है। सवाल: तो आप एआई को खतरे की बजाय टेक्नोलॉजी के विकास के अगले चरण के रूप में देखते हैं? जवाब: हां। एआई टेक्नोलॉजी में सबसे बड़ी क्रांतियों में से एक है और यह लंबे समय तक हमारे साथ रहने वाला है। लेकिन किसी भी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सही या गलत तरीके से किया जा सकता है। जिस फोन से आप मेरा इंटरव्यू ले रहे हैं, उसका भी गलत काम के लिए इस्तेमाल हो सकता है। इसी तरह एआई का भी दुरुपयोग किया जा सकता है। सवाल: म्यूजिक में एआई के दुरुपयोग का किस तरह का खतरा आपको नजर आता है? जवाब: उदाहरण के लिए, किसी का गाना लिया और उसकी कॉपी बना दी। बिना बताए उसे रिलीज कर दिया। ये गलत चीजें हैं। एआई में बहुत सारी सुविधाएं हैं, इसलिए इसका दुरुपयोग भी किया जा सकता है। मेरी बात सिर्फ इतनी है कि एआई शानदार और क्रांतिकारी टेक्नोलॉजी है, लेकिन इसका जिम्मेदारी से इस्तेमाल होना चाहिए। सवाल: अगर एआई इतना शक्तिशाली टूल है, तो कलाकारों को इसका सही इस्तेमाल कैसे करना चाहिए? जवाब: जैसे चाकू से सब्जी काट सकते हैं और उसका गलत इस्तेमाल भी कर सकते हैं। गैस का इस्तेमाल भी जिम्मेदारी से करना पड़ता है। उसी तरह एआई का इस्तेमाल भी जिम्मेदारी से होना चाहिए। एआई आपको सोचने में मदद कर सकता है। जैसे अगर 100 साल पहले मैं आपसे पूछता कि 985 को 533 से गुणा कितना होगा, तो आप बैठकर हिसाब करते। आज आप तुरंत कैलकुलेटर का इस्तेमाल कर लेते हैं। सवाल: यानी एआई का इस्तेमाल इंसान की सोच को आसान बनाने के लिए होना चाहिए, उसकी जगह लेने के लिए नहीं? जवाब: बिल्कुल। एआई आपकी सोच को आसान और बेहतर बनाने में मदद करेगा। कई मामलों में आपको वही चीज दोबारा बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जो पहले से मौजूद है। लेकिन क्रिएटिविटी आपकी होनी चाहिए। आप क्रिएटर हैं और आपको ही तय करना है कि क्या करना है और क्या नहीं। फाइनल डिसीजन आपका होना चाहिए, एआई का नहीं। सवाल: आपने एआई के संदर्भ में अंतिम फैसला इंसान का होने की बात कही। इसी तरह अपने करियर के इस पड़ाव पर जब आप नए कलाकारों को देखते हैं, तो क्या उनमें आपको अपना पुराना दौर नजर आता है? जवाब: बहुत बार ऐसा होता है। जब कोई बच्चा यहां आकर गाता है और मेहनत करता है तो हमें अपने दिन याद आते हैं कि हम कैसे नर्वस होते थे और लोगों से मिलते थे। हम भी शुरुआत में लोगों से मिलकर उनके पैर छूते थे। आज यही बच्चे आकर हमारे पैर छूते हैं। सवाल: समय का यह बदलाव आपके लिए कैसा अनुभव है? जवाब: यह थोड़ा ओवरवेल्मिंग लगता है। लगता है कि समय कितनी तेजी से गुजर रहा है। आप सीनियर म्यूजिशियन बन रहे हैं और नए यंगस्टर्स सामने आ रहे हैं। मेरी नजर में इस समय का इस्तेमाल हमें युवाओं को प्यार देने और उन्हें आगे बढ़ाने में करना चाहिए। सवाल: नए कलाकारों के साथ काम करते हुए क्या कभी ऐसा लगता है कि अब प्रतिस्पर्धा से ज्यादा उन्हें आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है? जवाब: बिल्कुल। ऐसा नहीं होना चाहिए कि हम सोचें कि मैंने यह नहीं किया, तो तुम भी मत करो। हमारे अंदर की कॉम्पिटिटिवनेस निकल जानी चाहिए। हमें अपने यंगस्टर्स को हमेशा प्यार देना चाहिए। उन्हें पॉजिटिव एनर्जी और पॉजिटिव फीडबैक देना चाहिए। हमें उन्हें आगे बढ़ने में मदद करनी चाहिए। सवाल: आपने इतने सालों में हजारों नए सिंगर्स को सुना है। क्या किसी ऐसे कलाकार को देखकर आपको शुरुआत में ही अंदाजा हो गया था कि वह आगे चलकर बहुत बड़ा नाम बनेगा? जवाब: बहुत लोगों के बारे में ऐसा लगा है। मुझे अरिजीत सिंह के बारे में तब ही पता चल गया था कि वह आगे चलकर सुपरस्टार सिंगर बनेगा, जब वह पांचवें राउंड में बाहर हो गया था। करीब 20 साल पहले की बात है। ‘फेम गुरुकुल’ में उस समय मैं, जावेद साहब और केके हम तीनों जज थे। पता नहीं क्यों पब्लिक वोटिंग के बाद अरिजीत सिंह शो से बाहर हो गए। सवाल: शो से बाहर होने के बावजूद आपको उनमें ऐसा क्या नजर आया था कि आपको लगा कि वह आगे बड़ा नाम बनेंगे? जवाब: उसके बाद भी अरिजीत मेरे दिल में एक इंसान और एक कलाकार के तौर पर हमेशा रहे। आज भी हैं। जब वह बड़े कलाकार बने तो मुझे बहुत खुशी हुई। आज वह अपनी शर्तों पर काम कर रहे हैं। उनके आगे बढ़ने से मुझे बहुत खुशी हुई, क्योंकि मेरे दिल में उनके लिए शुरुआत से ही बहुत सम्मान था।
शंकर महादेवन बोले- संगीत ही आत्मा है:एआई का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करें, वायरल लोकप्रियता नहीं, हुनर कलाकार को टिकाता है

