जमुई सदर अस्पताल में एक ही रात दो महिलाओं की मौत के बाद निजी क्लीनिकों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई तेज हो गई है। लगातार दूसरे दिन एक निजी क्लीनिक को सील किया गया। सोमवार देर शाम जमुई-खैरा मुख्य मार्ग स्थित नीमारंग के जीपी पॉली क्लिनिक में अनुमंडल पदाधिकारी सौरभ कुमार के नेतृत्व में छापेमारी की गई। तीन घंटे से अधिक चली जांच में डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ के मौजूद नहीं रहने, सीसीटीवी कैमरा बंद होने और प्रदूषण समेत कई जरूरी दस्तावेजों में कमी मिलने के बाद क्लीनिक को सील कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान क्लीनिक में भर्ती मरीजों को सदर अस्पताल भेजने की बात कही गई तो एक मरीज के परिजन ने वहां जाने से इनकार कर दिया। परिजन ने सदर अस्पताल में हाल में हुई दो महिलाओं की मौत का हवाला देते हुए सवाल किया कि वहां इलाज के दौरान कुछ अनहोनी होने पर इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। इस घटना ने निजी क्लीनिकों पर प्रशासन की कार्रवाई के बीच सदर अस्पताल को लेकर मरीजों के भरोसे से जुड़ा सवाल भी सामने ला दिया। परिजन बोले- सदर अस्पताल में दो मौतें हुई हैं, वहां क्यों जाएं क्लीनिक में भर्ती मरीजों को सदर अस्पताल शिफ्ट करने के दौरान एक मरीज के परिजन ने अधिकारियों के सामने सदर अस्पताल जाने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि सदर अस्पताल में दो महिलाओं की मौत हो चुकी है। ऐसे में वे अपने मरीज को वहां क्यों लेकर जाएं। परिजन ने यह भी सवाल उठाया कि अगर सदर अस्पताल में इलाज के दौरान उनके मरीज के साथ कुछ गलत होता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। महिला बोली- 10 दिन पहले सदर अस्पताल से लौटाया गया था छापेमारी के दौरान सिकंदरा प्रखंड के कुमार गांव की एक महिला मरीज ने भी अपना अनुभव अधिकारियों के सामने रखा। महिला के अनुसार, वह करीब 10 दिन पहले इलाज के लिए सदर अस्पताल गई थी। वहां इलाज नहीं हो पाने की बात कहकर उसे वापस कर दिया गया था। इसके बाद उसने निजी क्लीनिक में इलाज कराया। हालांकि, महिला को सदर अस्पताल से किस कारण वापस किया गया था, इसकी अलग से पुष्टि नहीं हो सकी है। क्लीनिक में मरीज भर्ती, लेकिन डॉक्टर-नर्स नहीं मिले जिलाधिकारी के निर्देश पर सदर अस्पताल के आसपास संचालित निजी नर्सिंग होम और क्लीनिकों की जांच की जा रही है। इसी क्रम में एसडीओ सौरभ कुमार के नेतृत्व में जीपी पॉली क्लिनिक की जांच की गई। अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान क्लीनिक में कई मरीज भर्ती मिले, लेकिन उनके इलाज के लिए डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं थे। क्लीनिक का सीसीटीवी कैमरा भी काम नहीं कर रहा था। इसके अलावा प्रदूषण से संबंधित दस्तावेज समेत कई कागजात में कमी मिली। इन कमियों के बाद प्रशासन ने क्लीनिक को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान एसीएमओ डॉ. अरविंद कुमार समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। आशा कार्यकर्ता के जरिए मरीज के पहुंचने की बात सामने आई जांच के दौरान अधिकारियों को यह भी जानकारी मिली कि भर्ती मरीजों में एक मरीज को आशा कार्यकर्ता के माध्यम से सदर अस्पताल से निजी क्लीनिक लाए जाने की बात कही गई। इसके बाद एसडीओ के निर्देश पर क्लीनिक में भर्ती सभी मरीजों को एंबुलेंस से सदर अस्पताल भेजा गया। प्रशासन अब क्लीनिक के दस्तावेजों और यहां मरीजों के इलाज से संबंधित व्यवस्थाओं की जांच कर रहा है। एक दिन पहले डॉ. शालिनी का क्लीनिक भी सील इससे पहले रविवार देर शाम प्रशासन ने डॉ. शालिनी के निजी क्लीनिक पर भी छापेमारी कर उसे सील किया था। लगातार दो दिनों में दो निजी क्लीनिकों पर कार्रवाई के बाद निजी क्लीनिक संचालकों में हड़कंप है। वहीं, कार्रवाई के दौरान मरीज के परिजन का सदर अस्पताल जाने से इनकार करना हाल में हुई दो महिलाओं की मौत के बाद अस्पताल की व्यवस्था और मरीजों के भरोसे से जुड़ा अहम सवाल सामने ला रहा है। प्रशासन की कार्रवाई निजी क्लीनिकों की व्यवस्थाओं और दस्तावेजों की जांच तक सीमित है; सदर अस्पताल में हुई दोनों मौतों के कारणों की जांच अलग स्तर पर की जा रही है। जमुई सदर अस्पताल में एक ही रात दो महिलाओं की मौत के बाद निजी क्लीनिकों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई तेज हो गई है। लगातार दूसरे दिन एक निजी क्लीनिक को सील किया गया। सोमवार देर शाम जमुई-खैरा मुख्य मार्ग स्थित नीमारंग के जीपी पॉली क्लिनिक में अनुमंडल पदाधिकारी सौरभ कुमार के नेतृत्व में छापेमारी की गई। तीन घंटे से अधिक चली जांच में डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ के मौजूद नहीं रहने, सीसीटीवी कैमरा बंद होने और प्रदूषण समेत कई जरूरी दस्तावेजों में कमी मिलने के बाद क्लीनिक को सील कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान क्लीनिक में भर्ती मरीजों को सदर अस्पताल भेजने की बात कही गई तो एक मरीज के परिजन ने वहां जाने से इनकार कर दिया। परिजन ने सदर अस्पताल में हाल में हुई दो महिलाओं की मौत का हवाला देते हुए सवाल किया कि वहां इलाज के दौरान कुछ अनहोनी होने पर इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। इस घटना ने निजी क्लीनिकों पर प्रशासन की कार्रवाई के बीच सदर अस्पताल को लेकर मरीजों के भरोसे से जुड़ा सवाल भी सामने ला दिया। परिजन बोले- सदर अस्पताल में दो मौतें हुई हैं, वहां क्यों जाएं क्लीनिक में भर्ती मरीजों को सदर अस्पताल शिफ्ट करने के दौरान एक मरीज के परिजन ने अधिकारियों के सामने सदर अस्पताल जाने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि सदर अस्पताल में दो महिलाओं की मौत हो चुकी है। ऐसे में वे अपने मरीज को वहां क्यों लेकर जाएं। परिजन ने यह भी सवाल उठाया कि अगर सदर अस्पताल में इलाज के दौरान उनके मरीज के साथ कुछ गलत होता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। महिला बोली- 10 दिन पहले सदर अस्पताल से लौटाया गया था छापेमारी के दौरान सिकंदरा प्रखंड के कुमार गांव की एक महिला मरीज ने भी अपना अनुभव अधिकारियों के सामने रखा। महिला के अनुसार, वह करीब 10 दिन पहले इलाज के लिए सदर अस्पताल गई थी। वहां इलाज नहीं हो पाने की बात कहकर उसे वापस कर दिया गया था। इसके बाद उसने निजी क्लीनिक में इलाज कराया। हालांकि, महिला को सदर अस्पताल से किस कारण वापस किया गया था, इसकी अलग से पुष्टि नहीं हो सकी है। क्लीनिक में मरीज भर्ती, लेकिन डॉक्टर-नर्स नहीं मिले जिलाधिकारी के निर्देश पर सदर अस्पताल के आसपास संचालित निजी नर्सिंग होम और क्लीनिकों की जांच की जा रही है। इसी क्रम में एसडीओ सौरभ कुमार के नेतृत्व में जीपी पॉली क्लिनिक की जांच की गई। अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान क्लीनिक में कई मरीज भर्ती मिले, लेकिन उनके इलाज के लिए डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं थे। क्लीनिक का सीसीटीवी कैमरा भी काम नहीं कर रहा था। इसके अलावा प्रदूषण से संबंधित दस्तावेज समेत कई कागजात में कमी मिली। इन कमियों के बाद प्रशासन ने क्लीनिक को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान एसीएमओ डॉ. अरविंद कुमार समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। आशा कार्यकर्ता के जरिए मरीज के पहुंचने की बात सामने आई जांच के दौरान अधिकारियों को यह भी जानकारी मिली कि भर्ती मरीजों में एक मरीज को आशा कार्यकर्ता के माध्यम से सदर अस्पताल से निजी क्लीनिक लाए जाने की बात कही गई। इसके बाद एसडीओ के निर्देश पर क्लीनिक में भर्ती सभी मरीजों को एंबुलेंस से सदर अस्पताल भेजा गया। प्रशासन अब क्लीनिक के दस्तावेजों और यहां मरीजों के इलाज से संबंधित व्यवस्थाओं की जांच कर रहा है। एक दिन पहले डॉ. शालिनी का क्लीनिक भी सील इससे पहले रविवार देर शाम प्रशासन ने डॉ. शालिनी के निजी क्लीनिक पर भी छापेमारी कर उसे सील किया था। लगातार दो दिनों में दो निजी क्लीनिकों पर कार्रवाई के बाद निजी क्लीनिक संचालकों में हड़कंप है। वहीं, कार्रवाई के दौरान मरीज के परिजन का सदर अस्पताल जाने से इनकार करना हाल में हुई दो महिलाओं की मौत के बाद अस्पताल की व्यवस्था और मरीजों के भरोसे से जुड़ा अहम सवाल सामने ला रहा है। प्रशासन की कार्रवाई निजी क्लीनिकों की व्यवस्थाओं और दस्तावेजों की जांच तक सीमित है; सदर अस्पताल में हुई दोनों मौतों के कारणों की जांच अलग स्तर पर की जा रही है।

